जम्मू कश्मीर में पहले चरण का मतदान खत्म हो चुका है। वहीं दूसरे चरण के लिए तैयारियों जोरों पर हैं। इसी बीच चुनाव आयोग घर घर जाकर दूसरे चरण के मतदाताओं से वोट डलवा रहा है। श्रीनगर में चुनावी ड्यूटी में तैनात अधिकारी मतदान के लिए जाते हुए।
जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया ने एक नई दिशा ली है। पहले चरण का मतदान सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, अब दूसरे चरण के मतदान की तैयारियों में चुनाव आयोग ने तेजी लाते हुए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस बार आयोग ने घर-घर जाकर मतदाताओं से मतदान कराने का निर्णय लिया है, खासकर बुजुर्ग और विकलांग मतदाताओं के लिए।
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जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव
- फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर में चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी मतदाताओं के घर जाकर उन्हें वोट डालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह प्रयास उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी मतदाता मतदान से वंचित न रहे।
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इस अभियान के तहत, एक बुजुर्ग मतदाता की तस्वीर सामने आई है, जिसमें चुनावी ड्यूटी में तैनात कर्मचारी उनकी अंगुली पर स्याही लगाते हुए नजर आ रहे हैं। यह दृश्य न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को साकार करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चुनाव आयोग समाज के हर वर्ग को अपने अधिकार का प्रयोग करने का मौका दे रहा है।
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- फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर में होम वोटिंग की प्रक्रिया में एक बुजुर्ग मतदाता ने अपने मत का गुप्त रूप से इस्तेमाल करते हुए बैलेट बॉक्स में वोट डाला। यह पहल चुनाव आयोग की ओर से उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बुजुर्ग और विकलांग मतदाता सुरक्षित और सहज तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
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- फोटो : बासित जरगर
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम न केवल मतदान प्रतिशत को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि यह उन मतदाताओं के लिए भी एक सुनहरा अवसर है, जो सामान्य परिस्थितियों में मतदान नहीं कर पाते। उन्होंने कहा, 'हमारा उद्देश्य हर नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर प्रदान करना है। हमें खुशी है कि हम इस अभियान के माध्यम से बुजुर्ग और विकलांग मतदाताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।'
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- फोटो : बासित जरगर
जम्मू-कश्मीर में इस प्रकार की पहलें अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। यहां की जटिल राजनीतिक और सामाजिक स्थिति के बीच, चुनाव आयोग ने इस बार एक सकारात्मक बदलाव की ओर कदम बढ़ाया है। मतदाता अब महसूस कर रहे हैं कि उनकी आवाज़ महत्वपूर्ण है और वे अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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- फोटो : बासित जरगर
इस बीच, चुनाव आयोग ने सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सुनिश्चित किया है कि मतदान प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। चुनावी माहौल अब काफी उत्साहजनक है, और मतदाता इस मौके का भरपूर लाभ उठाने के लिए तत्पर हैं।
जम्मू-कश्मीर के लोकतंत्र में यह पहल न केवल मतदाता के अधिकारों को सशक्त बनाने का प्रयास है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी की भागीदारी अनिवार्य है। अगले चरण के मतदान के साथ, यह उम्मीद की जा रही है कि अधिक से अधिक मतदाता अपनी आवाज उठाने के लिए आगे आएंगे। लोकतंत्र का यह उत्सव अब सभी के लिए खुला है।