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18 जवानों की शहादत के बाद वो अमावस की रात, जब दुश्मन को बताया- घर में घुसकर मारने की कूवत रखते हैं

Sat, 07 Dec 2019 12:34 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सर्जिकल स्ट्राइक - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
आज देश सशस्त्र सेना झंडा दिवस मना रहा है। देश की रक्षा में जान न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की याद में यह दिन मनाते हैं। आज जांबाज सैनिकों के शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है। देश के वीर सपूतों पर दुश्मन देश ने कई बार हमले किए हैं। इन्हीं हमलों में एक हमला था उरी हमला। इस हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन इसके बाद देश के वीर सपूतों ने दुश्मन देश को ऐसा सबक सिखाया जिसकी कल्पना शायद उसने कभी सपने में भी नहीं की थी।

आगे की स्लाइड में पढ़िए उस रात की कहानी...


 
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भारतीय सेना - फोटो : Indian Army Twitter
अमावस की रात, दो घंटे का समय, 125 कमांडो और 50 आतंकी ढेर। भारत मां के वीर सपूतों ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। साल 2016 में 28-29 सितंबर की रात को हिंदुस्तान ने इस सर्जिकल स्ट्राइक से दुनिया को बता दिया था कि वो दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने की कूवत रखता है।

 
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indian army ogw arrest - फोटो : फाइल, अमर उजाला
ये ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि इसकी जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के लिए कमांडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। आसमान में करीब 35 हजार फीट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर इस ऑपरेशन की निगरानी कर थे।

 

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भारतीय सेना - फोटो : सोशल मीडिया
125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कमांडो का चयन पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश से हुआ और विशेष टीम का गठन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे सभी कमांडो पैदल मार्ग से ही पीओके में घुसे और सफल होकर वापस आए।

 
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भारतीय सेना - फोटो : Indian Army Twitter
28 सितंबर रात दो बजकर दस मिनट पर पुंछ से एलओसी पार कर कमांडो पाक अधिकृत कश्मीर के भिंबर, कैल क्षेत्र स्थित कैंप में पहुंचे। हमले से पहले आतंकियों के कैंप की पूरी जानकारी हासिल कर ली गई थी। आतंकी किस समय सोते हैं और कब खाना खाते हैं, इसकी जानकारी भी ली गई थी।

 
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भारतीय सेना - फोटो : Social Media
इस सर्जिकल स्ट्राइक के समय 125 जवानों में से केवल 35 कमांडो ही कैंप के अंदर गए थे। बाकी कैंप के बाहर थे, जो ऑपरेशन को कवर कर रहे थे, ताकि बाहरी हमले से बचा जा सके। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का ध्यान बंटाने के लिए पुंछ व उड़ी सेक्टर पर एलओसी पर फायरिंग भी की गई।

 
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भारतीय सेना - फोटो : Social Media
इस फायरिंग के दौरान ही जवानों ने सीमा पार की और आतंकियों पर हमला करके उन्हें ढेर करके वापस आए। आतंकी कैंप एलओसी से 12-15 किलोमीटर दूर थे। पांच टीमों ने अलग-अलग तरीके से आतंकी कैंपों पर हमला किया।

 

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मार्कोज कमांडो - फोटो : सोशल मीडिया
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान कमांडो के साथ एक गाइड भी था, जो एक साल से आतंकी ट्रेनिंग कैंप में मौजूद था। खास बात ये कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए चुने गए कमांडो के फोन भी बंद कर दिए गए थे। वह घर से भी एक महीने से दूर थे और घर में भी बात करने की इजाजत नहीं थी। पूरा ऑपरेशन उत्तरी कमान के नेतृत्व में हुआ।

 
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भारतीय सेना - फोटो : Social Media
उरी हमला बना वजह
18 सितंबर 2016 की सुबह करीब पांच बजे जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। यह भारतीय सेना पर किया गया, लगभग 20 सालों में सबसे बड़ा हमला था। इसके बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला लिया गया था।
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