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Mumbai Tour in Lockdown 01: लाखों की भीड़ से भरी रहने वाली इन जगहों पर अब नहीं दिखता एक भी इंसान

Mon, 06 Apr 2020 06:07 PM IST
Avinash Pal पंकज शुक्ल, मुंबई
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लॉकडाउन के बीच दक्षिण मुंबई - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए मुंबई शहर के लोग अपनी पूरी ताकत से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। 2018 के संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के हिसाब से मुंबई आबादी के लिहाज से देश का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है और इसकी आबादी करीब 2 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। हालांकि, भारत सरकार की 2011 जनगणना के हिसाब से मुंबई देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है। दिन रात लोगों से बजबजाते रहने वाला ये शहर इन दिनों लॉकडाउन में कैसा दिखता है, इसके लिए हम ले चलते हैं आपको दक्षिण मुंबई की सैर पर। इस सैर की पहली कड़ी में हम आपको दिखाएंगे दक्षिणी मुंबई का वो इलाका जिसे दो साल पहले वैश्विक विरासत माना गया है।
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एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई
तो मुंबई लॉकडाउन के वनडे टूर की शुरूआत हम करते हैं इस सुंदर सी इमारत से है। हिंदी फिल्मों में ये इमारत आपको खूब नजर आती है। कभी अदालत के बाहरी अहाते के रूप में तो कभी किसी बड़े बैंक की इमारत की तरह। दरअसल ये इमारत है एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई की। 26 नवंबर 1804 को बंबई में लिटरेरी सोसाइटी ऑफ बॉम्बे की बैठक को इसकी स्थापना की शुरुआत माना जाता है और इसका श्रेय सर जेम्स मैकिनटोश को दिया जाता है। लंबे समय तक ब्रिटेन की रॉयल एशियाटिक सोसाइटी से सम्बद्ध रही इस संस्था को देश की आजादी के  बाद 1954 में स्वतंत्र संस्था का दर्जा मिला और तब से ये केंद्र सरकार से वित्त पोषित है। आमतौ पर यहां दिन भर चहल पहल दिखती है, लेकिन लॉक डाउन की ये तस्वीर अपने आप में अनोखी है।
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बीएमसी कार्यालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बीएमसी कार्यालय
और ये है बृहन्मुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी का मुख्य कार्यालय। मध्य रेलवे के मुंबई के आखिरी सिरे यानी विक्टोरिया टर्मिनस यानी छत्रपतिशिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन के ठीक सामने तिकोनिया पर बनी ये इमारत यूनेस्को की वैश्विक धरोहरों में शामिल है। बीएमसी देश ही नहीं एशिया की की सबसे बड़ी स्थानीय प्रशासन संस्था है और इसका इलाका 434 वर्ग किमी में फैला है।  

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दादाभाई नौरोजी रोड - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दादाभाई नौरोजी रोड
बीएमसी की इमारत की नींव 9 दिसंबर 1984 को तब के वॉयसराय लॉर्ड रिपन ने रखी थी। इस इमारत की डिजाइन फ्रेडिरिक विलियम स्टीवेंस ने बनाई और ये पूरी इमारत नौ साल में 1893 में बनकर तैयार हुई। आम दिनों में इस इमारत के दोनों तरफ से गुजरने वाली सड़कों यानी दादाभाई नौरोजी रोड और महापालिका मार्ग को पैदल पार करना बहुत ही मुश्किल काम होता है। लेकिन, लॉकडाउन में यहां भी सब शांति शांति है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट
क्या आपको पता है कि आजाद देश भारत को पहला चीफ जस्टिस, पहला अटॉर्नी जनरल और पहला सॉलीसिटर जनरल देने वाली अदालत यही बॉम्बे हाईकोर्ट है। इस उच्चन्यायालय का अधिकार क्षेत्र महाराष्ट्र के अलावा गोवा, दादार व नगर हवेली एवं दमन व दीव हैं। इस हाईकोर्ट के 22 जज अब तक सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं और इनमें से आठ तो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन चुके हैं। वैश्विक धरोहरों में शामिल इस इमारत का काम अप्रैल 1871 में शुरू हुआ और नवंबर 1878 तक चला। जेम्स ए फ्यूलर की डिजाइन पर बनी इस इमारत में पहली सिटिंग 10 जनवरी 1879 को हुई। चार साल पहले बॉम्बे हाईकोर्ट को यहां से बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स ले जाने का एलान हो चुका है। इस हाईकोर्ट के अलावा मद्रास हाईकोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट का नाम बदलने का फैसला कैबिनेट ने 5 जुलाई 2016 को लिया था, हालांकि इस पर संसद की मुहर लगना बाकी है।
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फ्लोरा फाउंटेन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फ्लोरा फाउंटेन
और ये है रोम की देवी फ्लोरा की याद में बना फ्लोरा फाउंटेन। आम दिनों में यहां इतनी भीड़ होती है कि आपको पैदल चलना दूभर हो जाए लेकिन लॉकडाउन का सन्नाटा इन दिनों यहां ऐसा है कि दिन में भी आदमी डर जाए। दादाभाऊ नौरोजी मार्ग के छोर बना ये फव्वारा 1864 से यहां इसी शान के साथ मौजूग है। 1960 तक इस जगह को भी फ्लोरा फाउंटेन या बंबई के पिकाडिली सर्कस (यहां पांच सड़के आकर मिलती हैं) के नाम से जाना जाता था। लेकिन भाषीय आधार पर हुए राज्यों के पुनर्गठन के दौरान महाराष्ट्र की स्थापना को लेकर हुए आंदोलनों में शहीद लोगों के नाम पर यहां पास में ही एक और स्मारक बनाया गया है और उसी के नाम पर अब इस जगह का नाम है, हुतात्मा चौक।
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