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पानी पर पहरा! कुएं से चोरी रोकने के लिए तैनात है चौकीदार, फिर भी पड़ा डाका तो मिलती है ये सजा

Wed, 24 Jun 2020 04:38 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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पानी की समस्या से जूझ रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
पानी पर लगता रहा है पहरा...सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन जम्मू संभाग में एक ऐसा गांव है जहां पानी पर पहरा लगता है। हर साल कुएं से पानी की चोरी रोकने के लिए एक चौकीदार नियुक्त किया जाता है। बड़ी बात यह है कि कुएं का पानी बांटने के बाद चौकीदार उक्त परिवार का नाम बाकायदा रजिस्टर में दर्ज करता है। भीषण गर्मी के दौरान पानी की किल्लत के बीच स्थानीय लोग यह भी सुनिश्चित करते हैं कि पानी की चोरी न हो।
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पानी की समस्या से जूझ रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
वहीं पानी की चोरी करते पाए जाने पर अगले पांच दिन तक उस व्यक्ति के परिवार को कुएं से पानी नहीं दिया जाता है। यह गांव के प्रत्येक परिवार को बराबर पानी सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। आजादी के दशकों बाद भी कई इलाके ऐसे हैं जहां आज भी लोगों के पास सुविधाओं के नाम पर न तो सड़क, न ही पेयजल सुविधा और न ही मोबाइल नेटवर्क की सुविधा है। जम्मू संभाग में कठुआ मुख्यालय से मात्र 30 किलोमीटर की दूर बड़ानाल गांव है।
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पानी की समस्या से जूझ रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
वर्ष के अंत तक जलशक्ति मिशन के तहत हर घर को नल से पानी देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। दशकों से प्रशासनिक अनदेखी के शिकार बड़ानाल में आज भी हालात बद से बदतर ही है। यहां की बड़ी आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर है। हर साल इस गांव में पीने के पानी के लिए कुएं पर पहरा बैठाया जाता रहा है और इसके बाद भी प्रति परिवार प्रतिदिन महज 15-20 लीटर ही पानी मिल पाता है।

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पानी की समस्या से जूझ रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
जिसका एक बड़ा कारण यहां के कुओं का गर्मी के दौरान सूखना है। इस बार इंद्रदेव की मेहरबानी से कुएं तो नहीं सूखे, लेकिन आज भी इस इलाके के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। राजबाग से निकट घाटी पंचायत से सात किलोमीटर पैदल सफर कर इस गांव तक पहुंचा जाता है। गांव के एक ही कुएं में पानी है। आसपास के दो गांव और लगभग सात सौ की आबादी भी इसी कुएं पर निर्भर है। सरपंच पृथपाल सिंह निक्कू ने बताया कि सात दशक पहले कुंआ खोदा गया था, जो यहां के लोगों के लिए आज भी पेयजल का मुख्य स्त्रोत है।
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पानी की समस्या से जूझ रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
हर घर में नल से पानी पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन गांव में सड़क नहीं है ऐसे में पेयजल सुविधा का विस्तार भी एक बड़ी चुनौती है। सरकारी तंत्र कछुआ चाल से काम करा रहा है, जिससे यहां के लोगों के जीवन में आज तक सुधार नहीं हो पाया है। सरपंच पृथपाल सिंह ने बताया कि एक परिवार को दस या पंद्रह लीटर ही पानी दिया जाता है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था ग्रामीण एक व्यक्ति की रोजाना ड्यूटी लगाकर करते हैं, जो उज्ज दरिया में जाकर पशुओं को पानी पिलाता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पंचायतों को अधिकार दिए जाएं ताकि पंचायतों के फंड का इस्तेमाल कर इन समस्याओं का हल किया जा सके।

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पानी की समस्या से जूझ रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
जिले के 19 में से चार ब्लॉक को पहले चरण में जल जीवन मिशन के तहत लिया गया है। दूसरे चरण में छह और आखिरी चरण में नौ ब्लॉक का काम किया जाएगा। पहले चरण के चार ब्लाक की डीपीआर अंतिम रूप में पहुंच चुकी है। पंचायत प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर में नल से जल पहुंचाया जाना है। इसके बाद कोई भी इलाका पेयजल स्त्रोत के बिना नहीं रहेगा। युद्धस्तर पर सर्वे प्रक्रिया जारी है। बड़ानाल कंडी क्षेत्र है, इसे प्राथमिकता पर रखा गया है।- सुरजीत सिंह, कार्यकारी अभियंता, जलशक्ति विभाग कठुआ
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