चीन बॉर्डर पर लद्दाख में हड्डी कंपाने वाली सर्दी में देश की सुरक्षा में लगे जवानों को जल्द ही एक नयी सवारी मिल सकती है। यह सवारी है रेगिस्तान के जहाज के नाम से मशहूर ऊँट की। दरअसल ऊँट को राजस्थान में राजकीय पशु का दर्जा हासिल है। इसलिए राजस्थान सरकार इसकी नस्ल को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसी के अंतर्गत देशभर में ऊँट व इसके दूध का उपयोग बढ़े इसके प्रयास किए जा रहे है।
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बीएसएफ करती है उपयोग
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फाइल फोटो।
इसलिए केन्द्र के पशुपालन विभाग के मदद से बीकानेर से चार ऊँट लद्दाख भेजे गए है। शुरुआती जानकारी के अनुसार इन ऊँट की मदद से सेना का सामान जवानों तक पहुंचाया जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो ऊँट का उपयोग राजस्थान के अतिरिक्त अन्य राज्यों में भी बढ़ सकता है।
गौरतलब है ऊँट राजस्थान के थार क्षेत्र में आम लोगों के जनजीवन के अतिरिक्त सुरक्षा बलों की भी अहम सवारी है। दरअसल पाकिस्तान के लगते बॉर्डर क्षेत्र में बीएसएफ ऊँट की मदद से गश्त को अंजाम देती है।
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सरकार कर रही है प्रयास
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फाइल फोटो।
राजस्थान पशु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के अनुसार राजस्थान सरकार ऊँट पालन को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि ऊँटों की संख्या बढ़े इसके लिए ऊँट के जन्म के बाद उसके पालक को दस हजार रुपए उसके पालन के लिए दिए जा रहे है। साथ ही ऊँट की खरीद फरोख्त से भी बैन को समाप्त कर दिया गया है।
रेगिस्तान के जहाज को बचाने में लगी सरकार
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फाइल फोटो।
गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में रेगिस्तानी इलाकों में रहने वालों लोगों का ऊँट पालन से मोह भंग होता जा रहा है। जिससे रेगिस्तान के जहाज से मशहूर इस पशु के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। इसलिए सरकार इसे बचाने के लिए नयी योजनाएं लेकर आ रही है। इसी क्रम में ऊंटनी के दूध को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया जा रहा है।
इसके अंतर्गत जयपुर में करीब आठ करोड़ की लागत से एक मिनी प्लांट लगाया गया है। पांच हजार लीटर क्षमता वाले इस प्लांट में ऊंटनी का दूध प्रोसेस किया जाएगा। इस दूध को सरकार को सरस पार्लर के माध्यम से बेचेगी। जानकारी के अनुसार जैसलमेर सहित कई रेगिस्तानी जिलों में ऊंटनी के दूध के कलेक्शन को लेकर सर्वे कराया जा रहा है। यदि कलेक्शन में वृद्धि होती है तो ऊंटनी के दूध बेचने के लिए नए स्टॉल खोले जाएंगें।