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टूट रही हैं कट्टरता की जंजीरें: विकासपथ पर घाटी की महिलाएं, इन हाथों में छिपी है बदलते कश्मीर की कहानी

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ऐशमुक़ाम निवासी रूबी - फोटो : अमर उजाला
कभी कट्टरता की जंजीरों में जकड़ी घाटी की महिलाएं अब अपनी किस्मत खुद बदल रही हैं। इतना ही नहीं खुद के हुनर से लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रही हैं। वैसे तो घाटी की कई महिलाएं अपने जज्बे के चलते देश-विदेश में नाम कमा रही हैं, लेकिन सामान्य और आतंकग्रस्त इलाकों की महिलाओं का आगे आना बहुत मायने रखता है। ये वही महिलाएं हैं जिनको लंबे अर्से तक कट्टरता की बेड़ियों ने जकड़े रखा है।

ऐसी ही सफलता की एक कहानी अनंतनाग जिले के ऐशमुक़ाम की है। जहां रूबी अपने हुनर से पति और परिवार की मदद करने के साथ ही लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। रूबी कारपेंटर का काम करती हैं। उनके कारखाने में चार से पांच लोग काम करते हैं। जिसके बदले उनको अच्छी रकम मिलती है। रूबी का कहना है कि मैं अपने काम से बहुत खुश हूं। मुझे गर्व है कि अल्लाह ने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं खुद के परिवार के साथ लोगों को रोजगार भी दे पा रही हूं।
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ऐशमुक़ाम निवासी रूबी - फोटो : अमर उजाला
रूबी ने कहा कि बड़े परिवारों की महिलाएं और बेटियां अपना मुकाम हासिल कर पाती हैं लेकिन मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग की महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

 
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ऐशमुक़ाम निवासी रूबी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि मैं अपने जैसी महिलाओं और उनके परिवार के लोगों से कहूंगी कि वो आगे आएं और खुद को सशक्त करें। महिला सशक्तिकरण के जरिए ही समाज को बदला जा सकता है। 

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ऐशमुक़ाम निवासी रूबी - फोटो : अमर उजाला
रूबी की इस पहल और कदम के पीछे सबसे अहम बात ये है कि उनके पति भी इस काम से बेहद खुश हैं।
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ऐशमुक़ाम निवासी रूबी - फोटो : अमर उजाला
रूबी के काम में वह मदद करते हैं। साथ ही काम में और निखार लाने के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं। उनके पति का नाम रियाज अहमद है।
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