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2019 की वो 10 बड़ी घटनाएं जिन्होंने बदल डाली देश की सियासी तस्वीर

Sat, 14 Dec 2019 04:44 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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2019 की सियासत - फोटो : अमर उजाला
साल 2019 समाप्ति की ओर है। 2020 के आगाज में महज कुछ ही दिन रह गए हैं। साल 2019 कई मायनों में यादगार कहा जाएगा। इस साल हुई सियासी घटनाओं ने इसे खास बनाया और एक साल के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जो कभी भुलाई नहीं जा सकेगी। इन घटनाओं ने देश की सियासत की तस्वीर ही बदल डाली। एक तरफ भाजपा की सत्ता में लगातार दूसरी बार वापसी हुई तो दूसरी तरफ कांग्रेस का बुरा दौर जारी रहा। खुद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़कर सभी को हैरान किया। वहीं महाराष्ट्र में भी बड़ी सियासी घटना हुई जहां भाजपा-शिवसेना की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई और उद्धव ठाकरे ने सीएम की कुर्सी संभाली। हम आपको बता रहे हैं 2019 की ऐसी ही 10 बड़ी सियासी घटनाएं। 

 

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फिर से मोदी सरकार  

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वाराणसी में पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला

2019 में नरेंद्र मोदी का जादू फिर मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला। आम चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सियासी पंडितों को भी चौंका दिया। भाजपा को इस साल 303 सीटों पर जीत मिली जबकि 2018 में उसने 282 सीटें जीती थीं। इसी के साथ नरेंद्र मोदी जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद तीसरे व पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। पीएम मोदी ने एक बार फिर वाराणसी से चुनाव लड़ा और चार लाख 79 हजार 505 वोटों से जीते। इस दौरान उनकी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अुच्छेद 370 हटाने जैसा ऐतिहासिक फैसला लिया। 


 

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अमित शाह ने लड़ा चुनाव

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अमित शाह - फोटो : PTI

इस चुनाव में खास बात ये भी रही कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और प्रचंड जीत भी हासिल की। वह गुजरात में गांधीनगर लोकसभा सीट पर साढ़े पांच लाख वोट से विजयी रहे। इसी सीट पर भाजपा के संस्थापक नेताओं में से एक लालकृष्ण आडवाणी लगातार छह बार से चुनाव जीतते आ रहे थे। अमित शाह यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे और फिर गृह मंत्रालय भी संभाला।  



 

राहुल ने छोड़ा अध्यक्ष पद

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राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई

साल 2019 में कांग्रेस में उस वक्त भूचाल आया जब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद जुलाई में राहुल ने पद से इस्तीफा दे दिया। राहुल गांधी ने चार पन्नों का इस्तीफा लिखकर इसे ट्विटर पर शेयर भी किया था। कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफा देने वाले राहुल गांधी ने कहा था- मैं एक कांग्रेसजन के तौर पर पैदा हुआ, यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और यह मेरी रगो में है और हमेशा रहेगी। तमाम मान मनौव्वल के बाद भी राहुल नहीं माने। कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं ने धरना भी दिया, लेकिन राहुल टस से मस नहीं हुए। इसके बाद सोनिया गांधी को दोबारा कांग्रेस की कमान दी गई। 
 

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प्रियंका कांग्रेस में आईं

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प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : PTI
साल 2019 में ही प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस में शामिल हो गईं। लंबे समय से कार्यकर्ता उनसे कांग्रेस में शामिल होने की मांग कर रहे थे। लोकसभा चुनाव से पहले फरवरी 2019 में उन्हें महासचिव नियुक्त कर पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई थी। चुनाव के दौरान वह खूब सक्रिय रहीं और कई रैलियां भी कीं। कांग्रेसियों में नया जोश भी देखने को मिला। प्रियंका का संपूर्ण राजनीति में उतरना इस साल की एक महत्वपूर्ण घटना रही। 

 
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कर्नाटक का नाटक 

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एच डी कुमारस्वामी

साल 2018 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हुए थे लेकिन भाजपा बहुमत से चंद कदम पीछे रह गई। उसे 224 में से 104 सीटें मिलीं। बीएस येदियुरप्पा ने सरकार तो बनाई लेकिन बहुमत साबित होने से पहले ही 12 मई 2018 को इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव बाद गठबंधन बनाया और सरकार का गठन किया। एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। लेकिन इस सरकार पर हर वक्त संकट छाया रहा। आखिर में कांग्रेस-जेडीएस के कई विधायकों के बागी हो जाने के बाद सरकार गिर गई। जुलाई में विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग हुई, विरोध में 105 और पक्ष में 99 मत पड़े। इसके साथ ही कर्नाटक में बीजेपी सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया। बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा ने दोबारा सरकार बना ली। दिसंबर में 16 सीटों पर हुए उपचुनाव नतीजों में भाजपा ने बाजी मारते हुए 12 सीटों पर जीत हासिल की।  
 

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चिदंबरम को जेल

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पी चिदंबरम - फोटो : PTI

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का जेल जाना इस साल की एक प्रमुख घटना रही। आईएनएक्स मीडिया मामले में वह ईडी और सीबीआई दोनों के शिकंजे में आए। सीबीआई ने 21 अगस्त 2019 को उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया। इस केस में वह तिहाड़ जेल भी भेजे गए। इसी दौरान ईडी ने भी उनपर शिकंजा कसा। 19 अक्तूबर को आईएनएक्स मीडिया केस में ही चिदंबरम को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली की रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मामले में ईडी को चिदंबरम से पूछताछ करने की इजाजत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर पूछताछ के बाद ईडी को लगता है कि गिरफ्तार करने की जरूरत है तो ईडी कोर्ट के सामने आधार बताकर चिदंबरम को गिरफ्तार कर सकती है। कई बार उनकी जमानत अर्जी खारिज हुई। आखिर में उन्हें 4 दिसंबर को जमानत मिली। वह कुल 106 दिन तक तिहाड़ जेल में रहे। 
 

महाराष्ट्र का सियासी खेल 

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उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र का सियासी रण भी इस साल चर्चा में रहा। ऐतिहासिक रूप से यहां के सियासी घटनाक्रम को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यहां भाजपा शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा और स्पष्ट बहुमत हासिल किया। लेकिन शिवसेना ने सीएम पद को लेकर 50-50 का फॉर्मूला रखकर नया विवाद छेड़ दिया। उद्धव ठाकरे ढाई साल के लिए सीएम पद को लेकर अड़ गए। नतीजतन भाजपा को शिवसेना से अलग होना पड़ा। सियासी नाटक ने ऐसा करवट ली कि भाजपा ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार के साथ मिलकर रातोंरात सरकार बना ली। इसे लेकर जबरदस्त सियासी हंगामा मचा, बयानों की बाढ़ आई और आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लग गई। लेकिन ये सरकार महज साढ़े तीन दिन ही टिक सकी। अजित पवार विधायकों की व्यवस्था नहीं कर सके और देवेंद्र फडणवीस को बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। उद्धव ठाकरे ने सीएम पद की कमान संभाली। पहली बार ठाकरे परिवार से कोई सीएम बना। 
 


 

प. बंगाल की हिंसा और सियासत 

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ममता बनर्जी - फोटो : Instagram

साल 2019 प. बंगाल में हुई हिंसा और मुख्यमंत्री-राज्यपाल के विवाद के कारण भी याद रखा जाएगा। पूरे साल भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं में जगह-जगह हिंसक भिड़ंत हुई जिसमें कई कार्यकर्ताओं की जान गई। सबसे बड़ा विवाद हुआ यूनिवर्सिटी में ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने को लेकर। दोनों दलों में आरोप प्रत्यारोप का लंबा दौर चला। इस दौरान केशरीनाथ त्रिपाठी यहां के राज्यपाल रहे। 23 जुलाई को त्रिपाठी का कार्यकाल खत्म हुआ तो जगदीप धनखड़ को यहां का राज्यपाल नियुक्त किया गया। सीएम ममता बनर्जी और राज्यपाल के बीच विवाद चरम पर पहुंचा। कई मौकों पर ये विवाद खुलकर सामने आया। खुलकर बयानबाजी भी हुई। हालात यहां तक पहुंचे कि दोनों के बीच आमने-सामने का अभिवादन भी बंद हो गया। ये विवाद अब भी जारी है। 

 


 

जगनमोहन रेड्डी का चमत्कार

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जगनमोहन रेड्डी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

इस साल आंध्र प्रदेश में भी बड़ी सियासी उठापटक हुई। यहां एक साथ हुए लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जगनमोहन रेड्डी का नाम चर्चा में आया। 46 साल के वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मुखिया जगनमोहन रेड्डी ने राज्य से चंद्रबाबू नायडू की सरकार को उखाड़ फेंका। आंध्र प्रदेश में हुए चुनाव में उनका जादू इस कदर लोगों के सिर चढ़कर बोला कि वाईएसआर ने लोकसभा की 25 में से 22 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं विधानसभा चुनाव में भी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) को करारी शिकस्त देते हुए 175 में से 151 सीटों पर जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद जगनमोहन रेड्डी राज्य के नए सीएम बने। 
 

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सिद्धू हुए चित  

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नवजोत सिंह सिद्धू
2004 में पहली बार नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था। लेकिन 2017 आते आते वह भाजपा से दूर होते गए और आखिर में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। लेकिन कांग्रेस भी उन्हें रास नहीं आई। पंजाब में उन्हें मंत्रिपद मिला लेकिन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनकी खटपट बदस्तूर जारी रही। कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस ने पंजाब में सरकार बनाई थी और सिद्धू शहरी विकास मंत्री बने। बावजूद दोनों कद्दावर नेताओं के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार खुद कहा था कि सिद्धू को सीएम का पद चाहिए। दोनों के बीच तनातनी इस कदर बढ़ी कि सिद्धू ने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया।
 
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