जम्मू-कश्मीर में पुंछ जिले में 60 घंटे के भीतर आतंकियों द्वारा गुरुवार को सुरक्षाबलों पर दूसरा हमला किया गया। जिसमें दो जवान शहीद हुए हैं। इस इलाके में आतंकी पिछले 10 दिन से छिपकर बैठे हुए हैं। ये आतंकी एलओसी(नियंत्रण रेखा) से घुसपैठ करके आए थे और मुगल रोड से कश्मीर जाने की फिराक में हैं। जिस जगह आतंकी घेरे गए हैं, वह काफी घना जंगल है। यह क्षेत्र मुगल रोड रास्ते पर डेरा की गली से बफलियाज के बीच है।
बता दें कि सोमवार को पुंछ में एक जेसीओ समेत पांच जवानों ने शहादत दी। गुरुवार शाम को आतंकी हमले में दो और जवान शहीद हुए। इस वर्ष अब तक आतंकियों ने 103 हमले किए हैं। इन हमलों में 26 नागरिकों की मौत और 32 जवान शहीद हुए हैं। सुरक्षाबलों ने 137 आतंकियों को मार गिराने में सफलता भी पाई है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह पड़ोसी मुल्क ने जम्मू-कश्मीर में आतंक के बीज बोने की नापाक हरकत की और देश की रक्षा में जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पहला फिदायीन हमलाः जम्मू कश्मीर में पहला फिदायीन हमला 6 अगस्त 1999 को हुआ। एक हमलावर ने सैनिक शिविर के भीतर घुसकर हमला किया। इसमें एक मेजर समेत तीन सैनिक शहीद हुए थे।
1 अक्टूबर 2001- श्रीनगर स्थित विधानसभा में फिदायीन हमला। चार फिदायीन ढेर। 11 जवान शहीद। 24 नागरिकों की मौत।
17 नवंबर 2001- रामबन में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ने किया हमला। दस जवान शहीद। चार नागरिकों की मौत।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
4 दिसंबर 2001- कुपवाड़ा में लश्कर के तीन सदस्यीय आत्मघाती दस्ते ने सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला किया। तीनों आतंकी ढेर। दो जवान शहीद। दो जवान सहित पांच जख्मी।
14 मई 2002- कालूचक स्थित सैन्य क्षेत्र में हमले में तीन आतंकी ढेर। 36 सैन्यकर्मी और उनके परिवार वालों की मौत, 48 जख्मी।
24 नवंबर 2002- जम्मू के रघुनाथ मंदिर में फिदायीन हमला। तीन आतंकियों सहित 13 लोगों की मौत।
18 दिसंबर 2002- थनामंडी आर्मी पोस्ट पर हमले में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी ढेर। एक जवान शहीद और तीन जवान जख्मी।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
14 मार्च 2003- पुंछ बस स्टैंड पर आतंकी हमले में एक डीएसपी और तीन नागरिकों की मौत।
25 अप्रैल 2003- बांडीपोरा में बीएसएफ कैंप में हुए आतंकी हमले में दो आतंकी ढेर। तीन बीएसएफ जवान शहीद। एक नागरिक की मौत। चार जवानों सहित सात जख्मी।
26 अप्रैल 2003- श्रीनगर स्थित ऑल इंडिया रेडियो पर आतंकी हमला। तीन आतंकी ढेर और दो जवान शहीद। मुठभेड़ में आठ अन्य जख्मी।
15 मई 2003- पुंछ शहर में पुलिस की वर्दी में आए आतंकी ने सेना कैंप के बाहर आतंकी हमला किया। इसमें एक जवान शहीद हुआ। हमलावर मौके से फरार, लेकिन बाद में मारा गया।
28 जून 2003- जम्मू के सुजआं इलाके में सेना की डोगरा रेजीमेंट पर फिदायीन हमला। 12 जवान शहीद। एक लेफ्टिनेंट सहित सात जख्मी। दोनों फिदायीन हमले में मारे गए।
22 जुलाई 2003- अखनूर के टांडा रोड स्थित आर्मी कैंप में फिदायीन हमला। एक ब्रिगेडियर सहित आठ जवान शहीद। चार जनरल, एक ब्रिगेडयर और दो कर्नल सहित 12 जख्मी।
04 सितंबर 2003- पुंछ शहर स्थित सुरक्षाबलों के कैंप में फिदायीन हमला। दो विदेशी और एक महिला की मौत।
17 अक्टूबर 2003- मौलाना आजाद रोड स्थित तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निवास पर आतंकी हमला। दोनों आतंकी मौके पर ही ढेर हुए। दो बीएसएफ जवान शहीद। तीन फोटो जर्नलिस्ट सहित दस जख्मी।
18 नवंबर 2003- श्रीनगर स्थित 15 कोर हेडक्वार्टर में फिदायीन हमला। एक जवान शहीद, दो अन्य जख्मी।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : संजय गुप्ता
2 जनवरी 2004- जम्मू रेलवे स्टेशन पर फिदायीन हमला। चार जवान शहीद। नौ जवानों सहित 15 जख्मी हुए।
23 मई 2004- काजीगुंड के पास लोअर मुंडा क्षेत्र में आईईडी विस्फोट में 19 बीएसएफ जवान शहीद। छह महिलाओं और पांच बच्चों की भी मौत।
12 सितंबर 2004- डलगेट स्थित सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला। दो डिप्टी कमांडेंट शहीद। दोनों आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया।
9 अक्टूबर 2004- सिंहपुरा इलाके में सेना की कान्वाई पर फिदायीन हमला। चार जवान शहीद। 35 जख्मी हुए। एक सिविल ड्राइवर भी मारा गया।
17 नवंबर 2004- सोनवार बाग स्थित क्रिकेट स्टेडियम के पास सुरक्षाबलों ने दो फिदायीन आतंकियों को मार गिराया। यहां प्रधानमंत्री की सभा होनी थी।
3 दिसंबर 2004- सोपोर में एसओजी कैंप में तैनात सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला। पांच जवान शहीद, दो जख्मी। दोनों आतंकी मार गिराए गए।
9 दिसंबर 2004- शोपियां स्थित एसओजी कैंप पर हमला। दो पुलिसकर्मी शहीद, जबकि एक डीएसपी सहित चार लोग जख्मी हो गए।
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आतंकी हमले के बाद तलाशी अभियान चलाते जवान
- फोटो : बासित जरगर
7 जनवरी 2005- श्रीनगर स्थित आयकर कार्यालय में फिदायीन हमला। बीएसएफ के एक डिप्टी कमांडेंट, दो जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद। घटना में एक नागरिक की भी मौत। एक आतंकी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे को बाद में मार गिराया गया।
24 फरवरी 2005- श्रीनगर स्थित डिवीजनल कमिश्नर कार्यालय में फिदायीन हमला। तीन पुलिसकर्मी शहीद। राजस्व विभाग की एक महिला कर्मचारी सहित पांच लोगों की मौत। दो आतंकी मौके पर ही ढेर।
30 मार्च 2005- सोपोर के आरामपोरा इलाके में स्थित बीएसएफ कैंपों पर दो फिदायीन हमलों में दो आतंकी ढेर। एक पैरा मिलेट्री फोर्स का जवान शहीद।
6 अप्रैल 2005- श्रीनगर स्थित टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर पर दो फिदायीन हमले। दोनों आतंकी मौके पर मारे गए। एक पुलिसकर्मी सहित सात लोग जख्मी।
12 मई 2005- श्रीनगर में बीएसएफ के काफिले पर फिदायीन हमला। दो लोग मारे गए, जबकि 60 लोग घायल हुए। घायलों में 25 स्कूली बच्चे भी शामिल।
14 नवंबर 2005- श्रीनगर के लाल चौक क्षेत्र में पल्लाडियम सिनेमा के सामने हुए फिदायीन हमले में दो सीआरपीएफ जवान शहीद। इसके अलावा दो नागरिकों की मौत हो गई। एक जापानी पर्यटक के साथ 17 लोग जख्मी हुए।
16 नवंबर 2005- श्रीनगर की रेजीडेंसी रोड स्थित जेएंडके बैंक हेडक्वार्टर के सामने कार बम हमले में चार नागरिक मारे गए, जबकि विधायक व पूर्व मंत्री उस्मान मजीद सहित 72 लोग जख्मी हो गए।
23 नवंबर 2005- श्रीनगर के डाउनटाउन क्षेत्र स्थित हवाल इलाके में सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला। ग्रेनेड हमले में तीन सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए। जबकि एक पुलिसकर्मी सहित तीन जवान जख्मी हो गए।
4 अक्टूबर 2006- दशनमी अखाड़ा इमारत में हुए हमले में आतंकी हमले में एक की मौत हुई, जबकि तीन अन्य जख्मी हो गए।
1 जून 2007- बारामुला के शीरी इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के फिदायीन ने सेना के काफिले पर हमला किया। दोनों आतंकी ढेर। सेना के छह जवान शहीद। 15 जख्मी।
26 जुलाई 2007- श्रीनगर के बाहरी इलाके जकूरा में स्थित भाबा एटॉमिक सेंटर पर फिदायीन हमला। दो आतंकी ढेर। सात जवान जख्मी।
12 अक्टूबर 2007- डल लेक के किनारे स्थित बुलेवर्ड रोड स्थित सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला। होटल ड्यूक में छुपा एक आतंकी ढेर। तीन सीआरपीएफ जवान हमले में जख्मी हुए।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : बासित जरगर
27 अगस्त 2008 - जम्मू के बाहरी इलाके काना चक सेक्टर में तीन फिदायीन आतंकियों ने हमला किया। तीन सेना के जवान शहीद हुए। पांच नागरिकों की भी हमले में मौत।
5 अगस्त 2009- पुंछ के मंडी सेक्टर में सैन्य कैंप में फिदायीन हमले में तीन आतंकी ढेर।
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- फोटो : अमर उजाला
06 जनवरी 2010- लश्कर आतंकियों ने लाल चौक पर सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला किया। दोनों आतंकियों को मार गिराया। एक नागरिक की मौत और पुलिसकर्मी शहीद हुआ। 12 व्यक्ति जख्मी भी हुए।
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- फोटो : अमर उजाला
26 सितंबर, 2013 को दो आत्मघाती हमले हुए। जिसमें 13 लोग मार गए। कठुआ जिले में हुए हमले में चार पुलिसकर्मी और दो नागरिक मारे गए। वहीं सांबा में हुए हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल बिक्रमजीत सिंह सहित चार सैन्यकर्मी शहीद हुए थे।
24 जून 2013 को श्रीनगर के हैदरपुरा में सेना के काफिले पर हमला हुआ। इसमें आठ जवान शहीद हुए।
श्रीनगर में 31 मार्च 2013 को सीआरपीएफ के शिविर पर हमला हुआ। इसमें पांच लोग मारे गए।
7 अगस्त 2013 को पुंछ के चकां दा बाग में पाकिस्तानी सैनिकों ने आतंकियों के साथ मिलकर बैट हमला किया। जिसमें पांच जवान शहीद हुए।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
साल 2014 में बारामुला के उड़ी सेक्टर में सेना की 31 फील्ड रेजिमेंट पर हमला हुआ। इसमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल एवं सात जवान शहीद हुए।
आतंकियों ने 2015 में कठुआ जिले में एक पुलिस थाने पर हमला किया। इसमें सात लोग मारे गए।
2016 में बारामुला के उड़ी में सेना के कैंप पर हमला हुआ। इसमें 18 जवान शहीद हुए। चार आतंकी मारे गए।
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सुरक्षाबल, फाइल फोटो
- फोटो : बासित जरगर
आतंकियों ने 2017 अमरनाथ यात्रा के लिए जा रही श्रद्धालुओं से भरी बस पर हमला किया। इस हमले में सात श्रद्धालुओं की मौत हुई। वहीं 14 फरवरी 2019 को जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलवामा जिले के लेथपोरा में हुए हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों को इस नापाक हरकत की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी।
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- फोटो : अमर उजाला
4 मई 2020: कश्मीर के हंदवाड़ा में सेना ने कासो के दौरान एक कर्नल समेत 6 जवान खो दिए। इस ऑपरेशन में चार आतंकी भी मारे गए। इसी वर्ष सुंदरबनी में एक जेसीओ और दो जवान शहीद हुए थे। जबकि इसी साल थन्नामंडी में एक जेसीओ शहीद हो गया था।
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- फोटो : अमर उजाला
3 मई, साल 2020, स्थान हंदवाड़ाः सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में पांच जवान शहीद
जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में पांच जवान शहीद हो गए। इसमें सेना की 21-आरआर के कर्नल आशुतोष शर्मा ने भी देश के लिए शहादत दी। कर्नल आशुतोष शर्मा और उनकी टीम के जवानों ने जांबाजी का परिचय देते हुए उस घर में घुसे जिसमें आतंकियों ने लोगों को बंधक बना रखा था। कर्नल का कुशल नेतृत्व और जवानों की जांबाजी के चलते ही बंधक बनाए गए लोगों को वहां से निकालने में सफलता मिली।
7/8 नवंबर, साल 2020, स्थान कुपवाड़ाः घुसपैठ की कोशिश नाकाम, माछिल सेक्टर में चार जवान शहीद
7/8 नवंबर की दरम्यानी रात नियंत्रण रेखा के पास गश्त पार्टी ने संदिग्ध हलचल देखी। जिस पर जवानों ने मोर्चा संभाला और मुठभेड़ शुरू हो गई। सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया और रात में ही एक आतंकी को मार गिराने में कामयाबी हासिल की। रविवार को दिन में दो और आतंकियों को मार गिराया गया। हालांकि इस ऑपरेशन में एक अफसर और तीन जवान शहीद हो गए।