यशवंत सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्तव्य में द्रौपदी मुर्मू के मीडिया से मुखातिब न होने को लेकर सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने 2014 में खुद को टिकट और मंत्रीपद न मिलने को लेकर भी जवाब दिया। आइए जानते हैं कि यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार को लेकर क्या-क्या कहा...
विज्ञापन
1 of 6
यशवंत सिन्हा का द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी पर सीधा हमला।
- फोटो : Social Media
राष्ट्रपति चुनाव में अब दो हफ्ते से कुछ ज्यादा का समय ही रह गया है। इस बीच भाजपा की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की तरफ से प्रत्याशी बनाए गए यशवंत सिन्हा लगातार अलग-अलग राज्यों का दौरा कर अपने लिए समर्थन जुटाने में लगे हैं। यशवंत सिन्हा गुरुवार को ही उत्तर प्रदेश पहुंचे, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। इस दौरान यशवंत सिन्हा ने अपनी प्रतिद्वंदी के खिलाफ जमकर हमला बोला। उन्होंने द्रौपदी मुर्मू के बहाने पीएम नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला।
मुर्मू और मोदी को लेकर क्या बोले यशवंत सिन्हा?
यशवंत सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्तव्य में द्रौपदी मुर्मू के मीडिया से मुखातिब न होने को लेकर सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने 2014 में खुद को टिकट और मंत्रीपद न मिलने को लेकर भी जवाब दिया। आइए जानते हैं कि यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार को लेकर क्या-क्या कहा...
1. यशवंत सिन्हा ने कहा, "मैं कई जगहों पर पूछता हूं कि द्रौपदी जी कहीं गईं तो क्या उन्होंने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की। देश की जो स्थिति है, उस पर कुछ बोला। आर्थिक स्थिति जो है देश की उस पर क्या ख्याल हैं। भारत की जो विदेश नीति है, उस पर उनके ख्याल क्या हैं? समाज में जो कुछ हो रहा है, उन पर उनके विचार क्या हैं?"
2. "जब कल वो आपके शहर आती हैं तो आपसे मुखातिब हों तो मेरी उम्मीद है कि यह सवाल उठेंगे। लेकिन अगर वे सबसे सम्मिलित रूप से नहीं मिलती हैं और सिर्फ एक-दो लोगों से मिलती हैं, क्योंकि इस सरकार में संवाद एकतरफा है। एक व्यक्ति बोलता है, सब लोग सुनते हैं। अगर देश के प्रधानमंत्री ने ही आठ साल में कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं किया है तो हम राष्ट्रपति के उम्मीदवार से ये उम्मीद क्यों करें?"
विज्ञापन
3 of 6
विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस की। इस मौके पर उनके साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व रालोद नेता जयंत चौधरी भी मौजूद रहे।
- फोटो : amar ujala
3. "लेकिन अगर वे आपसे मिलें तो हम यह जानना चाहेंगे कि क्या वे मेरी तरह शपथ लेने के लिए तैयार हैं? क्या वे संविधान की रक्षा के लिए तैयार हैं या एक साइलेंट और खामोश राष्ट्रपति बन कर रह जाएंगी। भारत को आज खामोश राष्ट्रपति नहीं चाहिए। आज भारत को अपने विवेक का इस्तेमाल करने वाला राष्ट्रपति चाहिए।"
4. जब यशवंत सिन्हा से पूछा गया कि आप मोदी जी की पॉलिसी का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि उनकी कैबिनेट में आपको जगह नहीं मिली, पार्टी से आपको टिकट नहीं मिला था। इस पर उन्होंने कहा, "वीपी सिंह की सरकार बनी थी तो मुझे राज्यमंत्री का पद मिल रहा था। लेकिन मैं राष्ट्रपति भवन से वापस आ गया, क्योंकि मैंने देखा कि वे मुझे राज्यमंत्री बना रहे हैं। वीपी सिंह सरकार के आने से पांच साल पहले मैंने आईएएस की नौकरी छोड़ी थी भारत सरकार में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद से। पांच साल बाद ही मुझे सरकार में राज्य मंत्री का पद मिल रहा था, लेकिन मैं नहीं बना। बन सकता था, सिर्फ शपथ लेने की ही देर थी।"
4 of 6
यशवंत सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला
5. उन्होंने कहा, "मैंने 2014 में ही स्वयं तय किया था कि मैं लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ूंगा। मेरे साथियों से पूछिए आप जो जनप्रतिनिधि बनता है, उसकी क्या हालत है। उसे लोग रात-दिन अपने काम के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। 2014 में मुझे लगा कि मैं ऐसी उम्र में पहुंच गया हूं, जहां मैं यह सब काम नहीं कर सकता हूं। मैंने खुद पार्टी से मिन्नत की थी कि मुझे टिकट मत दो। कभी राजनाथ सिंह आएं तो पूछ लीजिएगा कि क्या उन्होंने चुनाव कमेटी की बैठक से मुझे कहा था कि आप 2014 में अंतिम बार लोकसभा चुनाव लड़ लें। मैंने उनसे जोर देकर कहा था कि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता। तो यह कहां से बात आ गई कि 2014 में मुझे टिकट नहीं मिला। ऐसी की तैसी।"
6. "जब टिकट नहीं मिला तो मैं मंत्री भी कैसे बनता। भारत के संविधान में क्या ऐसा प्रावधान है कि आप बिना लोकसभा-राज्यसभा जाए बिना मंत्री बन जाएंगे। मोदीजी से मेरी कोई व्यक्तिगत कोई लड़ाई नहीं है। सिर्फ दो चीजों को लेकर लड़ाई है। एक उनकी स्टाइल ऑफ फंक्शनिंग यानी उनके काम करने की शैली और दूसरा उनकी नीतियां।"
विज्ञापन
5 of 6
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ यशवंत सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला
7. यशवंत सिन्हा ने कहा कि मुझे अटलजी की सरकार में नजदीक से काम करने का मौका मिला। आज उनकी पार्टी कहां से कहां पहुंच गई। इस बार का राष्ट्रपति चुनाव असाधारण परिस्थितियों में हो रहा है। हमारा पूरा समाज अशांत हो गया है. ऐसा लगता है कि वो दो-तीन भागों में बंट गया है। आपस में बातचीत खत्म हो गई है. कहीं कोई किसी को समझाने की स्थिति में नहीं है। बड़ी से बड़ी घटनाओं पर पीएम चुप रह जाते हैं।
8. सिन्हा ने कहा, "देश के प्रधानमंत्री इन घटनाओं पर बोलें तो उसका असर शांत करने पर पड़ेगा, लेकिन वो बोलते ही नहीं हैं. इसका नतीजा ये हुआ कि संविधान की मर्यादा खत्म हो गई। संवैधानिक मूल्यों की रक्षा नहीं हो पा रही है। अगर ऐसा चलता रहा तो एक दिन संविधान नष्ट हो जाएगा।"
9. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने कहा कि आज कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 का मामला 2019 में सुप्रीम कोर्ट में गया, लेकिन 2022 आ गया, उसकी सुनवाई कब होगी, किसी को नहीं पता। सीएए कानून आया, उसके खिलाफ कोर्ट में कब सुनवाई होगी, नहीं पता। सुप्रीम कोर्ट कुछ मामलों को तुरंत सुन लेता है, लेकिन कुछ मामलों में पता नहीं चलता कब होगी सुनवाई।
10. हुकूमत में बैठे लोग चाहते हैं कि समाज बंटा रहे। राष्ट्रपति के पास बहुत शक्तियां होती हैं। देश के कई राष्ट्रपति ऐसे हुए हैं, जिन्होंने सरकार को परामर्श दिए। इस दौरान उन्होंने बताया कि अगर मुझे चुन लिया जाता है तो मैं राष्ट्रपति भवन में संविधान के संरक्षक के रूप में काम करूंगा। अगर मेरे ध्यान में कोई मामला आता है कि भारत की सरकार प्रजातंत्र का नुकसान कर रही है। जैसे चुनी प्रदेश की सरकार को गिराना। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश। अगर ऐसा होता है कि तो भारत सरकार को ऐसा करने से रोका जाए।