लगातार दूसरे वर्ष कोरोना महामारी के बीच होली खेली जाएगी। प्रदेश भर में रविवार को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। इसके लिए बाजार सज गए हैं। शहर में युवाओं की टोलियां निकलेंगी और घर-घर जाकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाया जाएगा। हालांकि कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस बार भी उत्साह और उमंग का माहौल थोड़ा फीका है। शहर के परेड, गांधीनगर, जानीपुर सहित अन्य मुख्य बाजारों में रंग-गुलाल की दुकानें सजी हैं। लेकिन कोरोना के कारण कम ही लोग खरीदारी करने पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
2 of 5
होली के लिए सजे बाजार
- फोटो : अमर उजाला
व्यापारियों ने रंग-गुलाल, पिचकारी आदि सामान मंगवाया तो था, लेकिन कम खरीदार होने के कारण पिछले वर्ष की तरह इस बार भी उनकी होली बेरंग दिखाई दे रही है। व्यापारियों का कहना कि जिस तरह से कोरोना संक्रमण बढ़ा, उसके कारण लोग खरीदारी कम कर रहे हैं।
विज्ञापन
3 of 5
होली के लिए सजे बाजार
- फोटो : अमर उजाला
पिचकारियों की डिमांड ज्यादा
होली की खरीदारी में रंगों से पिचकारी की डिमांड ज्यादा है। व्यापारियों का कहना कि छोटे बच्चे सबसे ज्यादा पिचकारी पसंद कर रहे हैं। खरीदारी करने आ रहे लोग बच्चों के लिए रंग खरीद रहे हैं। दुकानदारों ने 50 से 60 हजार तक का सामान मंगवाया था, लेकिन खरीदारी कम होने से अब उन्हें कम दाम पर सामान बेचना पड़ रहा है।
4 of 5
होली के लिए सजे बाजार
- फोटो : अमर उजाला
डुग्गर प्रदेश में होली पर निकलती हैं टोलियां
डुग्गर प्रदेश में होली का बड़ा महत्व है। रंगों के त्योहार का लोगों को काफी इंतजार रहता है। शहर सहित गांवों में लोग टोलियां बनाकर एक-दूसरे को रंग लगाने निकालते हैं। इस दिन पकवान और पारंपरिक गीत-संगीत के कार्यक्रम भी होते हैं। पद्मभूषण डॉ. जितेंद्र उधमपुरी ने कहा कि डुग्गर प्रदेश में होली धूमधाम से मनाई जाती है।
इस दिन लोग मन की दूरियां कम करते हैं। डोगरी में होली से जुड़े लोक संगीत भी हैं, जो होली पर काफी सुने जाते हैं। गांवों में अब भी होली पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाई जाती है। होली पर लोग एकत्रित होकर होलिका दहन करते हैं। एक-दूसरे को मिठाई बांटते हैं।