फिल्म 'पद्मावत' की रिलीज रोकने के लिए अब वो एक्सपर्ट ही सुप्रीम कोर्ट जाएंगे जो फिल्म देख चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही चार राज्यों में 'पद्मावत' रिलीज पर लगाई गई रोक हटाने का फैसला दिया था। इसके बाद फिल्म रिलीज के रास्ते खुल गए थे। लेकिन आज राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकारों ने सुप्रीम को कोर्ट में पिछले आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए याचिका लगा दी है, जिसकी सुनवाई कल होगी। इस बीच जानकारी मिली है कि सर्टिफिकेट जारी करने से पहले सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) ने ये फिल्म जिन एक्सपर्ट्स को दिखाई थी, उन्होंने फिल्म के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने का निर्णय ही नहीं, बल्कि तैयारी भी पूरी कर ली है। ये एक्सपर्ट्स कल सुप्रीप कोर्ट में याचिका लगा देंगे।
विज्ञापन
तीन लोगों को दिखाई थी फिल्म
2 of 5
कपिल कुमार व पद्मावत
- फोटो : अमर उजाला
सेंसर बोर्ड ने फिल्म दिखाने के लिए पहले नौ एक्सपर्ट्स की कमेटी बनाई थी, जिसमें से केवल तीन जनों को ही फिल्म को दिखाया गया। इन तीन में इग्नू के इतिहास के विभागाध्यक्ष कपिल कुमार और मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ शामिल हैं। अब ये ही सुप्रीम कोर्ट में फिल्म के खिलाफ याचिका लगाएंगे।
विज्ञापन
सेंसर बोर्ड ने दे दिया प्रमाण पत्र
3 of 5
padmavati
हालांकि फिल्म देखने के बाद इन दोनों ने ही सेंसर बोर्ड के सामने अपनी आपत्तियां रख दी थीं। दोनों ने ही कहा था कि इस फिल्म में आपत्तियों की भरमार है। बावजूद इसके सेंसर बोर्ड ने फिल्म को कुछ घंटों में ही सर्टिफिकेट जारी कर दिया। अब फिल्म देखने वाले ये एक्सपर्ट ही अपनी आपत्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इन्होंने फिल्म देखी है, इसलिए ये आपत्ति वाले हिस्सों को अदालत के सामने रखेंगे।
केवल फारसी स्त्रोतों का ही अध्ययन
4 of 5
पद्मावती
- फोटो : SELF
फिल्म देखने के बाद कपिल कुमार ने कहा है कि भारतीय इतिहास के साथ हमेशा तोड़ मरोड़ होती रही है। क्रिएटिविटी की एक सीमा होती है और इसके नाम पर दो समुदायों को आमने सामने नहीं किया जा सकता है। इस इतिहास की फिल्म को जायसी पर आधारित बताया गया है और केवल फारसी स्त्रोतों का ही अध्ययन किया गया है। जबकि इतिहास पर बनने वाली फिल्म पर सभी भाषाओं के स्त्रोतों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
कपिल कुमार ने कहा है कि हमने खुले दिमाग से और इतिहास की नजरों से फिल्म को देखा। हमें लगा कि इतिहास और कल्पना दो अलग अलग चीजें हैं। इतिहास तथ्यों पर ही आधारित होता है और कल्पना तो कैसे भी की जा सकती है। एेसे में इतिहास पर बनने वाली फिल्म में कल्पना का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। ये ही वो बातें हैं जिनके आधार पर याचिका दायर की जाएगी।