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वीक-ऑफ लेते हैं जम्मू में भिखारी, दिन के हिसाब से बदलते हैं लिबास और भगवान, पढ़ें ये रिपोर्ट

Mon, 02 Mar 2020 11:53 AM IST
प्रशांत कुमार गोपाल यादव, जम्मू
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जम्मू की सड़कों पर भिखारी - फोटो : अमर उजाला
जम्मू के भिखारी भगवान के फोटो का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। भिखारी बने बच्चे किसी दिन मां वैष्णो देवी तो किसी दिन भोलेनाथ की तस्वीर थाली में सजाकर भीख मांगने निकल पड़ते हैं। हर भिखारी का अपना इलाका है। शहर के व्यस्त स्थानों और स्कूल-कॉलेजों, शॉपिंग मॉल और सिनेमा हॉल के बाहर ये भिखारी पैसे मांगने के लिए लोगों का काफी दूर तक पीछा करते हैं, साथ ही कपड़े भी खींचते हैं।

 
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भीख मांगने के लिए दिन के हिसाब से बदलते हैं देवी-देवताओं की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
इससे ये लोगों के लिए सिरदर्द भी बने हुए हैं। साथ ही ये भिखारी रविवार को वीक-ऑफ भी लेते हैं। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में भीख मांगना प्रतिबंधित नहीं है, पर शहर में भिखारियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। व्यस्त इलाकों में चौक-चौराहों पर भीख मांगने के दौरान पीछा करने से दुर्घटना होने का भी खतरा बना रहता है। जिससे रास्ता चलने में भी परेशानी आती है।

 
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भीख मांगने के लिए दिन के हिसाब से बदलते हैं देवी-देवताओं की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला रिपोर्टर ने एक सप्ताह तक इन भिखारियों पर नजर रखी। इस दौरान पता चला कि इन भिखारियों ने संगठन बना रखा है। सभी भिखारियों का अपना एक इलाका है। ये भिखारी न ही दूसरे के इलाके में जाते हैं और न ही दूसरे भिखारी को अपने इलाके में आने देते हैं। भिखारी शुक्रवार को मां वैष्णो देवी की तस्वीर थाली में सजाते हैं तो सोमवार को बाबा बर्फानी की तस्वीर रहती है। मंगलवार को हनुमान जी की और गुरुवार को साईं बाबा के नाम पर भीख मांगते हैं।


 

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भीख मांगने के लिए दिन के हिसाब से बदलते हैं देवी-देवताओं की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
भीख मांगने वाले बच्चों के लिए आईसीपीएस (इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेकश्न स्कीम) चलाई जा रही है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के बच्चों की काउंसलिंग और उनकी देखभाल की जाती है। इसके लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 व स्थानीय पुलिस की मदद ली जा सकती है। बाहरी बच्चों के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है।- मुश्ताक, निदेशक, आईसीडीएस

 
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भीख मांगने के लिए दिन के हिसाब से बदलते हैं देवी-देवताओं की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
बेगरी एक्ट को हाईकोर्ट ने बताया था गैरकानूनी
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2019 में भीख मांगने संबंधी प्रिवेंशन ऑफ बेगरी एक्ट 1960 और रूल्स 1964 को असांविधानिक करार दिया था। हाईकोर्ट ने दलील दी थी कि जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष गरीब को भिखारी बना देता है। यह सरकार की नाकामी है कि गरीब को वह जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाती है।
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