प्राकृतिक खतरा स्वाभाविक रूप से होने वाली घटना है जो मानव जीवन या संपत्ति के लिए खतरा बनती है। एक प्राकृतिक खतरा प्राकृतिक आपदा बन जाता है जब यह वास्तव में होता है, जिससे जीवन और संपत्ति का महत्वपूर्ण नुकसान होता है। एक प्राकृतिक आपदा का संभावित प्रभाव घटना के आकार और स्थान पर निर्भर करता है। यदि आपदा भारी आबादी वाले क्षेत्र में होती है, तो यह तुरंत जीवन और संपत्ति दोनों को अधिक नुकसान पहुंचाती है।
बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने बताया था कि पिछले 20 साल में दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं में खासी वृद्धि हुई है जिससे मानव और आर्थिक क्षति में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दशक में लू और सूखा बड़ा खतरा होंगे क्योंकि तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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अलेप्पो, 1138
- फोटो : फाइल
अलेप्पो, 1138
ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक सीरिया में आए उस भूकंप ने अलेप्पो को पूरी तरह झकझोर दिया। किले की दीवारें और चट्टानें जमींदोज हो गईं। अलेप्पो के आस पास के छोटे कस्बे भी पूरी तरह बर्बाद हो गए। अनुमान लगाया जाता है कि उस भूकंप ने 2,30,000 लोगों की जान ली।
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सुनामी, 2004
- फोटो : फाइल
सुनामी, 2004
हिंद महासागर में भूंकप से पैदा हुई सुनामी में भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह सहित तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश के तटीय क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हुए। लगभग 10 हजार लोग मारे गए और पांच हजार लापता हुए। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने व्यापक अभियान आपरेशन मदद चलाया था।
आपरेशन मदद के अलावा तीन अन्य अभियान विदेशों (श्रीलंका, मालद्वीव, इंडोनेशिया) के लिए भी चलाए गए। नौसेना के अभियान में 32 जहाज, 7 विमान, 20 हेलीकाप्टर 15 दिन तक चलाए गए। सेना की राहत कार्य में मदद ली गई। 17 जनपदों में चले आपरेशन मदद से लगभग एक लाख लोगों को निकाला गया।
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तांगशान, 1976
- फोटो : फाइल
तांगशान भूकंप, 1976
चीन के तांगशान शहर में 28 जुलाई, 1976 को तड़के तीन बजकर बयालीस मिनट पर महाविनाशकारी भूकंप आया। चीन के इस औद्योगिक नगर की आबादी उस समय लगभग दस लाख थी। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.6 से लेकर 8.2 तक मापी गई थी। तांगशान में आए इस भूकंप ने 2,55,000 लोगों की जान ली। गैर आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक मृतकों की संख्या 6 लाख से ज्यादा थी।
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एंटिओक भूकंप, 526 ईस्वी
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एंटिओक भूकंप, 526 ईस्वी
वर्ष 526 ईस्वी में सीरिया और एंटिओक में एक घातक भूकंप आया। यह क्षेत्र उस समय बीजान्टिन साम्राज्य का हिस्सा था। इस भूकंप ने एक छोटी अवधि में एक अविश्वसनीय मौत टोल पर कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि एंटिओक में भूकंप एकमात्र प्राकृतिक आपदा है जो कमोबेश बाइबिल के युग के करीब है। यह प्राकृतिक आपदा ईसा के जन्म से पहली सहस्राब्दी में हुई थी। 20 से 29 मई 526 की अवधि में बीजान्टिन शहर 7.0 अंक की तीव्रता के साथ भूकंप से बच गया। उच्च जनसंख्या घनत्व (जो उस समय इस क्षेत्र में दुर्लभ था) के कारण, 250,000 लोग मारे गए। प्रलय के कारण हुई आग ने भी पीड़ितों की संख्या में वृद्धि में योगदान दिया।
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हेयुआन, 1920
- फोटो : फाइल
हेयुआन, 1920
चीन में आए करीब 7.8 तीव्रता वाले भूकंप के झटके हजारों किलोमीटर दूर नॉर्वे तक महसूस किये गए। भूकंप ने हेयुआन प्रांत में 2 लाख लोगों की जान ली। पड़ोसी प्रांत शीजी में भूस्खलन से एक बड़ा गांव दफन हो गया। लोगंदे और हुइनिंग जैसे बड़े शहरों के करीब सभी मकान ध्वस्त हो गए। भूकंप ने कुछ नदियों को रोक दिया और कुछ का रास्ता हमेशा के लिए बदल दिया।
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चक्रवात
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरिंगा चक्रवात, 1839
आंध्र प्रदेश के कोरिंगा शहर के बंदरगाह में कोरिंगा चक्रवात से भारत अत्यधिक प्रभावित हुआ था। इसमें लगभग 3.2 लाख लोग मारे गए और इस विशाल चक्रवात ने 25000 से अधिक जहाजों को बर्बाद कर दिया था। यह भारत के इतिहास में सबसे खराब प्राकृतिक आपदाओं में से एक था, आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले के छोटे से शहर कोरिंगा में इस चक्रवात ने तबाही मचा दी थी। जिसने पूरे शहर को नष्ट कर दिया था। यह वास्तव में सबसे बड़ी आपदाओं में से एक था जिसने भारत को हिलाकर रख दिया था।
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हैपोंग तूफान, 1881
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हैपोंग तूफान, 1881
वर्ष 1881 में वियतनाम में आए हैपोंग तूफान ने करीब 3 लाख लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया। इसने संपति और मत्स्य उद्घोग को भारी नुकसान पहुंचाया, माना जाता है 22.8 बिलियन डॉलर इस तूफान की भेंट चढ़ गए थे।
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हैती, 2010
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हैती, 2010
12 जनवरी 2010 को भूकंप ने हैती को बुरी तरह से झकझोर दिया था। रिक्टर पैमाने पर 7 तीव्रता वाले भूकंप ने 2,22,570 को अपना निवाला बनाया। एक लाख घर तबाह हुए। 13 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा। हैती आज भी पुर्नर्निमाण में जुटा है।
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भोला चक्रवात
- फोटो : फाइल
1970 भोला चक्रवात
1970 को द ग्रेट भोला चक्रवात, बांग्लादेश में आया था। हालांकि उस दौरान बांग्लादेश को पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था। द ग्रेट भोला के चलते पूर्वी पाकिस्तान में जबरदस्त बाढ़ आ गई थी। इसके अलावा उस दौरान बांग्लादेश से लगे समुद्र में 35 फीट ऊंची लहरें उठी थीं, जिन्होंने बांग्लादेश के बड़े भू-भाग को अपना निशाना बनाया था।
कहा जाता है कि इस तूफान के चलते पूर्वी पाकिस्तान में 3 से 5 लाख लोगों की जानें गई थीं। इसे उष्णकटिबंधीय तूफानों में अब तक का ज्ञात सबसे खतरनाक तूफान माना जाता है। एक पूरा शहर इससे आई बाढ़ में बह गया था। भारत पर भी इसका भारी असर पड़ा था।
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शानक्सी भूकंप, 1556
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शानक्सी भूकंप, 1556
चीन के शानक्सी प्रांत में 1556 में आए भूकंप को मानव इतिहास का सबसे जानलेवा भूकंप कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक रिक्टर स्केल पर करीब 8 तीव्रता वाले उस भूकंप से कई जगहों पर जमीन फट गई। कई जगह भूस्खलन हुए। भूकंप ने 8,30,000 लोगों की जान ली।
चीन में पीली नदी बाढ़ और अतिप्रवाह के लिए अतिसंवेदनशील है। 1887 में, इसके कारण 50,000 वर्ग मील के आसपास बाढ़ आ गई। कथित तौर पर बाढ़ ने 900,000 से 2,000,000 लोगों के जीवन का दावा किया। किसानों ने नदी की विशेषताओं को जानते हुए, बांधों का निर्माण किया, जो उन्हें वार्षिक बाढ़ से बचाते हैं, लेकिन उस वर्ष, पानी ने किसानों और उनके घरों दोनों को उड़ा दिया।