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ऑपरेशन मेघराहत: दो साल पहले जिन जवानों ने जान बचाई, आज उन्हीं पर पत्थर बरसा रहे कश्मीरी युवक

Mon, 19 Sep 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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kashmir - फोटो : File Photo
सितंबर 2014 के शुरूआती दिनों में घाटी में एक भीषण आपदा आई। रातों रात लोगों के घरों में पानी घुसने लगा। जब तक लोग कुछ समझते तब तक उनके सामने एक भारी मुसीबत आ खड़ी थी।
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kashmir flood - फोटो : File Photo
बीते 60 साल में सबसे जबरदस्त बाढ़ से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर तबाही का मंजर देखने को मिल रहा था। राज्य के 390 गांव पानी में डूब चुके थे और इनमें से 50 गांव बुरी तरह से प्रभावित थे। संचार माध्यम ठप पड़े थे। 
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kashmir flood - फोटो : File Photo
सड़कें नदियों में बदल गई थी और लोगों के पास खाने को खाना और पीने को साफ पानी नहीं था।

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kashmir - फोटो : File Photo
लोग बाढ़ से बच निकलने की सारी उम्मीदें छोड़ चुके थे।  लोगों के पास ना सिर छिपाने को छत थी ना खाने को राशन। इसी बीच घाटी में बाढ़ में फंसे लोगों की जान बचाने की जिम्मा सेना को दिया गया और सेना ने ऑपरेशन मेघदूत शुरू किया।
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kashmir - फोटो : File Photo
घाटी में आतंकियों से लड़ रही सेना ने तुरंत सभी आपरेशन रोक कर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
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kashmir - फोटो : File Photo
सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ की टीमों ने मोर्चा संभालते हुए लाखों लोगों तक खाने के लिए राशन पहुंचाया और हजारों लोगों की जान बचाई।
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kashmir - फोटो : File Photo
बाढ़ के दौरान सेना की 184 टुकड़ियों और वायु सेना के 29 विमान और हेलीकॉप्टर को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया था।

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श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक - फोटो : PTI
मौजूदा समय में कश्मीर में हिंसा जारी है। जिन सैनिकों ने कश्मीरियों की जान बचाई थी आज युवक उन्हीं पर पत्थर बरसा रहे हैं। हिंसा में अब तक 75 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। 

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kashmir - फोटो : File Photo
आज भी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा घाटी के लोगों की भलाई के लिए मेडिकल कैंप, शिक्षा की व्यवस्था आदि की जा रही है, लेकिन कुछ युवक अलगाववादियों और आतंकियों के बहकावे में आकर सुरक्षा बलों के कैंपों पर हमला कर रहे हैं।
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kashmir - फोटो : File Photo
पत्थरबाजों को हमला करने से पहले वो 2014 का वो मंजर जरूर याद कर लेना चाहिए जब इन्हीं सैनिकों ने अपने जान पर खेलकर उनकी जान बचाई थी।
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