राजस्थान में देवी—देवताओं के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं। जिनकों लेकर कई मान्यताएं है। आज हम आपको राजस्थान के पांच प्रमुख देवी मंदिरों के दर्शन करा रहे हैं। नवरात्रों में यहां आयोजित मेलों में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते है।
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माता के इस मंदिर में चूहों की होती है पूजा
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करणी माता
- फोटो : file photo
राजस्थान की बीकानेर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित देशनोक में फेमस करणी माता मंदिर है। घर में गलती से चूहा आ जाए तो परेशान हो उठते है। लेकिन, माता के इस मंदिर में चूहों की पूजा होती है। चूहों का यहां काबा कहते है। इस मंदिर में बीस हजार से ज्यादा काले चूहे हैं। कुछ सफेद चूहे भी है जिनका दिखना यहां बेहद शुभ माना जाता है। भक्तों की मानें तो मां करणी दुर्गा का अवतार थीं।
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माता के श्राप से नमक में बदल गई धन—सम्पदा
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शाकम्भरी माता
राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित सांभर झील। नमक की इस झील से लाखों टन नमक पैदा होता है। यहां पर स्थित प्रसिद्ध शाकम्भरी माता का मंदिर। देश में शाकम्भरी माता की तीन शक्तिपीठ है जिनमें ये सबसे पुरानी है। यहां मंदिर करीब 2500 साल पुराना है। कहा जाता है कि शाकम्भरी माता के श्राप से यहां बहुमूल्य सम्पदा नमक में बदल गई थी। शाकम्भरी माता चौहान वंश की कुलदेवी है लेकिन, माता को अन्य कई धर्म और समाज के लोग पूजते है। इन परिवारों में विवाह, बच्चे का जन्म जैसे शुभ कार्य होने पर यहां ढोक लगाने आते है।
कृष्ण की बहन योगमाया का है यह मंदिर
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कैला मैया
राजस्थान के करौली स्थित कैला मैया के मंदिर की मान्यता दूर—दूर तक है। चैत्र और अश्विनी मास के नवरात्रों में यहां लक्खी मेले आयोजित होते हैं। इस मंदिर में दो प्रतिमाएं है। कैला मैया की प्रतिमा को चेहरा तिरछा है। मंदिर को निर्माण 1600 ईस्वी में राजा भोमपाल सिंह ने करवाया था। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की बहन योगमाया जिसका वध कंस करना चाहता था, वे ही कैला देवी हैं। प्राचीन काल में नरकासुर नामक राक्षस का वध माता दुर्गा ने कैला मैया के रूप मे अवतार लेकर किया था। यहां आने वाले भक्त माता को प्रसन्न करने के लिये लांगुरिया के भजन गाते हैं।
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यहां है देवी की चमत्कारिक 18 भुजाओं वाली मूर्ति
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त्रिपुर सुंदरी
राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर की खासियत माता की अट्ठारह भुजाओं वाली काले पत्थर से बनी मूर्ति है। हर हाथ में कोई न कोई अस्त्र है। माता के चरणों में यन्त्र है और आधार में कमल भी एक तांत्रिक यन्त्र है। मुख्य प्रतिमा के साथ नवदुर्गा और चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। माना जाता है कि यह मंदिर कनिष्क के शासन काल से भी पहले का है।
राजस्थान के सीकर में स्थित जीण माता का मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। आसोज और चैत्र नवरात्रों में यहां भारी भीड़ रहती है। यहां पर सैकड़ों साल पुराना माता का मंदिर है। माता के कई चमत्कार यहां प्रसिद्ध है। एक बार औरंगजेब ने यहां मंदिर तोड़ने की कोशिश की तो उसकी सेना पर भंवरों ने हमला बोल दिया और सेना को उलटे पांव भागना पड़ा। लोक मान्यताओं के अनुसार जीण का जन्म चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ। उनके भाई का नाम हर्ष था जो बहुत खुशी से रहते थे। एक बार जीण का अपनी भाभी के साथ विवाद हो गया और इसी विवाद के चलते जीन और हर्ष में नाराजगी हो गयी। इसके बाद जीण आरावली के 'काजल शिखर' पर पहुँच कर तपस्या करने लगीं। बाद में वे देवी के रुप में पूजी जाने लगी।