दुनियाभर में ग्रीष्म लहर (Heat Waves) का भारी प्रकोप देखने को मिल रहा है, जिसका असर पर्यावरणीय के हर एक हिस्से पर पड़ रहा है। ऐसे में ग्रीष्म लहरों के प्रभावों को लेकर एक पर्यावरणीय अध्ययन में पक्षियों पर शोध किया गया है, जिसमें गर्मी का पक्षियों के बर्ताव और उनके शरीर पर क्या असर होगा, इसकी पड़ताल की गई है। आइए जानते हैं कि इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने क्या पाया।
दरअसल, इस अध्ययन में सामने आया कि गर्मी ने जेबरा फिंच (Zebra Finches) पक्षियों के टेस्टिस की सैकड़ों जीन्स की गतिविधियों पर असर डाला, लेकिन मस्तिष्क को काफी कम प्रभावित किया। इससे ये साफ होता है कि गर्मी से मस्तिष्क पर कम प्रभाव होता है। इस अध्ययन में पक्षियों के जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता के बारे में भी काफी जानकारी हासिल हुई है। अध्ययन कि पहली लेखक और शिकागो की लोयोला यूनिवर्सिटी में एसिस्टेंट प्रोफेसर सारा लिप्शूत्ज ने भी इस बारे में काफी जानकारी साझा की है।
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पक्षियों की जनसंख्या पर पड़ सकता है प्रभाव
- फोटो : iStock
उन्होंने बताया कि गर्मी के बर्ताव और शरीर क्रिया विज्ञान संबंधी प्रभावों की अधिकांश जानकारी पानी के जीवों या धरती के ठंडे खून वाले जीवों से मिलती हैं। लेकिन धरती के स्तनपायी जानवरों और पक्षियों के लिए भी ये ग्रीष्म लहर बड़ी समस्या हो सकती है। खासतौर पर गर्मी यदि उनके प्रजनन अंगों के खास हिस्सों को प्रभावित करे तो ये ज्यादा हानिकारक हो सकता है।
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इस शोध से शोधकर्ता जानना चाहते थे कि इन समस्याओं से कैसे निपटा जाए। ये जानने के लिए ये समझना जरूरी है कि ये होता कैसे है। गर्म खून के जानवरों के लिए ग्रीष्म लहरें घातक साबित हो सकती है, लेकिन वहीं दूसरी ओर हाल ही में हुए जलवायु परिवर्तन पर किए गए अध्ययनों में उन पर बर्ताव संबंधी और शरीर विज्ञान संबंधी लगभग गायब पाए गए हैं।
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शोध के जरिए गर्मी के कुछ कम घातक प्रभावों के बारे जानने की कोशिश की जा रही थी, जो जानवरों के लिए जानलेवा नहीं होते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के अनुसार उनके ढलने या बदलने की क्षमता पर भारी प्रभाव डालता है।
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शोधकर्ताओं ने जेबरा फिंचों (Zebra Finches) को चार घंटे के हीट चैलेंज का सामना कराया। इसमें वही अनुभव होता हैं जो ग्रीष्म काल के दिनों में दोपहर के समय की गर्मी में किया जाता हैं। इस पक्षी को अध्ययन के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि गाने वाले पक्षियों में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी भीषण गर्मी में तापमान के उतार चढ़ाव का सामना करते हैं।
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इसके साथ ही जेबरा फिंच के मस्तिष्क के उस हिस्से पर भी अध्ययन किया गया, जो गाने की क्रिया को नियंत्रित करता है और साथी पक्षियों को आकर्षित करने के बर्ताव पर असर डालता है। शोध में पाया गया कि मस्तिष्क चरम तापमान में कम प्रतिक्रिया देता है।
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इस अध्ययन में ये भी सामने आया कि पक्षियों में जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने की भी क्षमता होती है। वो नर जो हीट चैलेंज के दौरान जल्दी हांफने लगे, उनके मस्तिष्क और टेस्टिस की जीन गतिविधि पर सीमित प्रभाव पड़ा। वहीं कुछ पक्षियों ने गर्मी के प्रति बेहतर ऊष्मा नियंत्रण बर्ताव का उपयोग दर्शाया।