टीएमसी का कहना है कि विपक्ष का उम्मीदवार तय करने से पहले एक बार भी कांग्रेस ने टीएमसी से चर्चा नहीं की। ममता बनर्जी को अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए मार्गरेट अल्वा ने आग्रह किया था। जिसे ममता ने इंकार कर दिया।
पांच दिन बाद यानी छह अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की नेतृत्व वाले विपक्ष से मार्गरेट अल्वा प्रत्याशी हैं। आंकड़ों के खेल में अभी जगदीप धनखड़ काफी आगे चल रहे हैं।
भाजपा की धुर विरोधी कही जाने वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने का फैसला लिया है। टीएमसी ने वोटिंग से दूर रहने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। टीएमसी का कहना है कि विपक्ष का उम्मीदवार तय करने से पहले एक बार भी कांग्रेस ने टीएमसी से चर्चा नहीं की। ममता बनर्जी को अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए मार्गरेट अल्वा ने आग्रह किया था। जिसे ममता ने इंकार कर दिया।
ऐसे में आइए जानते हैं कि एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के सामने मार्गरेट अल्वा को अब तक कितने दलों का समर्थन मिला है? कितना वोट हासिल कर पाएंगी अल्वा?
विज्ञापन
2 of 7
ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए अल्वा के आग्रह पर टीएमसी ने क्या कहा?
विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने ममता बनर्जी से आग्रह किया था कि वो उपराष्ट्रपति वोटिंग से दूर रहने के अपने फैसले पर फिर से विचार करें। मार्गरेट ने कहा था कि टीएमसी विरोधी खेमे की महत्वपूर्ण शक्ति है। उपराष्ट्रपति चुनाव में उसके वोटिंग नहीं करने से भाजपा के ही हाथ मजबूत होंगे। टीएमसी के पास अभी भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का समय है।
टीएमसी के राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने मार्गरेट अल्वा के आग्रह पर बयान दिया। उन्होंने कहा 'टीएमसी के उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने का फैसला पार्टी के संसदीय दल की बैठक में काफी सोच-विचार करके लिया गया है। हम मार्गरेट अल्वा का सम्मान करते हैं लेकिन इस फैसले पर पुनर्विचार की संभावना नहीं है।'
विज्ञापन
3 of 7
मार्गरेट अल्वा।
- फोटो : Social Media
अल्वा के पक्ष में कितने दल?
विपक्ष से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को अब तक कांग्रेस, एनसीपी, वामपंथ, नेशनल कॉन्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आरजेडी का समर्थन मिला है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी समेत कुछ अन्य दलों का भी साथ मिल सकता है। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने भी अल्वा का समर्थन किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत अल्वा की नामांकन प्रक्रिया में भी शामिल हुए थे। हालांकि, शिवसेना के ज्यादातर सदस्य एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के साथ हैं।
4 of 7
बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ याचिका
- फोटो : पीटीआई
जगदीप धनखड़ को किसने-किसने दिया समर्थन?
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भाजपा की अगुआई वाले एनडीए ने उम्मीदवार बनाया है। धनखड़ को अब तक भाजपा, जेडीयू, अपना दल (सोनेलाल), बीजेडी, एआईएडीएमके, वाईएसआर कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, एनपीपी, एमएनएफ, एनडीपीपी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) जैसे दलों का समर्थन मिला है।
विज्ञापन
5 of 7
सीएम अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
इन दलों ने अब तक नहीं खोले पत्ते
राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी के नाम पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), बसपा, शिरोमणि अकाली दल समेत कुछ अन्य पार्टियों ने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि उपराष्ट्रपति चुनाव में ये किसे समर्थन देते हैं।
अब जानिए कितने सदस्य डालेंगे वोट?
उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य वोट डालते हैं। इनमें मनोनीत सांसद भी शामिल होते हैं। अभी लोकसभा में सदस्यों की संख्या पूरी है। मतलब पूरे 543 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। इनमें 12 नामित सांसद रहते हैं। मौजूदा समय में आठ सीटें खाली हैं। इनमें चार जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण जबकि एक सीट त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री बने माणिक साहा ने छोड़ी है। तीन अन्य नामित सदस्यों की सीट भी खाली है। सरकार उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले नामित सदस्यों के लिए खाली सीटें भर सकती है।
इस लिहाज से उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राज्यसभा वोटर्स के आंकड़े सामने आते हैं। पहला ये कि मौजूदा स्थिति में चुनाव में 237 राज्यसभा सांसद वोट करेंगे। दूसरा यह कि 240 सदस्य वोट कर सकते हैं। 240 सदस्य तब वोट करेंगे जब नामित सदस्यों के तीन खाली पदों को भर दिया जाए।
अब ओवरऑल वोटर्स के आंकड़ों पर नजर डालते हैं। अगर राज्यसभा के 240 सदस्य वोट डालते हैं तो ओवरऑल वोटर्स की संख्या 783 हो जाएगी, लेकिन अगर राज्यसभा के 237 वोटर्स होंगे तो ये आंकड़ा घटकर 780 हो जाएगा।
जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?
अभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की संख्या के हिसाब से वोटर्स की दो संख्या निकलकर सामने आ रही है। पहली परिस्थिति में कुल 783 वोट पड़ सकते हैं। ऐसे में जीत के लिए उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 393 वोट चाहिए होंगे। दूसरी परिस्थिति में अगर 780 वोट पड़ते हैं तो उम्मीदवार को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 391 वोट चाहिए होंगे।
विज्ञापन
6 of 7
जगदीप धनखड़
- फोटो : ANI
धनखड़ को कितने वोट मिल सकते हैं?
मौजूदा समय में लोकसभा में भाजपा के 303 सदस्य हैं, जबकि राज्यसभा में 91 हैं। राज्यसभा में इन 91 के अलावा पांच नामित सदस्य भी भाजपा को वोट दे सकते हैं। इस तरह से भाजपा के पास मौजूदा समय 394 वोट आसानी से हो जाते हैं। इनमें पांच नामित सदस्यों के वोट जोड़ दें तो ये संख्या 399 हो जा रही है। मतलब साफ है भाजपा अपने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार धनखड़ को अकेले दम पर आसानी से जीत दिला सकती है।
अब सहयोगी दलों को भी इसमें शामिल कर लें तो भाजपा और मजबूत हो जाएगी। अभी लोकसभा में 31 और राज्यसभा में 16 सांसदों का समर्थन भाजपा को मिला हुआ है। इनमें जेडीयू, आरपीआई, लोक जन शक्ति पार्टी, अपना दल, एआईएडीएमके, एनपीपी जैसी पार्टियां शामिल हैं। इनके वोट जोड़कर भाजपा के पास 446 वोट हो जाते हैं। जेडीयू, अपना दल, जन शक्ति पार्टी ने पहले ही धनखड़ को समर्थन देने का एलान कर दिया है।
थोड़ा आगे बढ़ें तो अब तक विपक्ष के कई दलों ने भी धनखड़ को समर्थन दे दिया है। इनमें बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस शामिल है। बीजेडी के पास अभी लोकसभा और राज्यसभा के कुल 21, वाईएसआर कांग्रेस के पास 31 इन सभी के मतों को अगर जोड़ लें तो भाजपा का आंकड़ा 498 पहुंच जाता है। इसके अलावा शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के 12 लोकसभा सदस्य समेत कुछ और दल भी धनखड़ को वोट दे सकते हैं। इस तरह से चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को 500 से ज्यादा वोट मिल सकते हैं। मतलब जीत के लिए निर्धारित 393 या 391 मतों से कहीं ज्यादा वोट धनखड़ को मिल जाएंगे।
अल्वा के पक्ष में कितने वोट?
अभी तक के जो आंकड़े हैं, उसके अनुसार अल्वा को कांग्रेस के 84, डीएमके के 34, एनसीपी के नौ, आरजेडी के छह, समाजवादी पार्टी के छह सदस्य वोट दे सकते हैं। इस तरह से अल्वा के पक्ष में 140 वोट आसानी से मिल सकते हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के 10, तृणमूल कांग्रेस के 36 सदस्यों का भी साथ मिल सकता है। ये दल राष्ट्रपति चुनाव में भी विपक्ष के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। इस तरह से अल्वा के समर्थन में 176 वोट पड़ सकते हैं।