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अरुण-स्वराज का तिरंगा प्रेम, उस दिन सुषमा के साथ पहुंचे थे जेटली, यह है एक अमर किस्सा

Sun, 25 Aug 2019 11:47 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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अरुण जेटली और सुषमा स्वराज (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
25 जनवरी, 2011 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भाजपा की राष्ट्रीय एकता यात्रा कठुआ में रोक दी और बीजेपी के शीर्ष नेताओं को पांच सौ कार्यकर्ताओं के साथ जम्मू में घुसने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया था। गौरतलब है कि कोलकाता से 13 जनवरी को शुरू हुई यह यात्रा श्रीनगर के लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर संपन्न होनी थी।
 
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अरुण जेटली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
कठुआ में गिरफ्तार ये नेता गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल चौक में झंडा फहराने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ माधोपुर से रावी नदी का पुल पार कर लखनपुर इलाके में घुसे थे। इन्हें श्रीनगर जाने से रोकने के लिए प्रशासन ने राज्य में धारा 144 लागू की हुई थी।
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अरुण जेटली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
गिरफ्तार नेताओं में संसद के दोनों सदनों में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, शांता कुमार, अनंत कुमार, तत्कालीन बीजेपी युवा मोर्चा के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और अनुराग ठाकुर भी शामिल थे। इन नेताओं को उसी जगह से गिरफ्तार किया गया, जहां से 1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था।
 

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अरुण जेटली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि, गिरधारी लाल डोगरा के दामाद अरुण जेटली का भी जम्मू-कश्मीर से विशेष नाता रहा है। 17 जुलाई, 2015 को गिरधारी लाल डोगरा ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जेटली अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लेकर आए थे।
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अरुण जेटली (फाइल फोटो)
जेटली जम्मू और विशेष रूप से हीरानगर के लोगों को विशेष तरजीह देते थे। क्षेत्र और इलाके के लोगों की अच्छी पहचान रखने वाले जेटली अक्सर लोगों के काम आते रहे हैं। यही वजह है कि न सर्फ भाजपा बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के लोगों में भी शोक की लहर है। जेटली के जाने का नुकसान सिर्फ हीरानगर ही नहीं पूरे जम्मू कश्मीर के लोगों को है। गांव में मायूसी छाई है।
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