बदायूं में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने प्रभावी वक्तव्य से जहां जनता को रिझाया। तमाम योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मान देकर प्रभाव जमाया, वहीं भीड़ में शामिल तमाम लोगों ने मंच से लेकर सड़क तक समाजवादी पार्टी और बदायूं की छवि बिगाड़ने का काम किया।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
सीएम सभा निपटाकर जैसे ही मंच से हेलीपैड की ओर गए। भीड़ बेकाबू हो गई। सैकड़ों लोग मंच पर चढ़ गए। कुर्सियों को रौंदते हुए गुलदस्ते, गमले, होर्डिंग और जो सामान हाथ लगा लेकर चलते बने। पुलिस और पार्टी के नेता तमाशबीन बनकर सब देखते रहे।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
सभा में जो लोग अन्य जिलों से आए थे, वे सभा के बाद का दृश्य देकर हैरान रह गए। खुद को सपा का समर्थक कहने वालों ने मुख्यमंत्री के जाने के बाद मंच पर चढ़कर गुलदान और सजावटी सामान नोच डाला। तमाम लोग पौधों समेत गमले ही ले उड़े। यही नहीं, माइक का सामान और अन्य चीजें भी नहीं छोड़ीं।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
होर्डिंग की राडों को हासिल करने के लिए बैनर फाड़ डाले। सबसे अधिक शर्मनाक तो यह रहा कि अस्थायी शौचालयों के प्लास्टिक के पर्दे भी समेट कर ले गए। सभास्थल के सामने पुलिस ने ऐसे लोगों को खदेड़ा तो वे बड़ी बेशर्मी से बोले, सरकार हमारी तो सामान भी हमारा। कुछ लोग तो शौचालय के पॉट तक उखाड़ ले गए।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
होर्डिंग की लोहे की रॉडों को उत्पाती तोड़कर साइकिल पर भी लादकर ले जाते देखे गए। कुछ लोगों ने सामान बैनरों में बांध लिया। होर्डिंग हासिल करने को यहां एक गेट को गिरा दिया गया। उस समय गेट एक टैंपो पर आकर गिरा। हालांकि भीड़ में किसी पर भी गिर सकता था। शहर में मार्गों पर लगे होर्डिंग बोर्ड, स्वागत द्वार और बैनर भी उत्पाती उतार ले गए।
मुख्यमंत्री की सभा के लिए प्लास्टिक के झंडे-बैनरों से शहर भर को पाट दिया गया था। सभा खत्म होते ही ये सब सड़कों पर तितर-बितर दिखे। कुछ लोगों ने बड़ें बैनरों को ले जाने के चक्कर में ऐसे झंडियों की झालरें तोड़ डालीं जो सड़कों पर बिखर गईं। सभास्थल पर लोगों ने प्यास बुझाने के लिए पानी का पाउचों का जमकर प्रयोग किया और उपयोग के बाद जहां के तहां फेंक दिया। लाखों पाउच इधर-उधर पड़े देखे गए। इस सबसे पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ।