मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता
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मंदिर प्रबंधन का दावा है कि गाय के गोबर की यह विशाल प्रतिमा एक हजार साल तक ज्यों की त्यों बनी रहेगी। इसके लिए मूर्ति बनाने में गोबर के अलावा मैदा, लकड़ी, लोहा, चूना और पत्थर आदि मिलाया गया है। साथ ही सिंदूर का घोल चढ़ाया गया है।