वेलेंटाइन वीक में बुधवार को हग डे मना रहे हैं। अक्सर लोग मनमुटाव होने पर गले लगकर दूरियां कम करते हैं और गिले-शिकवे दूर करते हैं। देश-विदेश में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि जब हम किसी को गले लगाते हैं तो फील-गुड फैक्टर का हमारे शरीर पर बड़ा असर पड़ता है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग और दिल पर पड़ता है। देश में एनएचएम के तहत सभी महिला अस्पतालों में भी नवजात बच्चों को फील-गुड थेरेपी दी जाती है। जिसे कंगारू मदर केयर के नाम से भी जाना जाता है। एक शोध के मुताबिक 20 सेकंड से अधिक समय तक किसी को गले लगाने से दिमाग के साथ-साथ शरीर पर सीधा असर पड़ता है। यह हमारे रक्तचाप को दुरुस्त रखने में भी मदद करता है।
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hug day
- फोटो : social media
गले लगाकर किसी का भी दूर कर सकते हैं गम
प्रैक्टिकली यह बात आपने महसूस भी की होगी कि जब कोई व्यक्ति गम में होता है और अगर आप उसे गले लगा लेते हो तो सामने वाले का मन अपने आप हल्का हो जाता है। वहीं असल ज़िन्दगी में हर परिवार में छोटे बच्चों को जब चोट लगती है और मां-पिता उन्हें गले लगा लेते हैं तो उसका सारा दर्द दूर हो जाता है। इजरायल के हाइफा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, गले लगना प्राकृतिक दर्द निवारक के समान काम करता है।
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jammu protest
- फोटो : अमर उजाला
बात से ज्यादा असरदार होती है झप्पी
आप कई बार अपनी बात किसी से संवाद में नहीं कह पाते हैं। मगर वहीं अहसास आप किसी को गले लगाकर भी करा सकते हैं। यह एक ऐसा तरीका है जो आपको अपने प्यार और भावनाओं को सामने वाले को महसूस कराने में मदद करता है।
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hug
अवसाद से लड़ने और दिल को स्वस्थ्य रखने में करता है मदद
जब हम किसी को गले लगाते हैं तो हमारे शरीर से ऑक्सिटोसिन हॉर्मोन रिलीज होता है। इसके शरीर से निकलने से व्यक्ति को ख़ुशी का अहसास होता है। इस अहसास से आप तनाव मुक्त रहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्टिसोल नामक यह प्रक्त्रिस्या तनाव हॉर्मोन के उत्पादन को कम करती है। कोर्टिसोल ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए जाना जाता है और इसकी वजह से ह्रदय रोग बढ़ता है। ऐसे में अगर आप लोगों से गले मिलते हैं तो इस हॉर्मोन के स्तर में कमी आएगी। जो आपको स्वस्थ्य और खुशहाल जीवन की ओर लेकर जाएगा।
"टच थेरेपी हर व्यक्ति को भावनात्मक रूप से काफी सुकून देती है। इसका सीधा असर हमारे दिल और दिमाग दोनों पर पड़ता है। इससे हमारा रक्त चाप भी संतुलित रहता है। यह बात पूरी तरह सच है कि गले मिलने से गिले-शिकवे ही नहीं, बीमारियां भी दूर होती हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहारण है देश के अस्पतालों में चल रहा कंगारू मदर केयर। इसमें जन्म के वक्त नवजात को मां की छाती पर लिपटाकर रखा जाता है। जिसके परिणाम उसके मानसिक और शाररिक विकास पर पड़ता है।"- डॉ. जगदीश थापा, मनोचिकित्सक, साइकेट्री अस्पताल (जम्मू)