पाकिस्तान वो मुल्क है जो अपनी पराजय से सीखने और सुधरने का नाम नहीं लेता है। उसने जब-जब नापाक हरकत की, भारतीय सेना ने उसका माकूल जवाब दिया। अपनी जमीन पर आतंकवाद को पनाह देकर वह भारत के खिलाफ साजिशें रचने से बाज नहीं आता है। साल 28 अगस्त 1965 को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हाजीपीर दर्रे को भारतीय सेना ने अपने कब्जे में लिया था। इससे पहले इस दर्रे को पाकिस्तान लांच पैड के रूप में इस्तेमाल करता था, ताकि घाटी में अशांति फैलाई जा सके। मेजर आरएस दयाल के नेतृत्व में 1-पैरा की टुकड़ियों ने पाकिस्तान को सबक सिखाते हुए इस जगह पर तिरंगा फहराया था।
इस ऐतिहासिक जीत में स्थानीय लोगों ने भी अभूतपूर्व भूमिका निभाई थी। भारतीय सेना बारामुला जिले के बहादुर लोगों की सेवा और बलिदान को कभी नहीं भूली। यह ऑपरेशन भारतीय सेना और बारामुला जिले के निवासियों के बीच स्नेह, विश्वास, मधुर संबंधों का प्रमाण रहा है।