पुलवामा में इस साल बादाम की तुड़ाई शुरू हो गई है, जहां किसान अच्छी फसल और गुणवत्ता से उत्साहित हैं। वे उचित बाजार मूल्य और बेहतर बिक्री व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।
कश्मीर घाटी के पुलवामा जिले में इन दिनों बादाम की तुड़ाई पूरे शबाब पर है। जैसे ही अगस्त की शुरुआत हुई, खेतों और बागो में हलचल बढ़ गई। किसान, महिलाएं और बच्चे सभी इस पारंपरिक काम में जुटे हैं। खेतों में चारों ओर छाते पेड़, पकी हुई फसल और जमीन पर बिछे बादाम के ढेर एक खूबसूरत नजारा हैं।
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Almond harvesting in Pulwama
- फोटो : बसित जरगर
यह फसल पुलवामा की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। जिले के अवंतीपोरा, त्राल, पिंगलाना और काकापोरा इलाकों में बादाम के बड़े बाग हैं।
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Almond harvesting in Pulwama
- फोटो : बसित जरगर
यहां की खासियत यह है कि यहां उगने वाला बादाम स्वाद और गुणवत्ता में देशभर में पसंद किया जाता है।
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Almond harvesting in Pulwama
- फोटो : बसित जरगर
इस साल मौसम ने भी साथ दिया। जनवरी-फरवरी में हुई बर्फबारी और समय पर बारिश ने फसल को संजीवनी दी। पेड़ों में फूल भी खूब लगे और बादाम का आकार भी संतोषजनक रहा।
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Almond harvesting in Pulwama
- फोटो : बसित जरगर
हालांकि कुछ जगहों पर ओलावृष्टि और असमय बारिश की वजह से नुकसान की खबरें भी आई हैं, लेकिन कुल मिलाकर किसान फसल से संतुष्ट हैं।
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Almond harvesting in Pulwama
- फोटो : बसित जरगर
तुड़ाई का काम सुबह से शाम तक चलता है। पेड़ों से बादाम झाड़े जाते हैं और फिर उन्हें धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद छिलका हटाकर बादाम बाजार में भेजे जाते हैं।
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Almond harvesting in Pulwama
- फोटो : बसित जरगर
पुलवामा के बादाम न केवल कश्मीर के अन्य हिस्सों में बल्कि देश के कई राज्यों में भी भेजे जाते हैं।
एक किसान ने बताया, इस बार फसल अच्छी है, और अगर बाजार में सही दाम मिले तो मेहनत वसूल हो जाएगी। तुड़ाई के दौरान महिलाएं बादाम इकट्ठा करती हैं, उन्हें साफ करती हैं और छांव या धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद ये बादाम मंडियों और बाजारों तक पहुंचते हैं।