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जम्मू-कश्मीरः घर से उठते रहे जनाजे, चारों ओर थी बस चीत्कार ही चीत्कार, काला दिन बनी ये तारीख

Thu, 14 Nov 2019 03:11 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
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डोडा सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के डोडा/उधमपुर जिले में मरमत इलाके में वाहन दुर्घटना के बाद मंगोता गांव में दिन भर मातम छाया रहा। दोपहर तक नम आंखों के साथ सभी 14 को दफनाया गया। जनाजे के दौरान आसपास के गांव से भी सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। पूरे गांव में केवल मृतकों के परिवार के सदस्यों व परिजनों की चीत्कार ही सुनाई दे रही थी। ग्रामीणों का कहना था कि इस दिन को काले दिन के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
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डोडा सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि मंगलवार दोपहर को डोडा के मरमत इलाके में वाहन के दुर्घटना का शिकार होने पर 16 लोगों की मौत हो गई। मरने वाले 14 मंगोता गांव के थे। एक साथ 14 की मौत की सूचना मिलने के बाद पूरे मंगोता गांव में मातमी सन्नाटा छा गया था। डोडा अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाने के बाद मंगलवार को सभी क्षत विक्षत शव मंगोता गांव में पहुंचा दिए गए थे। एक साथ 14 शवों के गांव में पहुंचने पर पूरा गांव ग्रामीणों की चीत्कार के साथ गूंज उठा था।
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डोडा सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
कुछ ग्रामीण ऐसे थे जोकि शवों को देखने के बाद उनकी जुबान से कोई शब्द नहीं निकल पाया था। रात के समय पूरे गांव में सन्नाटा छाया गया। सुबह होने पर सभी परिवारों ने नम आंखों के साथ अंतिम विदाई की तैयारी शुरू कर दी। एक एक कर शवों को घरों से उठाया गया। जब शव उठाए गए तो मृतकों के परिवार के सदस्यों को संभालना मुश्किल हो गया। विशेष तौर पर महिलाएं अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी। उनके रोने की आवाज पूरे गांव में गूंज रही थी।

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डोडा सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
अंतिम विदाई में पहुंचे परिजनों व ग्रामीणों महिलाओं को समझा कर शव उठाए और सबको दफनाया गया। इसके लिए शवों को पांच अलग अलग स्थानों पर ले जाया गया। शवों को दफनाने की प्रक्रिया को पूरा करते शाम के करीब पांच बज गए। मृतकों के परिजनों व मंगोता के ग्रामीणों का कहना था कि 12 नवंबर को दिन को भी भूला नहीं जा सकता है। इस दिन को काले दिन की तरह याद रखा जाएगा, क्योंकि इस दिन हुए वाहन दुर्घटना ने हंसते खेलते परिवारों को उजाड़ कर रख दिया।
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डोडा सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार में कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा था। हालांकि छोटे स्तर के प्रशासन व पुलिस के अधिकारी मौके पर जरूरत पहुंचे थे। दफनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी अधिकारी अपने घरों को लौट गए। किसी ने भी अभी तक मृतकों के परिवार के लिए किसी प्रकार के मुआवजे का एलान नहीं किया है। अंतिम विदाई के लिए डोडा जिले का कोई बड़ा नेता भी नहीं पहुंचा था।
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