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President Election: मुर्मू का नाम घोषित होते ही बिखरने लगा विपक्ष, आखिर क्यों ममता की कोशिशों पर फिरा पानी?

Wed, 22 Jun 2022 07:32 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों का एलान हो चुका है। भाजपा की अगुआई वाली एनडीए द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाकर विपक्षी एकता में सेंध लगा दी है। भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट करने में जुटीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इससे तगड़ा झटका लगा है। आइये समझते हैं आखिर विपक्ष एकजुट क्यों नहीं हो सका? अब तक कितने गैर एनडीए दल मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन कर चुके हैं?  
 
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प्रधानमंत्री मोदी और द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों का एलान हो चुका है। भाजपा की अगुआई वाली एनडीए द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाकर विपक्षी एकता में सेंध लगा दी है। भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट करने में जुटीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इससे तगड़ा झटका लगा है। आइये समझते हैं आखिर विपक्ष एकजुट क्यों नहीं हो सका? अब तक कितने गैर एनडीए दल मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन कर चुके हैं?  
 
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नेतृत्व को लेकर खींचतान - फोटो : अमर उजाला
1. नेतृत्व को लेकर खींचतान : सबसे बड़ा कारण यही है। तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस भी राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करने के लिए कोशिश कर रही है। वाईएसआर कांग्रेस के जगह मोहन रेड्डी और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल भी पार्टी के विस्तार में जुटे हुए हैं। ममता बनर्जी भी खुद को राष्ट्रीय स्तर की नेता बनाने और 2024 में प्रधानमंत्री मोदी के विकल्प के तौर पर पेश कर रहीं हैं। तीनों की खींचतान की वजह से भी विपक्ष एकुजट नहीं पाया।   
 
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केसीआर और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
2. कई दलों को विश्वास नहीं दिला पाए: इस बार कांग्रेस की बजाय टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने विपक्ष को एकजुट करने की जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने ही 15 जून को विपक्ष की बैठक बुलाई थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी कई राजनीतिक दलों को विश्वास नहीं दिला पाईं कि विपक्ष का उम्मीदवार जीत हासिल कर सकेगा। इसके अलावा उम्मीदवार को लेकर भी उनके पास कोई ठोस दावेदारी नहीं थी। 
 

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी(फाइल) - फोटो : Social media
3. कांग्रेस का एक्टिव नहीं होना: जब ममता बनर्जी ने विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश की तो कांग्रेस पीछे ह गई। कांग्रेस अपने ही मुद्दों में उलझी रही। इसका खामियाजा भी विपक्ष को हुआ।
 
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ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक - फोटो : Social Media
विपक्ष से अब तक मुर्मू की उम्मीदवारी पर क्या किसने क्या कहा?
बीजद : ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी और भाजपा की विरोधी बीजद ने सबसे पहले द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के ट्विट के बाद माना जा रहा है कि उनकी पार्टी द्रौपदी का समर्थन करेगी। 
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जगन मोहन रेड्डी - फोटो : अमर उजाला
वाईएसआर कांग्रेस : बीजद के बाद वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से भी रिएक्शन आ गया। वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद वाईएसआरसीपी नेता विजयसाई रेड्डी वी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार के रूप में नामित होने पर द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। विजयसाई रेड्डी ने कहा, 'श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को एनडीए द्वारा राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित किए जाने पर हार्दिक बधाई। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सही कहा है कि आप हमारे देश की महान राष्ट्रपति होंगी। आपको हमारी शुभकामनाएं मैडम।'
 
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : एएनआई
ये दल  कर सकते हैं मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन : बीजद, वाईएसआर कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी ने भी विपक्ष की बैठक से दूरी बनाई थी। आम आदमी पार्टी की दिल्ली और पंजाब में सरकार है। पार्टी की तरफ से अब तक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है। पार्टी ने न तो यशवंत सिन्हा और न ही द्रौपदी मुर्मू के नाम पर अपना समर्थन दिया है। हालांकि, सियासी जानकारों की मानें तो अरविंद केजरीवाल की पार्टी द्रौपदी मुर्मू  को समर्थन दे सकती है। पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ये जरूर कहा कि इसको लेकर जल्द ही फैसला हो जाएगा। 
 

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Presidential Elections 2022: यशवंत सिन्हा और द्रौपदी मुर्मू - फोटो : Amar Ujala
अब तक क्या-क्या हुआ?
भाजपा की अगुआई वाली एनडीए ने आदिवासी समाज से आने वाली द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति के लिए प्रत्याशी बनाया है, जबकि विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा का नाम फाइनल हुआ है। भाजपा में द्रौपदी के नाम की चर्चा काफी दिन से हो रही थी। द्रौपदी के अलावा छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुइया उइके के नाम पर भी मंथन चल रहा था। 

वहीं, विपक्ष में पहले शरद पवार, फिर एचडी देवेगौड़ा, फारूक अब्दुल्ला और गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर सहमति बनी। हालांकि, चारों ने एक के बाद एक उम्मीदवार बनने से मना कर दिया। इसके बाद टीएमसी ने राज्यसभा सांसद यशवंत सिन्हा का नाम प्रस्तावित किया। सिन्हा के नाम पर सहमति बन गई। विपक्ष की तरफ से 22 राजनीतिक दलों को पहली बैठक में बुलाया गया था, जिसमें केवल 17 पहुंचे। इसके बाद से ही चर्चा शुरू हो गई थी कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष एकजुट नहीं हो पा रहा है। 
 
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जगन मोहन रेड्डी और के चंद्रशेखर राव - फोटो : अमर उजाला
संकेत पहले मिले थे, बाद में पूरी कहानी साफ हो गई
15 जून को जब राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाई तो आम आदमी पार्टी, वाएसआर कांग्रेस, टीआरएस, बीजद जैसी पार्टियों ने इससे खुद को अलग रखा था। यहां तक की यूपीए गठबंधन में शामिल शिवसेना से भी कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा। 
इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, बीएसपी, एआईएमआईएम और टीडीपी ने भी इस बैठक से दूरी बना रखी थी। जब विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा के नाम का एलान किया तो इनमें से किसी पार्टी ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। लेकिन जैसे ही भाजपा ने द्रौपदी के नाम का एलान किया एक के बाद एक कई दलों ने अपना सपोर्ट जाहिर कर दिया।
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