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कश्मीर: हैंडलूम गांव के नाम से जाना जाएगा बडगाम का कनिहामा, पर्यटकों के लिए होगा आकर्षण का केंद्र

Tue, 13 Apr 2021 08:18 PM IST
प्रशांत कुमार अरुण कुमार, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में यह पहला ऐसा गांव होगा, जिसे इस तरह से विकसित किया जा रहा है। कनिहामा गांव को अलग पहचान मिलेगी। यह कश्मीर में पश्मीना और कानी शॉल बुनाई का पारंपरिक केंद्र है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
कश्मीर संभाग के बडगाम जिले का कनिहामा गांव अब हैंडलूम गांव के नाम से भी जाना जाएगा। यह देश के चुनिंदा दस हैंडलूम गांवों में शामिल हो जाएगा, जहां पर क्राफ्ट हैंडलूम विलेज बनाया जा रहा है। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और प्रदेश सरकार मिलकर कनिहामा गांव को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के रूप में विकसित कर रहे हैं। गांव को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के रूप में विकसित करने से न सिर्फ हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को एक बाजार मिलेगा, बल्कि यह पर्यटकों को आकर्षिक करने में सहायक होगा। यह गांव गुलमर्ग जाने वाली सड़क के साथ ही पड़ता है। ऐसे में गुलमर्ग जाने वाले पर्यटक इस गांव में विशेष रूप से शिरकत कर सकते हैं। 
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केंद्र सरकार ने बडगाम के कनिहामा गांव के साथ-साथ देशभर के दस गांवों को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के रूप में चुना है। इसके तहत गांव को हैंडलूम पर्यटन के रूप में विकसित किया जाएगा। डीसी की निगरानी में प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसका काम तेजी से चल रहा है। अगले एक वर्ष में इसके विकसित होने की संभावना है।
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पश्मीना शॉल - फोटो : सोशल मीडिया
गांव में हैंडलूम सुविधा केंद्र का निर्माण किया जाएगा, जिसमें तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही बुनकरों के लिए प्रशिक्षण केंद्र बनेगा और साथ ही उन्हें डिजिटल प्लेटफार्म पर उत्पाद बेचने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार की इस पहल से न सिर्फ पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी, साथ ही कारीगरों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा।

 

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शॉल - फोटो : सोशल मीडिया
गांव कानी शॉल बुनाई का केंद्र 
कनिहामा गांव कश्मीर में पश्मीना और कानी शॉल बुनाई का पारंपरिक केंद्र है। गांव में 500 से अधिक बुनकरों और कारीगरों के अलावा 250 हथकरघा बुनकर परिवार हैं, जो इसके साथ जुड़े हुए हैं। गांव को आकर्षक बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। यहां पर बुनकरों को आधुनिक हथकरघे व व्यक्तिगत वर्कशेड प्रदान किए जाएंगे।
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शॉल - फोटो : सोशल मीडिया
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से गांवों को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये गांव पश्मीना और कानी शॉल की बुनाई का पांरपरिक केंद्र रहा है। अब हैंडलूम विलेज बनने से न सिर्फ इससे जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि गांव पर्यटन के हिसाब से विकसित होगा। यह काम डीसी बडगाम की निगरानी में किया जा रहा है। -महमूद अहमद शाह, निदेशक, हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग
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