इन दोनों को 26 जून को आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वीरवार को मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों को पेश किया गया। दोनों आरोपियों ने खुली अदालत में कहा है कि वे पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट कराने के इच्छुक नहीं हैं।
ये आदेश 29 अगस्त का है। जिसका विवरण अभी सामने आया है।उप-कानूनी सहायता बचाव पक्ष के वकील ने एनआईए के इस दावे का भी खंडन किया कि दोनों ने स्वेच्छा से परीक्षणों के लिए सहमति दी थी। एनआईए की याचिका को खारिज करने की मांग की। क्योंकि कैदियों की हिरासत में मौजूद अभियुक्तों का कोई स्वैच्छिक सहमति बयान एजेंसी द्वारा नहीं लिया गया था।
जानबूझकर दी पनाह
एनआईए के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों ने पहलगाम शहर के ऊपरी इलाकों में सुरम्य बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए हमले से पहले हिल पार्क में एक मौसमी ढोक में तीन सशस्त्र आतंकवादियों को जानबूझकर पनाह दी थी।
आतंकियों को भोजन, आश्रय और रसद सहायता प्रदान की थी। जिन्होंने 22 अप्रैल की दोपहर पर्यटकों की धार्मिक पहचान के आधार पर चुन-चुनकर मार डाला। यह अब तक के सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक बन गया