संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' को भले ही आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहत मिली हो, लेकिन राजपूत समाज पूरी तरह गुस्साया हुआ है। समाज ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि फिल्म रिलीज हुई तो देश में बहुत नुकसान होगा। करणी सेना ने और भी बहुत कुछ कहा है।
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नुकसान की जिम्मेदारी केंद्र और भंसाली की
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फिल्म का विरोध
श्रीराजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना का कहना है कि अभी चार राज्यों में फिल्म 'पद्मावत को सरकारों की ओर से बैन किया गया है, लेकिन समाज के लोग पूरे देश में ही फिल्म पर पाबंदी लगाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि ये फिल्म कहीं भी रिलीज की जाती है तो नुकसान की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार, संजय लीला भंसाली और सेन्ट्रल बोर्ड आॅफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) की होगी।
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देश के कई राज्यों में सक्रिय है करणी सेना
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फिल्म पद्मावत का विरोध
मकराना ने चेतावनी दी है कि देश के 18 से 20 राज्यों में करणी सेना सक्रिय है जहां इस फिल्म का उग्र विरोध शुरू हो सकता है। इसके अलावा जो राज्य बचे हैं उनमें अन्य राजपूत संगठन सक्रिय हैं जो लगातार हमारे संपर्क में हैं। वहां करणी सेना की ओर से इन राजपूत संगठनों के माध्यम से विरोध दर्ज करवाया जाएगा।
कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका
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फिल्म पद्मावत का विरोध
मकराना का कहना है कि उदयपुर संभाग के चित्तौड़गढ़ में हो रहा आंदोलन बरकरार रखा जाएगा। फिर भी यदि फिल्म को बैन नहीं किया गया तो यही आंदोलन पूरे देश में लोगों के बड़े समर्थन से चलाया जाएगा। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने की संभावना भी उन्होंने जताई।
राजपूत समाज का कहना है कि यदि किसी फिल्म से देश में माहौल बिगड़ता है तो हम केन्द्र सरकार से पूरे देशभर में इस फिल्म को सिनेमेटोग्राफी एक्ट के तहत बैन की मांग करते हैं।यदि ऐसा नहीं होता है तो उग्र आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी निर्माता निर्देशक सहित संबंधित राज्य सरकारों की होगी। 24 जनवरी को फिल्म रिलीज होने से ठीक पहले राजपूत समाज ये दिखा देगा कि जौहर क्या होता है।