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मर्डर की दो खौफनाक कहानियां : मुलायम के करीबी को बीच सड़क AK-47 से भून डाला था, एक विधायक पर तो 500 राउंड गोलियां चलीं थी

Mon, 30 May 2022 06:40 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंजाबी गायक और कांग्रेस से 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सिद्धू मूसेवाला की रविवार को दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। उनकी गाड़ी पर 30 राउंड से ज्यादा फायरिंग की गई। पहले कहा जा रहा था कि इस वारदात में खतरनाक AK-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब सामने आ रहा है कि हत्या में AN-94 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल हुआ। इस घातक हथियार का इस्तेमाल रूसी सेना करती है।
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कृष्णानंद राय और जवाहर पंडित - फोटो : अमर उजाला
पंजाबी गायक और कांग्रेस से 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सिद्धू मूसेवाला की रविवार को दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। उनकी गाड़ी पर 30 राउंड से ज्यादा फायरिंग की गई। पहले कहा जा रहा था कि इस वारदात में खतरनाक AK-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब सामने आ रहा है कि हत्या में AN-94 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल हुआ। इस घातक हथियार का इस्तेमाल रूसी सेना करती है।

रंजिश में अत्याधुनिक हथियारों से हत्या का ये सिलसिला अभी नहीं शुरू हुआ है। आज से दो दशक पहले भी इस तरह के अत्याधुनिक हथियारों का प्रयोग होता रहा है। हम आपको ऐसे ही हथियारों से होने वाले मर्डर की दो खौफनाक कहानियां बताने जा रहे हैं। दोनों का ताल्लुक राजनीति और रंजिश से जुड़ा हुआ है। जैसे, मूसेवाला भी राजनीति से जुड़े हुए थे और रंजिशन उनकी हत्या हुई। आइए जानते हैं दोनों कहानियां...
 
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पति की फोटो दिखातीं विजमा यादव - फोटो : अमर उजाला
जब हुआ AK-47 से मर्डर, मुलायम सिंह के करीबी विधायक मारे गए थे
ये कहानी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की है। यहां प्रतापपुर सीट से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी विजमा यादव हैं। विजमा के पति जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित 1993 में सपा के टिकट पर झूंसी विधानसभा सीट से विधायक बने थे। उन दिनों प्रयागराज और आसपास बालू खनन का काम जगत नारायण करवरिया के परिवार के पास था। उनके बेटे कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया, सूरजभान करवरिया बालू के ठेके के साथ कालीन, फर्नीचर और रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़े थे। बालू के ठेके को लेकर जवाहर और करवरिया परिवार में अनबन हो गई। देखते ही देखते ये अनबन दुश्मनी में बदल गई।
 
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बीच चौराहे जवाहर पंडित की हत्या कर दी गई थी। - फोटो : अमर उजाला
और फिर बीच चौराहे...
13 अगस्त 1996 को जवाहर अपनी कार से पार्टी दफ्तर से अपने घर लौट रहे थे। इसी बीच, प्रयागराज के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस में एक गाड़ी ने ओवरटेक करके जवाहर की कार रोकी। गाड़ी से निकले लोग एके-47, राइफल और रिवॉल्वर लिए हुए थे। सभी ने जवाहर पर हमला कर दिया। ये पहली बार था, जब प्रयागराज में किसी पर एके-47 से हमला हुआ था। महज कुछ सेकेंड में जवाहर ने दम तोड़ दिया। 

 

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कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया। - फोटो : अमर उजाला
इन पर लगा आरोप
इस हत्या का आरोप कपिलमुनि करवारिया, उदयभान करवारिया, सूरजभान करवारिया और दो अन्य लोगों पर लगा। एक आरोपी की घटना के कुछ समय बाद मौत हो गई। मामला लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 23 साल तक चला। 4 नवंबर 2019 को अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए IPC की धारा 302, 307, 147, 148, 149 और क्रिमिनल लॉ अमेंमेंट ऐक्ट की धारा 7 के तहत आजीवन कैद की सजा सुनाई। सभी भाई अभी जेल में बंद हैं। ये देश में पहली बार था, जब किसी को मारने के लिए AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार का प्रयोग हुआ था।  
 
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नीलम करवरिया, भाजपा विधायक, मेजा। - फोटो : प्रयागराज
आज भी राजनीति में बोलती है तूती
उधर, जवाहर पंडित के हत्या के आरोपों के बीच, करवरिया परिवार ने राजनीति में पैर जमा लिया। सबसे बड़े कपिल मुनि करवरिया बसपा से सांसद रहे हैं। वहीं, उदयभान करवरिया दो बार भाजपा से विधायक चुने गए। सूरजभान करवारिया मायावती के कार्यकाल में एमएलसी रहे। अब, उदयभान की पत्नी  नीलम करवरिया परिवार की राजनीतिक विरासत को संभाल रही हैं। नीलम मेजा से भाजपा उम्मीदवार थीं। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।  

दूसरी तरफ जवाहर पंडित की हत्या के बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनकी पत्नी विजमा ने संभाली। वह 1996, 2002 और 2012 के चुनाव में विधायक चुनी गईं। इस बार चौथी बार प्रतापपुर सीट से चुनाव जीतीं हैं। उनकी बेटी ज्योति 2016 में फूलपुर से ब्लॉक प्रमुख बनी थीं। 
 
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कृष्णानंद राय और मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
दूसरी कहानी: 500 राउंड गोलियां चलीं, चंद सेकेंड में सात लाशें बिछ गईं
ये कहानी है 29 नवंबर, 2005 की। जब बीजेपी के मोहम्दाबाद सीट से तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय समेत कुल 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। कृष्णानंद राय ने गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से साल 2002 में जीत हासिल की थी। उस दौरान उन्होंने अफजाल अंसारी को हराकर यह सीट अपने पाले में की थी। अफजाल अंसारी और उनके भाई मुख्तार अंसारी की पूरे गाजीपुर में तूती बोलती थी। कहा जाता है कि कृष्णानंद राय की जीत अंसारी बंधुओं को खलने लगी। इसी का नतीजा था कि कृष्णानंद राय को अपनी जान गंवानी पड़ी। 
 
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कृष्णानंद राय - फोटो : अमर उजाला
फिर 600 राउंड फायर झोंक दी
कृष्णानंद राय एक स्थानीय क्रिकेट प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाए गए थे। वह मैच का उद्घाटन कर वापस आ रहे थे, तभी हमलावरों ने उनके काफिले पर ऑटोमैटिक रायफल AK-47 से फायर झोंक दी। फायरिंग में करीब 500 राउंड गोली दागी गई। देखे ही देखते कृष्णानंद राय समेत गाड़ी में बैठे सभी सात लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। 
 
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मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
ये बने आरोपी
इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी, अफजाल अंसारी, संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक, राकेश पांडेय, रामू मल्लाह, मंसूर अंसारी और मुन्ना बजरंगी का नाम आया था। हालांकि, सबूतों के अभाव में सब बरी कर दिए गए, जबकि 2018 मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या हो गई।
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