फारूक अब्दुल्ला
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने हजरतबल मामले पर कहा था कि यह चंद सिरफिरे लोगों की करतूत है, इससे आजादी नहीं मिलने वाला है। ऐसे लोगों को पहले भुखमरी, बीमारी तथा भिक्षावृत्ति से आजादी पाना होगा। पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि सियासी लोगों का विरोध लोकतंत्र में होता है, लेकिन विरोध के लिए गलत दिन का चुनाव किया गया। ईद पर लोग नमाज पढ़ने गए थे। विरोध तो बाद में भी हो सकता था। उन्हें क्या लगता है कि इससे फारूक डर जाएगा। फारूक कभी भी इससे डरने वाला नहीं है। उस दौरान फारूख ने कहा था कि वक्त आ गया है कि अमन से बैठकर हिंदुस्तान-पाकिस्तान बातचीत करे ताकि शांति बहाली के प्रयास हों।