झज्जर कोटली में हुए आतंकी हमले में एक और बड़ी जानकारी सामने आ रही है। इसमें आतंकियों के बार्डर पार करने की रणनीति का खुलासा हुआ है। आतंकी और ओवरग्राउंड वर्कर एक दूसरे से व्हाट्सएप पर बात करते थे। एक दूसरे से संपर्क करने में इसी का इस्तेमाल किया जाता था। बार्डर पार करने के लिए इसी का ही इस्तेमाल किया गया।
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इसी ट्रक में सवार थे आतंकी
सूत्रों के अनुसार आतंकियों के बार्डर क्रास करने से पहले और बाद में लगातार आतंकियों की और ट्रक ड्राइवर की बातचीत व्हाट्सएप पर हुई है। दोनों के अलावा ट्रक में बैठा छठा शख्स भी इन लोगों से व्हाट्सएप पर ही संपर्क में था। यह सब लोग आपस में इसी के माध्यम से बात करते थे। यहीं पर यह लोग अपनी रणनीति तय करते थे। इसके लिए कोडवर्ड का भी इस्तेमाल किया जाता था।
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terrorist attack
- फोटो : अमर उजाला
एनआईए ने ट्रक चालक और सह चालक के मोबाइल फोन को सेंटर फोरेंसिक लैब के पास भेजा है। इन दोनों फोन को कोड लगा हुआ है। जिनको डी कोड करने के लिए दिल्ली में भेजा गया है। इन दोनों फोन से काफी जानकारी जांच एजेंसी को मिल सकती है। इसके अलावा आतंकियों के पास से मिले अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों को भी जांच के लिए लैब में भेजा गया है। इसमें वायरलेस सेट शामिल हैं।
एक महीना पहले भी पहुंचाए थे आतंकी
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- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों का कहना है कि आतंकियों को ले जाने वाले ट्रक चालक और सह चालक ने जेके वालपुट्टी को त्रिकुटा नगर के सत्यम रिजार्ट के पास सपना कांप्लेक्स जेके वालपुट्टी वर्क से लदा था। एक महीना पहले भी यहीं से ट्रक चालक जेके वालपुट्टी लेकर गए थे। ऐसे में संभव है कि ट्रक चालक ने कुछ और आतंकियों को भी कश्मीर पहुंचाया था।
मामले की जांच कर रही एनआईए की टीम ने घटना के दिन ट्रक में सवार छठे व्यक्ति की तलाश भी तेज कर दी है। इसे पकड़ने के लिए श्रीनगर में छापेमारी जारी है। लेकिन अभी तक यह पकड़ में नहीं आया है।