देश आज पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती मना रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसा राजनेता रहे हैं जो अपनी पार्टी के साथ ही सभी दलों के प्रिय नेता रहे हैं। भारत के राजनीतिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी का संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रूप में दर्ज है। उनके भाषण के सभी कायल रहे हैं। जब वो सदन में बोलते थे तो हर कोई उन्हें सुनना चाहता था। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जिन्हें देश हरदम याद रखेगा। एक ऐसे ही किस्से से आज आपको रूबरू कराते हैं। किस्सा है 13 नंबर से जुड़ा...
यूं तो 13 नंबर को अक्सर लोग अच्छा नहीं मानते हैं लेकिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी और मौत तक यह 13 नंबर उनसे जुड़ा रहा। कुछ में स्वयं उन्होंने इस नंबर को चुना तो कुछ कुदरत की तरफ से यह नंबर उनकी जिंदगी में खास महत्व के साथ जुड़ता रहा। अटल जी के लिए 13 नंबर लकी था या अनलकी यह एक ‘अटल रहस्य’ है।
अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि और निधन की तिथि से 13 नंबर अलग न हो सका। वह 25 दिसंबर को पैदा हुए। दिन और महीने का अंतर भी (25-12=13) 13 रहा। उनकी मृत्यु 16 अगस्त को हुई। जन्मतिथि और मृत्यु की तारीख और महीने और साल का अंतर भी 13 रहा। दिन का अंतर नौ (25-16=9) और महीने का अंतर चार (12-8=4) रहा। दोनों को जोड़ने पर (9+4=13) नंबर 13 पर ही आ टिका। इसी तरह उनके जन्म का साल 1924 और मृत्यु का वर्ष 2018 का अंतर 94 रहा। इसका मूलांक भी 13 है।
अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 मई 1996 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली लेकिन बहुमत साबित न होने पर 13 दिन बाद सरकार गिर गई। दूसरी बार भी अटल बिहारी वाजपेयी 13 महीने के लिए प्रधानमंत्री रहे और इसके बाद सरकार गिर गई।
तीसरी बार सरकार बनाने पर अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में 13 दलों का गठबंधन रहा और 13 अक्टूबर 1999 को ही उन्होंने शपथ भी ली। तीसरी बार 13 अक्टूबर को शपथ न लेने के लिए लोगों ने मना किया लेकिन अटल जी नहीं माने और यह सरकार पूरे पांच साल चली।
2004 के चुनाव में 13 मई को हुई मतगणना में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 अप्रैल को ही नामांकन पत्र दाखिल किया था।