हम इसी तरह अपनों की लाशें ढोते रहेंगे। चाहें पाकिस्तान, चीन या कोई और भी मुल्क आ जाए, हम अपनी सरहद, अपनी जमीन, अपना वतन छोड़कर नहीं जाएंगे। यह कहना है गांव करमाड़ा के 78 वर्षीय चौधरी मोहम्मद फजल का। जोकि गांव में शुक्रवार रात पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे गए एक ही परिवार के तीन सदस्यों को अंतिम विदाई देने के बाद अमर उजाला के साथ अपने जज्बातों को उजागर कर रहे थे।