कभी कट्टरता की जंजीरों में जकड़ी घाटी की महिलाएं अब अपनी किस्मत खुद बदल रही हैं। इतना ही नहीं खुद के हुनर से लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रही हैं। वैसे तो घाटी की कई महिलाएं अपने जज्बे के चलते देश-विदेश में नाम कमा रही हैं, लेकिन सामान्य और आतंकग्रस्त इलाकों की महिलाओं का आगे आना बहुत मायने रखता है। ये वही महिलाएं हैं जिनको लंबे अर्से तक कट्टरता की बेड़ियों ने जकड़े रखा है।
ऐसी ही सफलता की एक कहानी अनंतनाग जिले के ऐशमुक़ाम की है। जहां रूबी अपने हुनर से पति और परिवार की मदद करने के साथ ही लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। रूबी कारपेंटर का काम करती हैं। उनके कारखाने में चार से पांच लोग काम करते हैं। जिसके बदले उनको अच्छी रकम मिलती है। रूबी का कहना है कि मैं अपने काम से बहुत खुश हूं। मुझे गर्व है कि अल्लाह ने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं खुद के परिवार के साथ लोगों को रोजगार भी दे पा रही हूं।