राजस्थानी संस्कृति की प्रतीक और हिन्दी माह के अनुसार त्यौहारों की शुरुआत कही जाने वाली तीज आज जयपुर में धूमधाम से मनाई गई। महिलाओं ने सावन महीने में आने वाले इस त्योहार का स्वागत मेहंदी लगाकर और लहरिया पहनकर किया।
श्रावणी तीज के नाम से मशहूर ये त्यौहार आज पूरे राजस्थान में मनाया गया। जयपुर में शाम को त्रिपोलिया गेट से तीज माता की शाही सवारी निकली। इसमें सबसे पहले कलाकारों की मंडली ने माता की सवारी की अगुवाई की।
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ऊंट, बग्गियां, तोपगाड़ी और बैलगाड़ी
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तीज मेला जयपुर
- फोटो : amar ujala
तीज माता की सवारी की अगुवाई करते गजराज सबसे पहले चले। उसके पीछे ऊंट, बग्गियां, तोपगाड़ी और बैलगाड़ी पर सवार होकर पूरा लवाजमा चला। हर किसी ने इस दृश्य को देखना चाहा। कई लोगों ने तो अपने मोबाइल फोन के जरिये मेले की इन तस्वीरों को फोटो खींचकर कैद कर लिया। इस दौरान बैंड वादन की स्वर लहरियों ने भी दर्शकों और श्रोताओं को रोमाचिंत किया।
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कालबेलिया नृत्य करती दिखीं कलाकार
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तीज मेला जयपुर
- फोटो : amar ujala
मेले को देखने के लिए यहां आज शहर के त्रिपोलिया बाजार से लेकर छोटी चौपड़ तक देशी—विदेशी पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा। मेले में कच्छी घोड़ी, कालबेलिया, गैर और अन्य कई तरह के नृत्यों की छटा बिखेरते कलाकारों ने सभी का मन मोह लिया।
बहुरूपिये भी करतब दिखाते हुए चले
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तीज मेला जयपुर
- फोटो : amar ujala
मेले में शामिल होने के लिए जयपुर ही नहीं, दूरदराज के गांवों से भी लोग आए। कोई अपने बच्चों को कंधों पर बिठाकर मेला दिखा रहा था तो कोई दुकानों के ऊपर छत पर अपने परिवार सहित यह नजारा देख रहा था। मेले में भगवान विष्णु, शिव, नारद और हनुमान के स्वरूप में बहुरूपिये भी अपना करतब दिखाते हुए चलते दिखे।
त्रिपोलिया गेट से निकली तीज माता की सवारी को देखने के लिए बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सभी उत्साहित दिखे। बच्चों ने तो भोलनाथ के स्वरूप बने कलाकारों से बातचीत भी कर ली। इसके बाद तीज की सवारी पूरे शाही लवाजमे के साथ छोटी चौपड़, चौगान स्टेडियम होते हुए तालकटोरा पहुंची। यहां इसके बाद शाम को नगर निगम की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें कलाकार राजस्थानी गीतों की धुनों पर अपनी प्रस्तुतियां देते हुए दिखे। गुरुवार को शहर में बूढ़ी तीज की सवारी निकाली जाएगी।