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जानें कैसे इंजीनियरों ने जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में बना दिये ये नायाब अजूबे

Fri, 15 Sep 2017 08:05 PM IST
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
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- फोटो : FILE PHOTO
यहां पहाड़ों के गर्भ में उथल पुथल होती है। चट्टानें चलती हैं। ऐसे में बड़े ढांचे खड़े करना और सुरंगें खोदना जटिल और जोखिम भरा है। लेकिन तमाम चुनौतियाें के बावजूद रियासत में इंजीनियरिंग के अजूबे वजूद में आ रहे हैं। कहीं देश की सबसे लंबी सुरंग बन गई है तो कहीं दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बन गया है।
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Mega Structures - फोटो : FILE PHOTO

मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों से बेपरवाह रियासत में ऐसी कई योजनाएं प्रस्तावित हैं जो अपने आप में दुनिया के लिए मिसाल होंगी। मुश्किल हालात में कीर्तिमान रचते इंजीनियरों का जीवट हैरान करता है।
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Mega Structures - फोटो : FILE PHOTO

चिनैनी नाशरी टनल

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर बनकर तैयार टनल उधमपुर जिले के चिनैनी इलाके से रामबन जिले के नाशरी इलाके तक नौ किलोमीटर लंबी है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार की गई टनल से हाईवे का फासला 31 किलोमीटर कम हो जाएगा। टनल के आसपास वाला इलाका भूस्खलन के लिए जाना जाता है।

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POWER PLANT - फोटो : Demo photo



एक किलोमीटर गहरा है पॉवर प्रोजेक्ट का कुंआ

बांदीपोरा में झेलम की सहायक नदी किशनगंगा के पानी से बिजली तैयार करने के लिए असाधारण परियोजना तैयार होने वाली है। 330 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना में पहाड़ का सीना चीरकर खोदे गए एक किलोमीटर गहरे कुंए को दुनिया में अनोखी मिसाल कहा जा सकता है। प्रेशर शाफ्ट यानी दबाव कुंए की इतनी गहराई दुनिया में मिलना मुश्किल है।
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Mega Structures - फोटो : FILE PHOTO


सबसे ऊंचा है रियासी का रेलवे पुल

घाटी को रेलवे के माध्यम से देश के साथ जोड़ने के लिए रियासी जिले में बनाया गया रेलवे पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है। रेलवे के अनुसार इस पुल की ऊंचाई 359 मीटर है। दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे पुल चीन की बेपेजियांग नदी पर बना पुल है जिसकी ऊंचाई 275 मीटर है।
 
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surang - फोटो : file photo

सुरंग निर्माण में और बनेंगे कीर्तिमान

घाटी से कटे रहने वाले गुरेज इलाके को साल भर संपर्क में रखने के लिए 18 किलोमीटर लंबी टनल का प्रोजेक्ट विचाराधीन है। 9 हजार करोड़ की लागत से प्रस्तावित टनल का प्रोजेक्ट बीआरओ ने केंद्र की मंजूरी के लिए भेजा है। इसी तरह से जोजिला दर्रे पर 14.083 किलोमीटर टनल के प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है।

 
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jammu snow - फोटो : Amar Ujala
यहां 10 एमएम प्रति वर्ष चल रही हैं चट्टानें

हिमालय की पर्वत शृंखला दुनिया की सबसे ऊंची और लंबी होने के साथ साथ सबसे युवा भी है। 50 मिलियन वर्ष पूर्व वजूद में आई इस पर्वत शृंखला के नीचे पांच बड़े फॉल्ट और असंख्य दरारें हैं। इन्हीं दरारों से फूटने वाली ऊर्जा चट्टानों को स्थान बदलने के लिए मजबूर करती है।
 
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Jammu University - फोटो : Amar Ujala


जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर चट्टानें 10 मिलीमीटर प्रतिवर्ष की दर से चल रही हैं। इसी वजह से यहां के पहाड़ कमजोर हैं। निरंतर हो रही भीतरी टूट फूट से पहाड़ कमजोर हो रहे हैं। ऐसे में बड़ी सुरंगे खोदना जटिल और जोखिम से भरा है। पहाड़ के भीतर चूंकि चट्टानें लगातार चल रही हैं, इससे सुरंगों की अलाइनमेंट पर असर पड़ सकता है। केवल अव्वल दर्जे की इंजीनियरिंग ही ऐसी परिस्थितियों से निपट सकती है।- डॉ नवीन हक्खू, ज्योलॉजिस्ट, इंस्टीट्यूट आफ इनर्जी रिसर्च एंड ट्रेनिंग, जम्मू यूनिवर्सिटी 
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