जंगलों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। त्रिकुटा की पहाड़ी पर आग लग गई है। यह आग यात्रा मार्ग से दो-ढाई किलोमीटर दूर है। इससे यात्रा पर कोई असर तो नहीं पड़ रहा है, लेकिन वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
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- फोटो : Amar Ujala
श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों का दल आग बुझाने के प्रयास में देर रात तक जुटा था। वहीं दूसरी ओर मंगलवार को जिला मुख्यालय में बने मिनी सचिवालय के बिल्कुल सामने स्थित देवी दब्बड़ की पहाड़ियां धू-धू कर जल उठी।
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बड़ी बात यह है कि देवी दब्बड़ की पहाड़ी पर जहां भीषण आग लगी हुई है, वह सारा क्षेत्र श्री माता वैष्णो देवी के दरबार के बिल्कुल पीछे की तरफ स्थित है। इसके पास ही पंचायत कयाला के अधीन आने वाला गांव गौंसुआ है।
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आग वाली जगह से रिहायशी क्षेत्र से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मंगलवार को पूरा दिन पहाड़ियों से धुआं उठता रहा। थोड़ा-सा अंधेरा होते ही उस स्थान पर से आग की लपटें साफ दिखने लगी।
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बताया जाता है कि जिस जगह पर आग लगी है, वहां कई प्रकार की जड़ी-बुटियां भी मौजूद हैं। कीमती लकड़ियों के पेड़ हैं। आग बुझाने के लिए वन विभाग की टीम को सफलता नहीं मिल रही है।
सोमवार देर शाम को त्रिकुटा पर्वत के साथ लगती पहाड़ी पर भी लगी आग मंगलवार को भी धधकती रही। श्राइन बोर्ड के कर्मचारी आग बुझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। हवा चलने के कारण आग बढ़ती जा रही है।