26 मई को एक टीवी चैनल पर भाजपा प्रवक्ता के तौर पर नुपुर शामिल हुईं। नुपुर ने इसी दौरान कुरान का जिक्र कर मोहम्मद साहब पर टिप्पणी की। जिसपर विवाद शुरू हो गया। इस पर अब तक बावल जारी है। जबकि नुपुर के बयान को 40 दिन बीत चुके हैं।
16 मई की बात है। कोर्ट के आदेश पर वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हुआ। दो दिन तक चले इस सर्वे में ज्ञानवापी मस्जिद का एक-एक कोना देखा गया। इस दौरान हिंदू पक्ष ने मस्जिद में शिवलिंग मिलने का दावा किया। मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता रहा।
इसे लेकर देशभर में बहस छिड़ गई। 26 मई को एक टीवी चैनल पर भाजपा प्रवक्ता के तौर पर नुपुर शामिल हुईं। नुपुर ने इसी दौरान कुरान का जिक्र कर मोहम्मद साहब पर टिप्पणी की। जिसपर विवाद शुरू हो गया। इस पर अब तक बावल जारी है। जबकि नुपुर के बयान को 40 दिन बीत चुके हैं।
आइये जानते हैं इन 40 दिनों में इस विवाद में क्या-क्या हुआ? कितने लोगों की हत्या हुई? कितने दंगे हुए? नुपुर शर्मा पर कितने मामले दर्ज हुए? अब तक नुपुर की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
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नुपुर शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
26 मई : टीवी चैनल के लाइव डिबेट में भाजपा की तरफ से नुपुर शर्मा ने पैगम्बर मोहम्मद को लेकर टिप्पणी की। जिस पर बाद में बवाल शुरू हुआ।
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मोहम्मद जुबैर
- फोटो : Social media
27 मई : टीवी डिबेट के वीडियो का एक अंश आल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने ट्विट करके नुपुर पर तंज कसा। इस वीडियो के बाद ही विवाद की शुरुआत हुई।
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नुपुर शर्मा और मोहम्मद जुबैर
- फोटो : अमर उजाला
28 मई : जुबैर के वीडियो शेयर करने के बाद ही नुपुर शर्मा को जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। उन्हें फोन, मैसेज के जरिए से ये धमकी दी जा रही थी। नुपुर ने इसकी शिकायत पुलिस से की।
02 जून : मुंबई में नुपुर शर्मा के लिखाफ पहला मामला दर्ज हुआ। इसके बाद से अब तक छह राज्यों में 15 से ज्यादा एफआईआर नुपुर शर्मा के खिलाफ दर्ज हो चुकी है।
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कानपुर में हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
03 जून : कानपुर में जुमे की नमाज के बाद नुपुर के खिलाफ प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। पुलिस और दुकानों पर पथराव किया। इसमें एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए।
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अरब देशों ने जताया विरोध।
- फोटो : अमर उजाला
04 जून : कतर ने नुपुर के बयान पर भारतीय राजदूत को तलब किया और आपत्ति जताई। इसके बाद करीब 15 मुस्लिम देशों ने इसे मुद्दा बनाया और अपनी आपत्ति जताई। इसमें कतर, ईरान, इराक, कुवैत, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मालदीव, ओमान, जॉर्डन, बहरीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने सभी देशों को जवाब दिया और कहा कि भारत में सभी धर्मों का सम्मान होता है। यहां हर धर्म के लोग रहते हैं और उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता मिली हुई है। कुवैत में भारतीय उत्पादों को वहां के स्टोर्स से हटाया जाने लगा।
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j p nadda, जेपी नड्डा
- फोटो : Twitter
05 जून : भारतीय जनता पार्टी की तरफ से रिएक्शन आया। बगैर नुपुर शर्मा का जिक्र किए पार्टी ने उनके बयान से किनारा कर लिया। देर शाम नुपुर शर्मा को पार्टी के सभी पदों से हटाते हुए निलंबित कर दिया गया।
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प्रयागराज में हिंसा। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
10 जून : जुमे की नमाज के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, सहारनपुर, झारखंड के रांची समेत देश के 12 से ज्यादा शहरों में हिंसा हुई। इसमें कई लोग घायल हो गए। रांची में हुई हिंसा में दो लोग मारे गए।
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महाराष्ट्र पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
14 जून : नागपुर में 22 साल के एक युवक ने सोशल मीडिया पर नुपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट किया। इसके बाद उसके परिवार को धमकियां मिलने लगीं। धमकी मिलने के बाद युवक ने पोस्ट डिलीट कर दी। उसने अपनी पोस्ट के लिए माफी भी मांगी। हालांकि, इसके बाद भी धमकी मिलने का सिलसिला नहीं रुका। युवक की तस्वीर पर क्रॉस लगाकर शेयर किया जाने लगा। पोस्ट शेयर करने के करीब 15 दिन बाद धमकियों से डरा युवक नागपुर छोड़कर किसी अज्ञात जगह चला गया।
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नुपुर शर्मा का समर्थन करने पर अमरावती में केमिस्ट की हत्या।
- फोटो : अमर उजाला
21 जून : महाराष्ट्र के अमरावती में एक 54 साल के केमिस्ट की हत्या कर दी गई। उदयपुर में हुए हत्याकांड के बाद एक हफ्ते पहले हुआ ये मामला भी तूल पकड़ने लगा। गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच भी एनआईए को सौंपी है। उमेश ने भी भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा के पक्ष में वॉट्सअप मैसेज किए थे। 21 जून की रात उमेश अपनी केमिस्ट शॉप से वापस लौट रहे थे। रास्ते में तीन लोगों उनकी बाइक रोककर उनकी हत्या कर दी।
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उदयपुर के कन्हैयालाल को गौस मोहम्मद और रियाज ने मार डाला।
- फोटो : अमर उजाला
28 जून : राजस्थान के उदयपुर में 28 जून को एक दर्जी की हत्या कर दी गई। हत्यारों ने दिनदहाड़े भरे बाजार में कन्हैयालाल नाम के शख्स का गला रेत दिया। आरोपियों ने हत्या का लाइव वीडियो भी बनाया। हत्या के बाद इन लोगों ने वीडियो बनाकर अपना गुनाह भी कबूल किया। कन्हैयालाल ने भी नुपुर शर्मा के बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
एक जुलाई : नुपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें उन्होंने देशभर में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई एक जगह कराने की मांग की। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नुपुर शर्मा को ही आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि देश में आज जो कुछ हो रहा है उसके लिए अकेले नुपुर शर्मा ही जिम्मेदार हैं। उन्हें तुरंत टीवी पर आकर देश से माफी मांगनी चाहिए।
दो जुलाई : सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ बयानबाजी होने लगी। बड़े-बड़े शिक्षाविद, वकील, रिटायर्ड जज इसे संविधान के खिलाफ बताने लगे। लोगों का तर्क था कि जज को बिना मामले की सुनवाई किए ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
05 जुलाई : 15 पूर्व जज और 117 रिटायर्ड आईएएस अफसरों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा और इसमें नुपुर शर्मा पर की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का विरोध किया। पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्मण रेखा पार की है।
06 जुलाई : नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई। कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया।
अब जानिए अब तक नुपुर की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
इस मामले में नुपुर शर्मा के खिलाफ पश्चिम बंगाल में 10, मुंबई में तीन, हैदराबाद में एक, जम्मू कश्मीर में एक, दिल्ली में एक मामला दर्ज हो चुका है। नुपुर को मुंबई और पश्चिम बंगाल पुलिस ने तीन बार समन जारी किया है। हालांकि, नुपुर ने अब तक अपना बयान दर्ज नहीं कराया है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली फटकार के बाद नुपुर अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का प्लान बना रहीं हैं। नुपुर के करीबियों का कहना है कि देशभर के कई शहरों में जाकर बयान दर्ज कराना मुश्किल है। ऐसे में वह कोर्ट से आग्रह करने जा रहीं हैं कि सभी मामलों की सुनवाई एक जगह हो। नुपुर के करीबियों का यह भी कहना है कि उनकी जान को खतरा है। ये भी ध्यान में रखते हुए कोई कदम उठाना चाहिए।
नुपुर की गिरफ्तारी न होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय कहते हैं कि नुपुर शर्मा को अलग-अलग थानों से नोटिस जारी किया जा रहा है। मतलब पुलिस की कार्रवाई जारी है। चूंकि एकसाथ सभी जगह बयान दर्ज करा पाना मुश्किल है, ऐसे में उन्हें सारे केस को एक जगह करवाना ही पड़ेगा। अगर वह बार-बार नोटिस के बाद भी बयान दर्ज नहीं कराती हैं तो उन्हें पुलिस कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।