भारत सरकार के आंकड़े और सरकारी एजेंसियों का दावा है कि देश के अंदर कामकाजी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। लेकिन एक ऐसा सच सामने आया है जो सारे दावों पर पानी फेर रहा है।
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कामकाजी महिलाएं
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नेशनल सेम्पल सर्वे (68वां चरण) के परिणाम में ये स्पष्ट हुआ है कि 2011-2012 में 100 महिलाओं का 24.8 फीसदी महिलाएं ग्रामीण इलाकों में नौकरी करती थीं।
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इसी के अनुसार शहरी इलाकों में 54.3 फीसदी पुरुषों के मुकाबले कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा तेजी से गिरा है। हर 54.7 रोजगार पुरुषों के मुकाबले कामकाजी महिलाओं की संख्या महज 14.7 रह गई है।
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हफिंग्टन पोस्ट की खबर के मुताबिक भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला कर्मचारियों की सहभागिता घटी है। 2005 में जहां ग्रामीण क्षेत्र में 49 प्रतिशत महिलाएं कामकाजी थी तो वहीं 2012 के आंकड़ों में यह संख्या महज 36 प्रतिशत रह गई है।
समाज की मजबूती में कामकाजी महिलाओं की भूमिका अहम मायने रखती है। ये भी जरुरी है कि वो परिवार में निर्णायक भूमिका में हों। ऐसे में कामकाजी महिलाओं के ग्राफ में गिरावट से स्थिति बेहत चिंताजनक महसूस होती है।