भाजपा के वरिष्ठ नेता और मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्री का कार्यभार संभालने वाले अरुण जेटली का निधन हो गया है। उन्होंने आज दोपहर दिल्ली एम्स में 12 बजकर सात मिनट पर आखिरी सांस ली। जेटली एम्स में पिछले कई दिनों से भर्ती थे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही थी। अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर, 1952 को दिल्ली में हुआ था। अरुण जेटली के पिता का नाम महाराज किशन जेटली और मां का नाम रतन प्रभा जेटली है। उनके पिता महाराज किशन जेटली एक वकील थे। वह नई दिल्ली के नरैना विहार में रहते थे, जहां उन्होंने अपने बचपन का अधिकांश हिस्सा बिताया था। उनकी मां रतन प्रभा एक गृहिणी थीं, जिन्होंने अपना खाली समय सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित किया। अरुण जेटली की दो बहनें हैं, दोनों उनसे बड़ी हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें अरुण जेटली का पारिवारिक से लेकर सियासी सफर...
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Jan 10, 1957
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अरुण जेटली की बचपन की तस्वीर
अरुण जेटली की यह तस्वीर सेंट जेवियर्स स्कूल की है। उनके यादगार पलों वह इस तस्वीर को मानते थे। उनका मानना था कि यहां उन्होंने अपने विचारों को ढाला, जिसने बाद में उन्होंने राजनीतिक दृष्टि को आकार दिया।
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Jan 10, 1969
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अरुण जेटली के कॉलेज के दिनों की तस्वीर
अरुण जेटली ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी की डिग्री हासिल की।
Jan 10, 1974
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अरुण जेटली 70 के दशक की शुरूआत में अखिल एबीवीपी में शामिल हुए
अरुण जेटली 70 के दशक की शुरूआत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हुए थे। साल 1974 में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष चुने गए।
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Jan 10, 1975
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इमरजेंसी के दौरान अरुण जेटली को भी हिरासत में लिया गया था। इस दौरान उन्हें अंबाला जेल और फिर तिहाड़ जेल में रखा गया था।
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Jan 10, 1976
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1977 में जेटली लोकतांत्रिक युवा मोर्चा के संयोजक बनाए गए। जिसके बाद उन्हें दिल्ली एबीवीपी का अध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान वह एबीवीपी की भारत इकाई में सचिव पद पर भी रहे। जेटली की राजनीति में सक्रियता को देखते हुए उन्हें बीजेपी की युवा इकाई का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
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Jan 10, 1977
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वकालत पूरी करने के बाद अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश की कई हाईकोर्ट्स में प्रैक्टिस भी की थी।
Jan 10, 1980
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अरुण जेटली ने 1980 में भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की। इससे पहले वह 1977 में लोकतांत्रिक युवा मोर्चा के संयोजक बनाए गए। जिसके बाद उन्हें दिल्ली एबीवीपी का अध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान वह एबीवीपी की भारत इकाई में सचिव पद पर भी रहे। जेटली की राजनीति में सक्रियता को देखते हुए उन्हें बीजेपी की युवा इकाई का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया था।
May 24, 1982
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जेटली का जम्मू-कश्मीर से गहरा नाता रहा है। उनकी पत्नी जम्मू-कश्मीर के गिरधारी लाल डोगरा की बेटी हैं। उनकी शादी 24 मई 1982 को हुई थी। गिरधारी लाल जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य थे। डोगरा ने दो बार संसद सदस्य के रूप में और छह बार विधान सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया।
Jun 27, 1983
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साल 1983 में अरुण जेटली के घर बेटी का जन्म हुआ। उनकी बेटी का नाम सोनाली जेटली है, जो अब एक वकील हैं।
Jan 31, 1989
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साल 1989 में अरुण जेटली के घर बेटे का जन्म हुआ। उनके बेटे का नाम रोहन जेटली है, जो अब एक वकील है।
Jan 10, 1990
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वकालत पूरी करने के बाद अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश की कई हाईकोर्ट्स में प्रैक्टिस भी की थी। 1989 में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। अरुण जेटली साल 1990 में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बने।
Jan 10, 1991
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अरुण जेटली को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्यता 1991 में मिली।
Jan 10, 1998
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अरुण जेटली को 1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का सदस्य बनाया गया।
Jan 10, 1999
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अरुण जेटली और धोनी
- फोटो : फाइल
अरुण जेटली को क्रिकेट बहुत पसंद था। साल 1999 में उन्हें दिल्ली जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष चुना गया। वह बीसीसीआई के उपाध्यक्ष भी रहे। जेटली को राजनीति के साथ-साथ लिखना भी बहुत पसंद है। वह वकालत से संबंधित कई किताबें भी लिखीं।
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अरुण जेटली (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
13 अक्टूबर, 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद जेटली विनिवेश नीति के लिए बनाए गए नए मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए थे।
साल 2009
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अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में अतिरिक्त प्रभार के तौर पर उनको कानून मंत्रालय भी सौंपा गया। बाद में उन्हें इसी मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। 3 जून, 2009 को राज्यसभा में उन्हें विपक्ष का नेता चुना गया। वर्तमान में अरुण जेटली उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे।
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बजट पेश करते अरुण जेटली
26 मई, 2014 को नरेंद्र मोदी सरकार में उन्होंने बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ ली थी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह देश के वित्त मंत्री रहे। कुछ समय के लिए उन्हें रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए ही मोदी सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने देश में जीएसटी लागू किया।
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कांग्रेस के दिवंगत नेता माधवराव सिंधिया, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से लेकर जनता दल के शरद यादव तक, उनके क्लाइंट (वकालत के पेशे में) रह चुके हैं।
अरुण जेटली को भारतीय जनता पार्टी का संकटमोचक भी कहा जाता है। पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने से लेकर सरकार के अहम फैसलों तक, जेटली की अहम भूमिका रहती है। जेटली के इतने लंबे सियासी सफर में पार्टी के लिए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता है। यही वजह है कि शुक्रवार रात उनके एम्स में भर्ती होने की जानकारी मिलते ही पीएम मोदी स्वयं अस्पताल पहुंच गए थे।