कश्मीर के बांदीपोरा में चेरी की फसल तो तैयार है, लेकिन पर्यटकों की कमी और बाजार में घटती मांग के कारण खरीदार नहीं मिल रहे हैं, जिससे बागवानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
कश्मीर में चेरी को पेड़ो से उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बांदीपोरा जिले के अरगाम में भी सैकड़ों परिवार पके फलों को चुनने में जुट गए हैं।
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श्रीनगर में चेरी तैैयार
- फोटो : बसित जरगर
हालांकि, इस बार पर्यटकों की संख्या में गिरावट और स्थानीय व राष्ट्रीय दोनों बाजारों में मांग कम होने से कीमतों में गिरावट आई है। इससे कई बागवानों को मूल लागत निकलने की चिंता सता रही है। उत्पादकों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
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श्रीनगर में चेरी तैैयार
- फोटो : बसित जरगर
चेरी उत्पादक बशीर अहमद ने कहा, इस साल चेरी की मांग बहुत कम है। चेरी तैयार है लेकिन कोई खरीदार नहीं है।
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श्रीनगर में चेरी तैैयार
- फोटो : बसित जरगर
अगर यह जारी रहा तो हमें भारी नुकसान होगा। उत्पादक अब सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि वह तत्काल सहायता प्रदान करें, जिसमें बाजार संपर्क, परिवहन सब्सिडी और राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीरी उपज को बढ़ावा देना शामिल है।
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- फोटो : बसित जरगर
एक अन्य चेरी उत्पादक मोहम्मद रमजान ने कहा कि हम काफी हद तक पर्यटकों की ओर से की जाने वाली खरीदारी पर निर्भर होते हैं। वर्तमान हालात में सही रेट नहीं मिल रहे।
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श्रीनगर में चेरी तैैयार
- फोटो : बसित जरगर
120-150 रुपये में बिकने वाला एक डिब्बा 40-45 रुपये में ही बेचना पड़ रहा है।