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पैगंबर का जन्मदिनः जम्मू-कश्मीर में दिखा अद्भुत नजारा, देखिए ये तस्वीरें

Sun, 10 Nov 2019 05:04 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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id e milad - फोटो : बासित जरगर
पैगंबर के जन्मदिन के पर्व पर जम्मू-कश्मीर में अद्भुत नजारा देखने को मिला। प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में लोगों ने पैगंबर को याद किया। मुस्लिम समुदाय के इस पावन पर्व पर शहर में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किये गए थे।

आगे की स्लाइड में इस पर्व से जुड़ी कई अहम बातें पढ़ें
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id e milad - फोटो : बासित जरगर
रबी उल अव्वल इस्लामी कैलेंडर का वो महीना है, जिसकी 12 तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का मक्के में बनी हाशिम के परिवार में जन्म हुआ। उनकी मां का नाम बीबी आमिना था और पिता का नाम अब्दुल्लाह था। उनके पिता का देहांत उनके जन्म से पूर्व ही हो गया था। इसलिए उनकी देखरेख उनकी मां ने की। इसके बाद उनकी मां का भी जल्दी देहांत हो जाने के कारण उनके दादा ने उनको पाला पोसा। दादा भी उनकी कम आयु में इस दुनिया से चले गये और उनके चाचा अबु तालिब ने उन्हें अपने संरक्षण में ले लिया। बचपन से ही हजरत मोहम्मद एक निहायत शरीफ, संयम से काम लेने वाले और बुरी बातों से दूर रहने वाले बच्चों में जाने गये।
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id e milad - फोटो : बासित जरगर
बड़े होकर भी पूरे मक्के के समाज में उनको सादिक और अमीन के नाम से जाना और पहचाना गया। जब वो 25 साल के थे, तो मक्के की बड़ी व्यवसायी और उनसे उम्र में 15 साल बड़ी हजरत ख़दीजा ने विवाह का प्रस्ताव दिया, जो उन्होंने कुबूल कर लिया और इस तरह वो दोनों पति-पत्नी के रिश्ते में बंध गये।

 

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id e milad - फोटो : बासित जरगर
40 साल की आयु में उन्हें अल्लाह ने अपना दिव्यदूत बना दिया और उस समय जब उन्हें ये संदेश मिला और उपाधि दी गई तो उस वक्त मक्के से थोड़ी दूर नूरनामी पहाड़ पर स्थित हिरा नामी गुफा में ध्यान-ज्ञान में लगे हुए थे। उन पर जो पहला दिव्य संदेश (पहली वही) ईश्वर की तरफ से अवतरित हुई थी, वो थी - ''पढ़ो अपने पैदा करने वाले के नाम से, जिसने तुम्हें पैदा किया, खून की एक फुटकी से। तुम्हारा पैदा करने वाला बहुत बड़ाई वाला है। उसने तुम्हें ज्ञान और कलम दिया और वो सिखाया जो तुम नहीं जानते थे।'' जैसा कि हमने देखा इस पहले दिव्य संदेश में मोहम्मद साहब को सबसे ज्यादा जिस बात पर ईश्वर की तरफ से बल दिया गया, वो पढ़ने-पढ़ाने पर यानी शिक्षा की प्राप्ति है।

 
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id e milad - फोटो : बासित जरगर
मोहम्मद साहब ने जब एक ईश्वरवाद और मानवता के एक होने का संदेश दिया तो उनका जबरदस्त विरोध हुआ। लेकिन ये नि:संदेह बड़ी उपलब्धि थी कि जो मोहम्मद साहेब के जितने निकट था, उसने उतने ही जल्दी उनके दिये संदेश को कुबूल किया और उन पर ईमान लाया। जिसमें सबसे पहले उनकी पत्नी बीबी ख़दीजा, उनके बचपन से चले आ रहे मित्र अबू बक्र, उनके चचेरे भाई हजरत अली, जो बचपन से उनके संरक्षण में थे और उनके सेवक जैद शामिल थे।

 
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id e milad - फोटो : बासित जरगर
मक्के वालों का जब अत्याचार बढ़ा तो 13 साल के बाद मोहम्मद साहब यसरब यानी वर्तमान में मदीना वालों का निमंत्रण पर, वहां चले गये। हालांकि, वहां पर भी मक्के वालों ने उन्हें चैन से बैठने नहीं दिया और कई बार मदीने पर आक्रमण किया और हर बार पराजित ही हुये। ये कम दिलचस्प बात नहीं कि जितनी जंगे हुईं वो मदीने के करीब और सुलह और शांति की संधि मक्के के निकट हुई। इससे पता चलता है कि मोहम्मद साहब किसी तरह जंग नहीं चाहते थे। तकरीबन मदीने में 8 साल रहने के बाद मोहम्मद साहब ने मक्के का रुख किया और उस पर विजय पा ली, लेकिन बगैर किसी हिंसा, बदले की भावना या अपने विरोधियों को किसी तरह की यातना दिये बगैर यह सब कुछ किया।
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id e milad - फोटो : बासित जरगर
मोहम्मद साहब ने जो मूल संदेश दिया और जो उन्हें मुख्यत: अल्लाह की तरफ से वही के रूप में प्राप्त हुआ था, वो था अल्लाह एक है और उसके सिवा कोई पूजा, अर्चना और उपासना के योग्य नहीं है। कुरान अल्लाह का अंतिम दिव्य संदेश है। हम सबको एक दिन मरने के बाद फिर जिंदा होना है और अपने पैदा करने वाले के सामने अपने कर्मों का लेखा-जोखा पेश करना होगा। जिसके आधार पर स्वर्ग और नर्क का फैसला किया जाएगा। कुरान का यह संदेश हमें हजरत मोहम्मद के द्वारा ईश्वर ने दिया कि अल्लाह समस्त सृष्टि का रचयिता, हमारा पैदा करने वाला और पालनहार है। अल्लाह अतिकृपाशील और दयावान है। मोहम्मद साहब सारी सृष्टि के लिए और समस्त मानवता के लिए कृपाशील हैं।
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