पीएम मोदी की 'मन की बात'
- फोटो : Amar Ujala
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज मैं आपको एक ऐसी मिसाल के बारे में बताना चाहता हूं, जहां स्वच्छता के संकल्प ने पहाड़ जैसी चुनौतियों को भी मात दे दी। आप सोचिए, कोई व्यक्ति बर्फीली पहाड़ियों पर चढ़ाई कर रहा हो, जहां सांस लेना मुश्किल हो, कदम-कदम पर जान को खतरा हो और फिर भी वो व्यक्ति वहां सफाई में जुटा हो। ऐसा ही कुछ किया है, हमारी ITBP की टीमों के सदस्यों ने। ये टीम, माउंट मकालू जैसे, विश्व की सबसे कठिन चोटी पर चढ़ाई के लिए गई थी। पर साथियों, उन्होंने सिर्फ पर्वतारोहण नहीं किया, उन्होंने अपने लक्ष्य में एक मिशन और जोड़ा 'स्वच्छता' का। चोटी के पास जो कचरा पड़ा था, उन्होंने उसे हटाने का बीड़ा उठाया। आप कल्पना कीजिए, 150 किलो से ज्यादा गैर-जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट इस टीम के सदस्य अपने साथ नीचे लाए। इतनी ऊंचाई पर सफाई करना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि जहां संकल्प होता है, वहां रास्ते अपने आप बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे घरों और दफ्तरों में हर दिन बहुत सारा कागज का कचरा निकलता है। शायद, हम इसे सामान्य मानते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी, देश के लैंडफिल अपशिष्ट का लगभग एक चौथाई हिस्सा कागज से जुड़ा होता है। आज जरूरत है, हर व्यक्ति इस दिशा में जरूर सोचे। मुझे ये जानकर अच्छा लगा कि भारत के कई स्टार्टअप इस सेक्टर में शानदार काम कर रहे हैं। विशाखापत्तनम, गुरुग्राम ऐसे कई शहरों में कई स्टार्ट-अप पेपर रीसाइक्लिंग के नए तरीके अपना रहे हैं। कोई रीसायकल पेपर पैकेजिंग बोर्ड से बना रहा है, कोई डिजिटल तरीकों से न्यूजपेपर रीसाइक्लिंग को आसान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि जालना जैसे शहरों में कुछ स्टार्ट-अप 100 प्रतिशत पुनर्नवीनीकरण सामग्री से पैकेजिंग रोल और पेपर कोर बना रहे हैं। आप ये भी जानकर प्रेरित होंगे, एक टन कागज की रीसाइक्लिंग से 17 पेड़ कटने से बचते हैं और हजारों लीटर पानी की बचत होती है।