जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह मंगलवार को पुलिस के अन्य आला अधिकारियों के साथ शहीद पुलिस इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ भट के अनंतनाग के चांदपोरा (बिजबिहाड़ा) स्थित उनके घर परिवार के साथ संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। इस दौरान शहीद की एक बेटी बिलख पड़ी तो डीजीपी ने भाव विभोर होते हुए उसे गले लगा लिया।
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शहीद अशरफ के परिवार से मिले डीजीपी
- फोटो : अमर उजाला
तभी बेटी ने पूछा...अब मेरे पिता को कौन वापस, कौन मेरे सपनों को पूरा करेगा। इसे सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। डीजीपी ने परिवार को पूरी मदद का आश्वासन दिया। सोमवार को आतंकी हमले में शहीद पुलिस इंस्पेक्टर अशरफ के घर पर मातम का माहौल था। दूर- दूर से लोग उनके घर अफसोस करने पहुंचे हुए थे।
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शहीद की बेटी से बात करते हुए डीजीपी
- फोटो : अमर उजाला
इसी दौरान जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह भी मंगलवार को परिवार के साथ उनका दुख सांझा करने पहुंचे। डीजीपी ने वहां मौजूद उनकी बेटियों और बुजुर्ग पिता मोहम्मद रमज़ान भट से भी मुलाकात की और उनके साथ उनका दुख साझा किया।
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शहीद अशरफ के परिवार से मिले डीजीपी
- फोटो : अमर उजाला
बेटी को डाक्टर बनाना चाहते थे अशरफ
शहीद इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ भट की दो बेटियां आलिया व तौसीफ तथा एक बेटा माजिद है। इसके अलावा उनके परिवार में उनकी पत्नी और बीमार पिता और बुजुर्ग मां भी है। पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि शहीद इंस्पेक्टर अशरफ अपनी बेटियों को डॉक्टर बनाना चाहता था जबकि एक बेटी हाल ही में नीट की परीक्षा में भी बैठी थी। डीजीपी के समक्ष आईजी कश्मीर ज़ोन विजय कुमार, डीआईजी एसकेआर अतुल गोयल और एसएसपी अनंतनाग संदीप चौधरी भी थे।
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शहीद अशरफ का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि आतंकवादियों ने सोमवार की शाम जम्मू-कश्मीर पुलिस के इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ भट्ट की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी जब वह नमाज पढ़ने के बाद पिता से मिलने जा रहे थे। घर के बाहर ही अज्ञात आतंकियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां दाग दीं अशरफ वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े, और हमलावर वहां से भाग निकले। गोलियां चलने की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस वर्ष अब तक पुलिस के 20 जवान शहीद
इस वर्ष जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों मे अब तक पुलिस के 20, सीआरपीएफ़ के 21 और सेना के सेना 15 जवान शहीद हुए हैं। सेना के अधिकतर जवान एलओसी पर शहीद हुए हैं।