पात्रा चॉल घोटाले में शिवसेना सांसद संजय राउत चार अगस्त तक प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की हिरासत में रहेंगे। इस दौरान इस घोटाले को लेकर नए खुलासे हो सकते हैं। लेकिन आज हम संजय राउत की बात नहीं करेंगे। संजय राउत तो सांसद हैं। करोड़ों की संपत्ति है उनके पास। कोर्ट में केस लड़ने के लिए दर्जनों वकील खड़े कर देंगे। लेकिन उन गरीबों का क्या जिन्हें फ्लैट का सपना दिखाकर बेघर कर दिया गया?
आज हम आपको उन गरीबों की कहानी बताएंगे। यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि दरअसल इस पात्रा चॉल घोटाले में असर नुकसान किसे हुआ है?
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पात्रा चॉल
- फोटो : अमर उजाला
सुनिए उन गरीबों की कहानी, जिन्हें सपना दिखाकर बेघर कर दिया गया
सबसे पहले पात्रा चॉल में रहने वाले संजय नाईक की कहानी सुनिए। एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए संजय कहते हैं, मेरे जैसे सैकड़ों लोगों को 'पुनर्विकास' का सपना दिखाया गया था। हमसे वादा किया गया था कि तीन साल के अंदर हमें फ्लैट मिल जाएगा। वादा यह भी था, कि जब तक हम लोग किराए के कमरे में रहेंगे तब तक सरकार की तरफ से हमें किराया दिया जाएगा। प्रोजेक्ट में देरी हुई और हमें वादा किया हुआ किराया भी मिलना बंद हो गया। किराया चुकाने के लिए हमें अपने सोने के गहने गिरवी रखने पड़े।
हर महीने 20 हजार रुपये किराए का दे रहे नाइक कहते हैं, ‘मैं अपने परिवार के छह सदस्यों के साथ चॉल के पास ही किराये का कमरा लेकर रह रहा हूं। 2014-15 के बाद से घर का किराया भी नहीं मिल रहा है।’
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कई लोग अपने गांव लौट गए (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
कई झुग्गी लेकर रहने लगे, तो कई गांव लौट गए
फ्लैट का सपना दिखाकर नरेश से भी घर खाली करवाया गया था। नरेश आज भी किराए के कमरे में रहते हैं। नरेश कहते हैं, 'मुंबई में 1 BHK का किराया कम से कम 20 हजार रुपये है। जो लोग इतनी रकम नहीं दे पाए, वो यहां से घर खाली करने के बाद विरार, वसई, नालासोपारा, कल्याण, डोंबिविली और नवी मुंबई जैसे इलाकों में शिफ्ट हो गए हैं। 2014-15 से जब सरकार ने किराया देना बंद किया तो कुछ लोग मजबूरी में अपने गांव भी लौट गए। ज्यादातर ने अपनी उम्मीदें छोड़ दी हैं।'
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कई लोगों की मौत हो चुकी है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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100 से ज्यादा लोग तो दम तोड़ चुके हैं
एक और पीड़ित अभय कहते हैं, लोग अपने फ्लैट का सपना देखते देखते अब दम तोड़ने लगे हैं। 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। परिवारों को किराया मिले छह साल हो गए हैं। जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने तो उनसे हम लोगों ने आग्रह किया। उन्होंने फरवरी 2021 में काम दोबारा शुरू कराया। राज्य सरकार ने मार्च से किराया देने का वादा भी किया, लेकिन अब अगस्त 2022 आ गया। अब तक कुछ नहीं मिला।
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पात्रा चॉल
- फोटो : अमर उजाला
हमें राजनीति नहीं, न्याय चाहिए
पात्रा चॉल को-ऑपरेटिंग सोसाइटी के अध्यक्ष राजेश दल्वी कहते हैं, 'हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं है। राजनीतिक दल अपनी राजनीति करें। हमें तो बस न्याय चाहिए। हमसे जो वादे किए गए थे, उसे सरकार को पूरा करना चाहिए। हम सभी ने पिछले 14 साल में काफी कुछ झेला है। अब और कुछ झेलने की हिम्मत नहीं है।’
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संजय राउत
- फोटो : अमर उजाला
चलते-चलते घोटाले की कहानी भी समझ लीजिए
मुंबई स्थित गोरेगांव के सिद्धार्थनगर में 47 एकड़ में फैला पात्रा चॉल था। यहां गरीब लोग बड़ी संख्या में रहते थे। मामला 2007 का है। तब महाराष्ट्र में कांग्रेस- एनसीपी गठबंधन की सरकार थी। मुख्यमंत्री थे विलासराव देशमुख।
सरकार ने एक योजना बनाई। कहा- पात्रा चॉल में रहने वाले 672 किराएदारों को फ्लैट मिलेगा। इसके लिए हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी एचडीआईएल की सहायक कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन को महाराष्ट्र हाउसिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचडीए) ने कॉन्ट्रैक्ट दे दिया। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन की तरफ से 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और तीन हजार फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करना होगा। 47 एकड़ जमीन पर ये फ्लैट बनने थे। तय ये भी हुआ था कि किराएदारों और एमएचडीए के लिए फ्लैट तैयार करने के बाद जो जमीन बच जाएगी उसे बिक्री और विकसित करने के लिए अनुमति देनी होगी।
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संजय राउत और उनकी पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
चॉल खाली करा लिए गए और फिर हुआ घोटाला
सबकुछ तय था कि कौन-कौन क्या करेगा और कैसे करेगा। इसके लिए चॉल खाली करा लिए गए। लोग अपने घर छोड़कर दूसरी जगह किराए पर रहने लगे। फिर हुआ इसमें बड़ा घोटाला। कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली फर्म गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। फर्म ने न तो चॉल के लोगों के लिए फ्लैट बनाए और न ही एमएचडीए को कोई फ्लैट दिया। कंपनी ने जमीन आठ अन्य बिल्डरों को 1,034 करोड़ रुपये में बेच दी।
इस घोटाले में गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी एचडीआईएल के लोग शामिल थे। ये कंपनी देश के चर्चित पीएमसी घोटाले में भी शामिल है। कंपनी के डायरेक्टर ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंक कर्मचारियों और अफसरों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से लोन लिया। फिर कंपनी के एनपीए को खत्म करने के लिए 250 करोड़ रुपये का फेक डिपॉजिट बैंक में दिखाया गया। इसके बाद बैंक ने फिर से एनपीए वाली कंपनी एचडीआईएल को फ्रेश लोन दे दिया।
संजय राउत का इससे क्या लेना-देना?
अब आप सोच रहे होंगे कि इस घोटाले से शिवसेना सांसद संजय राउत का क्या लेना-देना है? तो सुनिए... जिस एचडीआईएल ने ये दोनों घोटाले किए थे, उसके डायरेक्टर प्रवीण राउत, सारंग वधावन, राकेश वधावन हैं। प्रवीण राउत और सारंग को 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। दोनों से पूछताछ में संजय राउत का कनेक्शन सामने आया।
प्रवीण राउत शिवसेना सांसद संजय राउत के दोस्त हैं। प्रवीण का नाम भी पीएमसी बैंक घोटाला मामले में सामने आ चुका है। पता चला कि प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी ने संजय राउत की पत्नी वर्षा को 55 लाख रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज दिया था, जिसका इस्तेमाल राउत परिवार ने दादर में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया था। इसे लेकर ईडी ने वर्षा और माधुरी राउत के बयान दर्ज किए थे। अब मालूम चल रहा है कि राउत को इस फर्म से 100 करोड़ से भी ज्यादा की रकम मिली थी। जांच अभी जारी है।