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Mann Ki Baat Key Points: 'मन की बात' में पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा, किन राज्यों के कौन-कौन से कामों को सराहा?

Sun, 25 May 2025 11:29 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मन की बात - फोटो : Amar Ujala
PM Modi Mann ki Baat Updates: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई महीने के आखिरी रविवार यानी आज 'मन की बात' को संबोधित किया। अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर बात की। आइए हर मुद्दे पर पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा, जानते हैं...
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पीएम मोदी की मन की बात - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि बस से कहीं आना-जाना कितनी सामान्य बात है, लेकिन मैं आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताना चाहता हूं, जहां पहली बार एक बस पहुंची।  इस दिन का वहां के लोग वर्षों से इंतजार कर रहे थे। और जब गांव में पहली बार बस पहुंची तो लोगों ने ढोल-नगाड़े बजाकर उसका स्वागत किया।  गांव में पक्की सड़क थी, लोगों को जरूरत थी, लेकिन पहले कभी यहां बस नहीं चल पाई थी। क्यों, क्योंकि ये गांव माओवादी हिंसा से प्रभावित था।  यह जगह है महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में, और इस गांव का नाम है, काटेझरी। काटेझरी में आए इस परिवर्तन को आसपास के पूरे क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। अब यहां हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। माओवाद के खिलाफ सामूहिक लड़ाई से अब ऐसे क्षेत्रों तक भी बुनियादी सुविधाएं पहुंचने लगी है। गांव के लोगों का कहना है कि बस के आने से उन लोगों का जीवन बहुत आसान हो जाएगा। 
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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी ने कहा कि 'मन की बात' में हम छत्तीसगढ़ में हुए बस्तर Olympics और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में Science Lab पर चर्चा कर चुके हैं। यहां के बच्चों में Science का Passion है। वो Sports में भी कमाल कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी होते हैं। इन लोगों ने तमाम चुनौतियों के बीच अपने जीवन को बेहतर बनाने की राह चुनी है। मुझे यह जानकार भी बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे हैं। करीब 95% Result के साथ ये जिला 10वीं के नतीजों में Top पर रहा। वहीं 12वीं की परीक्षा में इस जिले ने छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया। 

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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि पिछले केवल पांच वर्षों में गुजरात के गिर में शेरों की आबादी 674 से बढ़कर 891 हो गई है। Lion Census के बाद सामने आई शेरों की ये संख्या बहुत उत्साहित करने वाली है। गुजरात ऐसा पहला राज्य बना, जहां बड़े पैमाने पर Forest Officers के पद पर महिलाओं की तैनाती की गई।  आज हम जो नतीजे देख रहे हैं, उसमें इन सभी का योगदान है। Wild Life Protection के लिए हमें ऐसे ही हमेशा जागरुक और सतर्क रहना होगा। 
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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर की बात ही कुछ और है, वहां का सामर्थ्य, वहां की प्रतिभा, वाकई अद्भुत है। मुझे एक दिलचस्प कहानी पता चली है क्राफ्टेड फाइबर की। क्राफ्टेड फाइबर ये सिर्फ एक ब्रांड नहीं है, सिक्किम की परंपरा, बुनाई की कला, और आज के फैशन की सोच तीनों का सुंदर संगम है। इसकी शुरुआत की डॉ. चेवांग नोरबू भूटिया ने। पेशे से वो पशु चिकित्सक हैं और दिल से सिक्किम की संस्कृति के सच्चे ब्रांड एंबेसडर। उन्होंने सोचा क्यूं न बुनाई को एक नया आयाम दिया जाए और इसी सोच से जन्म हुआ क्राफ्टेड फाइबर का। उन्होंने पारंपरिक बुनाई को आधुनिक फैशन से जोड़ा और इसे बनाया एक सामाजिक उद्यम। अब उनके यहां केवल कपड़े नहीं बनते, उनके यहां जिंदगियां बुनी जाती हैं। वे स्थानीय लोगों को कौशल प्रशिक्षण देते हैं, उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हैं। गांवों के बुनकर, पशुपालक और स्वयं सहायता समूह इन सबको जोड़कर डॉ. भूटिया ने रोजगार के नए रास्ते बनाए हैं।
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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि आज मैं आपको एक ऐसे शानदार व्यक्ति के बारे में बताना चाहता हूं जो एक कलाकार भी हैं और जीती-जागती प्रेरणा भी हैं। नाम है -जीवन जोशी, उम्र 65 साल। अब सोचिए, जिनके नाम में ही जीवन हो, वो कितनी जीवंतता से भरे होंगे। जीवन जी उत्तराखंड के हल्द्वानी में रहते हैं। बचपन में पोलियो ने उनके पैरों की ताकत छीन ली थी, लेकिन पोलियो, उनके हौसलों को नहीं छीन पाया। उनके चलने की रफ्तार भले कुछ धीमी हो गई, लेकिन उनका मन कल्पना की हर उड़ान उड़ता रहा। इसी उड़ान में, जीवन जी ने एक अनोखी कला को जन्म दिया नाम रखा 'बगेट'। इसमें वो चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली सूखी छाल से सुंदर कलाकृतियां बनाते हैं। वो छाल, जिसे लोग आमतौर पर बेकार समझते हैं- जीवन जी के हाथों में आते ही धरोहर बन जाती है। उनकी हर रचना में उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू होती है। कभी पहाड़ों के लोक वाद्ययंत्र, तो कभी लगता है जैसे पहाड़ों की आत्मा उस लकड़ी में समा गई हो। 
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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में कुछ समय पहले तक जिन महिलाओं को दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, आज वे ही महिलाएं ड्रोन से 50 एकड़ जमीन पर दवा के छिड़काव का काम पूरा कर रही हैं। सुबह तीन घंटे, शाम दो घंटे और काम निपट गया। धूप की तपन नहीं, जहर जैसे रसायनों का खतरा नहीं। गांववालों ने भी इस परिवर्तन को दिल से स्वीकार किया है। अब ये महिलाएं 'ड्रोन ऑपरेटर' नहीं, 'स्काई वॉरियर्स' के नाम से जानी जाती हैं। ये महिलाएं हमें बता रही हैं- बदलाव तब आता है जब तकनीक और संकल्प एक साथ चलते हैं।

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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
योग दिवस का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 21 जून 2015 में 'योग दिवस' की शुरुआत के बाद से ही इसका आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। इस बार भी 'योग दिवस' को लेकर दुनिया भर में लोगों का जोश और उत्साह नजर आ रहा है। आंध्र प्रदेश की सरकार ने योग आंध्रा अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य पूरे राज्य में योग संस्कृति को विकसित करना है। इस अभियान के तहत योग करने वाले 10 लाख लोगों का एक समूह बनाया जा रहा है। मुझे इस वर्ष विशाखापत्तनम में 'योग दिवस' कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेगा। मुझे ये जानकर अच्छा लगा कि इस बार भी हमारे युवा साथी, देश की विरासत से जुड़ी प्रतिष्ठित स्थान पर योग करने वाले हैं। कई युवाओं ने नए रिकार्ड बनाने और योग श्रृंखला का हिस्सा बनने का संकल्प लिया है। 

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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि 24 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक और मेरे मित्र तुलसी भाई की मौजूदगी में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है। इस समझौते के साथ ही स्वास्थ्य हस्तक्षेपों का अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण के तहत एक समर्पित पारंपरिक चिकित्सा मॉड्यूल पर काम शुरू हो गया है। इस पहल से आयुष को पूरी दुनिया में वैज्ञानिक तरीके से अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। 

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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी ने कहा कि आपने स्कूलों में ब्लैकबोर्ड तो देखा होगा, लेकिन अब कुछ स्कूलों में 'सुगर बोर्ड' भी लगाया जा रहा है – ब्लैक बोर्ड नहीं, शुगर बोर्ड! CBSE की इस अनोखी पहल का उद्देश्य है- बच्चों को उनके चीनी के सेवन के प्रति जागृत करना। कितनी चीनी लेनी चाहिए, और कितनी चीनी खाई जा रही है- ये जानकर बच्चे खुद से ही सेहतमंद विकल्प चुनने लगे हैं। यह एक अनोखा प्रयास है और इसका असर भी बड़ा सकारात्मक होगा। बचपन से ही स्वस्थ जीवनशैली की आदतें डालने में यह काफी मददगार साबित हो सकता है। 

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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज मैं आपको एक ऐसी मिसाल के बारे में बताना चाहता हूं, जहां स्वच्छता के संकल्प ने पहाड़ जैसी चुनौतियों को भी मात दे दी। आप सोचिए, कोई व्यक्ति बर्फीली पहाड़ियों पर चढ़ाई कर रहा हो, जहां सांस लेना मुश्किल हो, कदम-कदम पर जान को खतरा हो और फिर भी वो व्यक्ति वहां सफाई में जुटा हो। ऐसा ही कुछ किया है, हमारी ITBP की टीमों के सदस्यों ने। ये टीम, माउंट मकालू जैसे, विश्व की सबसे कठिन चोटी पर चढ़ाई के लिए गई थी। पर साथियों, उन्होंने सिर्फ पर्वतारोहण नहीं किया, उन्होंने अपने लक्ष्य में एक मिशन और जोड़ा 'स्वच्छता' का। चोटी के पास जो कचरा पड़ा था, उन्होंने उसे हटाने का बीड़ा उठाया। आप कल्पना कीजिए, 150 किलो से ज्यादा गैर-जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट इस टीम के सदस्य अपने साथ नीचे लाए। इतनी ऊंचाई पर सफाई करना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि जहां संकल्प होता है, वहां रास्ते अपने आप बन जाते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे घरों और दफ्तरों में हर दिन बहुत सारा कागज का कचरा निकलता है। शायद, हम इसे सामान्य मानते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी, देश के लैंडफिल अपशिष्ट का लगभग एक चौथाई हिस्सा कागज से जुड़ा होता है। आज जरूरत है, हर व्यक्ति इस दिशा में जरूर सोचे। मुझे ये जानकर अच्छा लगा कि भारत के कई स्टार्टअप इस सेक्टर में शानदार काम कर रहे हैं। विशाखापत्तनम, गुरुग्राम ऐसे कई शहरों में कई स्टार्ट-अप पेपर रीसाइक्लिंग के नए तरीके अपना रहे हैं। कोई रीसायकल पेपर पैकेजिंग बोर्ड से बना रहा है, कोई डिजिटल तरीकों से न्यूजपेपर रीसाइक्लिंग को आसान बना रहा है। 

उन्होंने कहा कि जालना जैसे शहरों में कुछ स्टार्ट-अप 100 प्रतिशत पुनर्नवीनीकरण सामग्री से पैकेजिंग रोल और पेपर कोर बना रहे हैं। आप ये भी जानकर प्रेरित होंगे, एक टन कागज की रीसाइक्लिंग से 17 पेड़ कटने से बचते हैं और हजारों लीटर पानी की बचत होती है।

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पीएम मोदी की 'मन की बात' - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी ने कहा कि बीते दिनों खेलों इंडिया गेम्स की बड़ी धूम रही।  खेलों इंडिया के दौरान बिहार के पांच शहरों ने मेजबानी की थी। वहां अलग-अलग श्रेणी के मैच हुए थे। पूरे भारत से वहां पहुंचे एथेलेटिक्स की संख्या पांच हजार से भी ज्यादा थी। इन एथलीट्स ने बिहार की खेल भावना की, बिहार के लोगों से मिली आत्मीयता की, बड़ी तारीफ की है।  खेलों इंडिया यूथ गेम्स का ये पहला आयोजन था, जो ओलंपिक चैनल के जरिए दुनिया भर में पहुंचा। पूरे विश्व के लोगों ने हमारे युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को देखा और सराहा। मैं सभी पदक विजेताओं, विशेषकर शीर्ष तीन विजेताओं- महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान को बधाई देता हूं। इस बार खेलो इंडिया में कुल 26 रिकार्ड बने। भारोत्तोलन स्पर्धाओं में महाराष्ट्र की अस्मिता धोने, ओडिशा के हर्षवर्धन साहू और उत्तर प्रदेश के तुषार चौधरी के शानदार प्रदर्शन ने सबका दिल जीत लिया। महाराष्ट्र के साईराज परदेशी ने तो तीन रिकॉर्ड बना डाले। एथलेटिक्स में उत्तर प्रदेश के कादिर खान और शेख जीशान और राजस्थान के हंसराज ने शानदार प्रदर्शन किया। इस बार बिहार ने भी 36 मेडल अपने नाम किए। 

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मन की बात - फोटो : Amar Ujala
प्रधानमंत्री ने कहा, 'पिछले 11 वर्षों में, मधुमक्खी पालन में, भारत में एक मीठी क्रांति (sweet revolution) हुआ है। आज से 10-11 साल पहले भारत में शहद उत्पादन एक साल में करीब 70-75 हजार मीट्रिक टन होता था। आज यह बढ़कर करीब-करीब सवा लाख मीट्रिक टन के आसपास हो गया है। यानि शहद उत्पादन में करीब 60% की बढ़ोतरी हुई है। हम शहद उत्पादन और निर्यात में दुनिया के अग्रणी देशों में आ चुके हैं। इस सकारात्मक प्रभाव में 'राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन' और 'शहद मिशन' की बड़ी भूमिका है। इसके तहत मधुमक्खी पालन से जुड़े हजारों किसानों को प्रशिक्षण दिया गया, उपकरण दिए गए, और बाजार तक उनकी सीधी पहुंच बनाई गई।

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मन की बात - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का एक उदाहरण है, यहां आदिवासी किसानों ने 'सोन हनी' नाम से एक शुद्ध जैविक शहद ब्रांड बनाया है। आज वह शहद जेम समेत अनेक ऑनलाइन पोर्टल पर बिक रहा है, यानि गांव की मेहनत, अब वैश्विक हो रही है। इसी तरह उत्तर प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश में हजारों महिलाएं और युवा अब शहद उद्यमी बन चुके हैं। 
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मन की बात - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी ने आगे कहा कि मधुमक्खियों की सुरक्षा सिर्फ पर्यावरण की नहीं, हमारी खेती और भावी पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है। ये उदाहरण है पुणे शहर का, जहां एक हाउसिंग सोसायटी में मधुमक्खियों का एक छत्ता हटाया गया। शायद सुरक्षा के कारण या डर की वजह से। इस घटना ने किसी को कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। अमित नाम के एक युवा ने तय किया कि मधुमक्खियों को हटाना नहीं, उन्हें बचाना चाहिए। उन्होंने खुद सीखा, मधुमक्खियों पर पढ़ाई की और दूसरों को भी जोड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने एक टीम बनाई, जिसे उन्होंने नाम दिया बी फ्रेंड यानी 'बी-मित्र'। अब ये 'बी-मित्र', मधुमक्खियों के छत्तों को एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर करते हैं, ताकि लोगों को खतरा न हो औरमधुमक्खियां भी जिंदा रहें।
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