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जम्मू-कश्मीर: सीमा पर बदली हुई नजर आ रही फिजा, 19 साल बाद तारबंदी के आगे 'सोना उगल रही धरती'

Tue, 13 Apr 2021 10:30 PM IST
प्रशांत कुमार अरुण खजूरिया, हीरानगर।
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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फिजा बदली हुई नजर आ रही है। 19 साल बाद तारबंदी के आगे आठ सौ कनाल पर सोने-सी चमक रही गेहूं की बाली इस इलाके की तकदीर बदलने का संदेश दे रही है। 25 अप्रैल से फसल की कटाई भी शुरू होने वाली है। इसके लिए कृषि विभाग तैयारियों में जुटा है। प्रशासन ने स्थानीय किसानों को तारबंदी के पार खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से यह फसल लगाई है। बीएसएफ की तरफ से भी किसानों को सुरक्षा संबंधी आश्वासन दिए गए हैं। 
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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला।
फरवरी माह से सीमा पर बंदूकें शांत हैं तो वहीं बेहतर हुई फसल किसानों को भी आकर्षित करने लगी है। कटाई के बाद सीमावर्ती किसान कभी भी तारबंदी के आगे अपने खेतों में जाकर अगली फसलें लगा सकेंगे। दरअसल वर्ष 2002 में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी किए जाने से बने तनावपूर्ण माहौल के चलते किसानों ने तारबंदी के आगे की जमीनों पर खेती करना बंद कर दी थी। किसानों को फिर से यहां खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बीएसएफ के सहयोग से तारबंदी के आगे की जमीन को खेती लायक बनाने की प्रक्रिया शुरू की जो अब अंजाम तक पहुंच गई है। फसल पककर तैयार हो चुकी है। 
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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला
पिछले साल 25 सितंबर को तत्कालीन जिला उपायुक्त ओपी भगत ने मनियारी बॉर्डर पोस्ट पर बीएसएफ के अधिकारियों से बैठक कर तारबंदी के आगे की जमीन खेती के लिए तैयार करने में सहयोग मांगा। जिसके बाद बीएसएफ के जवानों ने बख्तरबंद ट्रैक्टरों की मदद से जमीन तैयार करने का काम शुरू कर दिया। करीब दो दशकों से बंजर पड़ी जमीन से सरकंडा हटाने में बीएसएफ के जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद करीब 13 सौ कनाल जमीन खेती के लिए तैयार की गई। 11 नवंबर को 800 कनाल जमीन पर गेहूं लगाने के लिए कृषि विभाग की ओर से बीएसएफ को बीज उपलब्ध कराया गया। अब यह फसल पककर पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। 25 अप्रैल के बाद कभी भी इसकी कटाई का काम शुरू किया जाएगा।

 

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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला
जिला कृषि अधिकारी राजू महाजन ने कहा समय पर बारिश न होने के कारण फसल इतनी अच्छी नहीं हुई जितनी उम्मीद थी। लेकिन तारबंदी के आगे खेतों में किसानों को खेती के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य जरूर पूरा हुआ है। इस महीने 25 तारीख के बाद कभी भी कटाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसमें भी बीएसएफ का सहयोग रहेगा। अच्छी पैदावार के लिए यहां बीबीडब्ल्यू 644 गेहूं का बीज लगाया गया था। फसल को मॉनिटर करने के लिए बाकायदा एक टीम बनाई गई जो समय समय पर तारबंदी के आगे जाकर जानकारी जुटाती रही। उम्मीद है कि इस फसल के बाद किसान अगली फसल खुद लगाने की तैयारी करेंगे। यह उपजाऊ जमीन है यहां उड़द, मूंग दाल की अच्छी फसल तैयार की जा सकती है।
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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला
किसान बेखौफ होकर अपने खेतों में काम करें। उनकी सुरक्षा के लिए हम हैं। अगर उन्हें फिर भी खेतों में जाने से डर लगता है तो हम उनकी सुरक्षा के लिए उनके साथ जवान भी भेजेंगे। लेकिन वह खेतों में आना शुरू करें। जिला प्रशासन की ओर से इसी उद्देश्य से तारबंदी के आगे खेती कराई गई ताकि किसान खुद अपने खेतों को संभाल सकें। हमने प्रशासन को भी फसल लगाने में सहयोग किया और अब अगर किसान खुद जाकर खेतों में काम करना चाहते हैं तो उन्हें भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा। - सत्येंद्र गिरी, सीईओ, बीएसएफ 19 बटालियन
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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला
रविवार को जिला उपायुक्त के साथ तारबंदी के आगे की जमीन पर लगी फसल का जायजा लिया। इस दौरान कुछ सीमावर्ती किसानों से मुलाकात भी की और उन्हें तारबंदी के आगे अपने खेतों में काम करने को भी कहा। यंहा कुछ किसानों ने खेतों की निशानदेही का मुद्दा भी उठाया। यह काम बहुत जल्द कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि निशानदेही के बाद किसान तारबंदी के आगे भी खेती का काम शुरू कर देंगे। रही बात इनकी सुरक्षा की तो बीएसएफ के अधिकारियों ने इन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराने की बात कही है। कटाई के बाद गेहूं किसानों को दी जाएगी या बेची जाएगी इस पर उच्च अधिकारियों से चर्चा जारी है। - राकेश शर्मा, एसडीएम, हीरानगर
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
रक्षा मंत्री से मामला उठाया गया था कि पाकिस्तान हर साल अपनी ओर आईबी के नजदीक फसलों की कटाई करता है, जबकि भारतीय सीमा के किसान तारबंदी के पार फसल लगाना भी छोड़ चुके हैं। इसके बाद मामले को गंभीरता से लिया गया और नतीजा यह है कि किसान अब दो दशक के बाद खुले और शांतिपूर्वक माहौल में सीमा के आगे अपनी जमीनों पर फसल लगा और काट सकेंगे। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि पहले से अधिक मुस्तैदी बरती जाए और पाकिस्तान की किसी भी साजिश को सफल न होने दिया जाए। -डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री
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