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Maharashtra Political Crisis: चार राज्यों में ऑपरेशन 'लोटस' से सरकार बना चुकी है भाजपा, जानिए कहां-कहां मिली मात?

Wed, 22 Jun 2022 08:51 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर शिवसेना के बागी विधायक भाजपा को समर्थन दे देते हैं तो संभव है कि आने वाले कुछ दिनों में भाजपा की सरकार बन जाए। अगर ऐसा होता है तो पिछले छह साल के अंदर ये पांचवां राज्य होगा जहां भाजपा का ऑपरेशन 'लोटस' सफल होगा। इसके पहले चार राज्यों में भाजपा की ऐसे ही सरकार बन चुकी है।
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ऑपरेशन लोटस - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में सियासी घमासान जारी है। उद्धव सरकार के मंत्री एकनाथ शिंदे बागी विधायकों के साथ असम में डेरा डाले हुए हैं। उनका दावा है कि उनके साथ 46 विधायक हैं। इनमें ज्यादातर शिवसेना के हैं, तो कुछ निर्दलीय भी हैं। इस बीच, शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सामने आए। फेसबुक लाइव के जरिए उन्होंने जनता से संवाद किया। उन्होंने बागी विधायकों से ये भी कहा कि सामने आकर वह इस्तीफा मांगेंगे तो तुरंत दे दूंगा। 

सरकार की डोर काफी कमजोर हो चुकी है। ये कभी भी टूट सकती है। ऐसे में अगर शिवसेना के बागी विधायक भाजपा को समर्थन दे देते हैं तो संभव है कि आने वाले कुछ दिनों में भाजपा की सरकार बन जाए। अगर ऐसा होता है तो पिछले छह साल के अंदर ये पांचवां राज्य होगा जहां भाजपा का ऑपरेशन 'लोटस' सफल होगा। इसके पहले चार राज्यों में भाजपा की ऐसे ही सरकार बन चुकी है। आज हम आपको उन्हीं राज्यों के बारे में बताएंगे...
 
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अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू - फोटो : अमर उजाला
1. अरुणाचल प्रदेश : जब कांग्रेस के 42 विधायक हो गए बागी
ये बात 2016 की है। अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन पार्टी के अंदर विवाद हो गया। इसके बाद कांग्रेस के 42 विधायकों ने बागी रूख अख्तियार कर लिया। इन सभी ने पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) बना ली और भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाई। बाद में PPA का भाजपा में विलय हो गया था।   
 
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बीएस येदियुरप्पा - फोटो : अमर उजाला
2. कर्नाटक : जेडीएस-कांग्रेस के विधायकों ने बना दी भाजपा की सरकार
ये बात साल 2018 की है। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बहुमत के आंकड़ों से दूर थी। उस समय जेडीएस और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना ली। फिर ऑपरेशन 'लोटस' चला। एक साल बाद इन दोनों पार्टियों के कई विधायकों ने एकसाथ इस्तीफा दे दिया। इसके चलते कुमार स्वामी की सरकार गिर गई। भाजपा ने कर्नाटक में अपनी सरकार बनाई। तब विपक्ष ने भाजपा पर ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगाया था। 
 

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केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया। - फोटो : अमर उजाला
3. मध्य प्रदेश : जब सिंधिया बन गए बागी
ये मामला भी साल 2020 का ही है। तब ऑपरेशन लोटस मध्य प्रदेश में भी सफल हुआ था। यहां 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में वापस आई थी। कमलनाथ मुख्यमंत्री बनाए गए थे। तब मुख्यमंत्री का सपना देख रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी सामने आई। कुछ समय बाद उन्होंने बगावत कर दी। सिंधिया के पास 22 विधायकों का साथ था। सभी ने कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।  सिंधिया गुट के 22 विधायक भाजपा के साथ चले गए। भाजपा के शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने। वहीं, सिंधिया को राज्यसभा का सांसद बनाकर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री बना दिया। 
 
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गोवा के मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला
4. गोवा : कांग्रेस में बगावत, खिला कमल
साल 2017 का मामला है। यहां भी चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन भाजपा ने खेल बिगाड़ दिया। यहां भी भाजपा ने ऑपरेशन लोटस चलाया और कांग्रेस के 10 विधायकों ने एक साथ राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। सभी भाजपा में शामिल हो गए। यहां भी भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हो गई। 
 
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ऑपरेशन लोटस - फोटो : अमर उजाला
इन राज्यों में सफल नहीं हो पाया ऑपरेशन लोटस
ऐसा नहीं है कि भाजपा का ऑपरेशन लोटस हर जगह सफल हो गया है। कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जहां तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा का ऑपरेशन सफल नहीं हो पाया। इनमें उत्तराखंड, राजस्थान शामिल हैं। 

 
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अशोक गहलोत और सचिन पायलट - फोटो : Social Media
राजस्थान : जब पायलट ग्रुप हो गया बागी
राजस्थान में सरकार बनने के बाद से ही पायलट और गहलोत की लड़ाई सामने आने लगी थी। दोनों सार्वजनिक मंच पर खुलकर एक दूसरे की खिलाफत करने लगे थे। 2020 में अचानक सचिन पायलट अपने समर्थक 30 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए। तब कयास लगाए जा रहे थे कि ये बागी विधायक भाजपा का साथ दे सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को शांत करने में कामयाब रही। भाजपा का ऑपरेशन लोटस सफल नहीं हो पाया। 
 

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उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत। - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड : राष्ट्रपति शासन तक लगा दिया, लेकिन फायदा नहीं मिला
साल 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को नौ विधायकों का विद्रोह झेलना पड़ा। इन विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्य ठहरा दिया। तब राज्यपाल ने कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। उस वक्त कांग्रेस ने बगावत के पीछे बीजेपी का हाथ होने का आरोप लगाया था। बागी विधायक बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। हालांकि, कांग्रेस ने कोर्ट के आदेश से सरकार बचा ली।
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अजीत पवार - फोटो : एएनआई (फाइल)
महाराष्ट्र : जब 24 घंटे में फिर बदल गए पवार
2019 महाराष्ट्र चुनाव के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि, बहुमत के आंकड़ों से दूर थी। तब शिवसेना ने ढ़ाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद की शर्त भाजपा के सामने रख दी। भाजपा ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसपर शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन कर लिया। माना जा रहा था कि उद्धव के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनेगी, लेकिन इसी बीच एनसीपी नेता अजीत पवार ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। 12 घंटे के अंदर देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। हालांकि, बाद में शरद पवार ने पूरा पासा ही पलट दिया। शपथ लेने के 24 घंटे के अंदर ही अजीत पवार ने वापस इस्तीफा दे दिया और भाजपा से समर्थन वापस ले लिया। बाद में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर सरकार बनाई। 
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