आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत का अचानक वृंदावन आना और पहली बार वृंदावन के संतों से आश्रमों में मुलाकात की जगह-जगह चर्चा है। 2017 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए संघ का संतों से मिलना अहम माना जा रहा है।
विज्ञापन
2 of 5
मोहन भागवत
- फोटो : amar ujala bureau
संतों और धर्माचार्यों से प्रवचनों और कथाओं में राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रचार कर हिंदुत्व की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने का आग्रह कर बिखरते भगवा खेमे को एकजुट करने की संघ की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
विज्ञापन
3 of 5
मोहन भागवत
- फोटो : amar ujala bureau
22 अप्रैल से उज्जैन में शुरू होने वाले सिंहस्थ कुंभ में देश भर के संतों का समागम होगा। माना जा रहा है इससे पहले संघ ब्रज के संतों के माध्यम से अपनी बात को पूरे संत समाज के सामने पहुंचाने के प्रयास में जुट गया है।
4 of 5
मोहन भागवत
- फोटो : amar ujala bureau
बीते कुछ समय से देश में उत्पन्न हो रहे राष्ट्रविरोधी मुद्दों के बाद संघ प्रमुख की संतों से मुलाकात नई रणनीति हो सकती है। साथ ही कुंभ के दौरान होने वाली धर्मसभा में संतों के बीच राष्ट्रवादी विचारधारा और हिंदुत्व को लेकर कोई आपसी मतभेद या भ्रम की स्थिति न हो इसे लेकर भी संघ प्रमुख का वृंदावन दौरा अहम माना जा रहा है।
शनिवार को सुबह मोहन भावगत रामकथा प्रवक्ता संत विजय कौशल महाराज के निकुंजवन स्थित आश्रम पर पहुंचे थे। यहां एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। संघ प्रमुख ने पत्रकार वार्ता में चर्चा के प्रश्नों को हंसकर टाल दिया लेकिन विजय कौशल महाराज ने धार्मिक मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही।