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लोकसभा चुनाव 2019ः बिहार की इन सीटों पर छिड़ेगा 'महासंग्राम', किसमें कितना है दम

Sat, 30 Mar 2019 05:35 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिहार में कई सीटों पर दिलचस्प मुकाबले - फोटो : Amar Ujala
बिहार में तमाम जद्दोजहद के बाद आखिर महागठबंधन ने भी सीट बंटवारे का एलान कर दिया। इसी के साथ करीब-करीब सभी सीटों पर उम्मीदवारों का एलान भी हो चुका है। बिहार की 40 सीटों पर छिड़े महासंग्राम मे योद्धा ताकतवर हैं, जाहिर है युद्ध भी जोरदार होगा। आइए, जानते हैं किस सीट पर क्या हैं समीकरण।
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रंजीत रंजन-दिलेश्वर कामत - फोटो : social media
सुपौलः रंजीत रंजन बनाम दिलेश्वर कामत
सुपौल बिहार की हाईप्रोफाईल सीट है। यहां से कांग्रेस की प्रवक्ता रंजीत रंजन सांसद हैं। कांग्रेस ने इस बार भी उन्हे सुपैल से चुनावी संग्राम में उतारा है, जबकि जदयू ने अपने पुराने प्रत्याशी दिलेश्वर कामत को एक बार फिर मौका दिया है। यहां दोनों उम्मीदवारों में जोरदार मुकाबला है।
पिछले चुनाव में भाजपा और जदयू ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, लेकिन वो इस बार एक साथ मैदान में हैं। इस कारण रंजीत रंजन की राह कठिन हो सकती है। रंजीत रंजन बिहार के मधेपुरा से सांसद बाहुबली नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पत्नी हैं। कहा जाता है कि पिछली बार के नजदीकी मुकाबले में पप्पू यादव का यादव कार्ड चल गया था, जिस कारण मोदी लहर के बावजूद रंजीत रंजन जीत गई थीं।
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विभा देवी-चंदन कुमार - फोटो : social media
नवादाः चंदन कुमार बनाम विभा देवी
नवादा से भाजपा सांसद गिरिराज सिंह का टिकट इस बार काट दिया गया। यह सीट लोजपा के हिस्से है, जहां से चंदन कुमार उम्मीदवार हैं। इधर, महागठबंधन में राजद ने जेल में बंद राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को नवादा से चुनावी मैदान में उतारा है।  इस सीट पर मुकाबला हर बार भाजपा बनाम राजद ही रहा है। नवादा की सीट भूूमिहार बाहुल्य मानी जाती है, जबकि यादव वोटर के साथ साथ दलित-महादलित मतदाता यहां प्रभावी साबित होते रहे हैं। विभा देवी यादव सुमदाय से आती है। यादव-मुस्लिम वोटरों का माय समीकरण बनने की स्थिति में चंदन कुमार की राह कठिन हो सकती है। 

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राजीव प्रताप रुडी-चंद्रिका राय - फोटो : social media
सारणः राजीव प्रताप रूडी बनाम चंद्रिका राय
सारण लोकसभा सीट राजद का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में यहां से भाजपा के  राजीव प्रताप रुडी ने जीत दर्ज की थी। रुडी मोदी सरकार में मंत्री भी बने लेकिन उन्हे बाद में किसी कारण मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। सारण से रुडी एक बार फिर से ताल ठोक रहे हैं और उनके सामने हैं लालू यादव के समधी चंद्रिका राय। सारण राजपूतों का गढ़ माना जाता है, जो परंपागत रुप से भाजपा के वोटर माने जाते हैं। हालांकि यादव-मुस्लिम वोटरों का समीकरण राजद के पक्ष में जाता रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में ये समिकरण बिखर गया था। इस कारण्ज राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी हार गईं थी। 
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उदय सिंह-संतोष कुशवाहा
पूर्णियाः जेडीयू के संतोष कुशवाहा बनाम उदय सिंह
2014 लोकसभा चुनाव में जदयू को जिन दो सीटों पर जीत मिली थी, उनमें से एक पू्र्णिया की सीट है। जदयू, भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ी थी। पूर्णिया के सांसद संतोष कुशवाहा ने मोदी लहर में भी नीतीश कुमार की लाज बचाई थी। संतोष ने करीबी मुकाबले में भाजपा के उदय सिंह को हराया था। इस बार उदय सिंह ने पाला बदल लिया है और कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। मुकाबला नजदीकी होने का अनुमान है, क्योंकि सीमांचल की इस सीट पर राजद का यादव और मुस्लिम वाला समीकरण कांग्रेस के साथ होगा और  एनडीए का खेल बिगाड़ सकता है।
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अब्दुल बारी सिद्दीकी - फोटो : social media
दरभंगाः भाजपा के गोपालजी ठाकुर बनाम अब्दुल बारी सिद्दीकी
दरभंगा की सीट को लेकर कई दिनों तक कांग्रेस और राजद में घमासान मचा रहा। कांग्रेस भाजपा के बागी नेता और दरभंगा से मौजूदा सांसद कीर्ति आजाद को उतारना चाहती थी, लेकिन सीट राजद के खाते में गई और राजद के दिग्गज नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी वहां से मैदान में है। इधर, भाजपा ने गोपालजी ठाकुर को टिकट दिया है। दरभंगा की सियासत सवर्ण केंद्रित रही है, जिसका फायदा भाजपा को मिलता रहा है, जबकि पिछडों का वोट इस बार भी राजद, लोजपा और जदयू में बंटकर एनडीए की ओर चला जाएगा।
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लल्लन सिंह-नीतस सिंह - फोटो : social media
मुंगेरः ललन सिंह बनाम नीलम देवी
जदयू के कद्दावर नेता राजीव रंजन प्रसाद उर्फ ललन सिंह 2014 में भी मुंगेर से मैदान में उतरे थे, लेकिन भाजपा समर्थित लोजपा की वीणा देवी उन पर भारी साबित हुई थी। इस बार एनडीए में शामिल होने की वजह से मुंगेर की सीट जदयू के खाते हैं और ललन सिंह इस बार जीत की उम्मीद के साथ उतरे हैं। उनके सामने कांग्रेस से बाहुबली नेता अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी मैदान में हैं। दोनों ही उम्मीदवार भूमिहार वर्ग से हैं और मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में अनंत सिंह का भी अपना प्रभाव है। ऐसे में जोरदार मुकाबले की उम्मीद है। 
 
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रामचंद्र पासवान-अशोक - फोटो : social media
समस्तीपुरः रामचंद्र पासवान बनाम अशोक
यहां से लोजपा नेता रामचंद्र पासवान वर्तमान सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अशोक को बड़े कम अंतर से हराया था, जिसको देखते हुए ही कांग्रेस ने एक बार फिर से अशोक पर भरोसा दिखया है। पिछले चुनाव में जदयू के वोटर लोजपा की और ट्रांसफर हो गए थे, जिसकी वजह से रामचंद्र जीत तक पहुंच पाए थे। इसबार लोजपा और जदयू दोनों एनडीए का हिस्सा है। राजद के कोर वोटर कांग्रेस की ओर ट्रांसफर होते हैं तो उम्मीद है कि टक्कर जोरदार होगी। है। 
 
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