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टीकाकरण: बदलाव के लिए यूनिसेफ और अमर उजाला ने मिलाए हाथ; स्वास्थ्य पत्रकारिता पर मीडिया पेशेवरों की कार्यशाला

Thu, 28 Dec 2023 08:36 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

सेहत को लेकर जागरूकता फैलाने के प्रयास के तहत संयुक्त राष्ट्र की संस्था- यूनिसेफ और अग्रणी पत्रकारिता संस्थान- अमर उजाला ने हाथ मिलाए हैं। जयपुर में आयोजित क्रिटिकल अप्रेजल स्किल वर्कशॉप में बच्चों को जीवनरक्षक टीका नियमित रूप से लगाने के तरीकों पर मंथन किया गया। 
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जयपुर में स्वास्थ्य पत्रकारिता पर मीडिया पेशेवरों की कार्यशाला - फोटो : amar ujala
बच्चों की सेहत मीडिया के लिए प्रमुख मुद्दा बने, इस दिशा में प्रयास हो रहे हैं। इसी कड़ी में स्वास्थ्य पत्रकारिता पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। बच्चों की शिक्षा और सेहत के मुद्दों पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था- UNICEF ने देश के अग्रणी पत्रकारिता संस्थान अमर उजाला के साथ साझेदारी का फैसला लिया है। इसका मकसद समाज के अंतिम छोर पर रहने वाले बच्चों का नियमित टीकाकरण कराना है। यूनिसेफ ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में अमर उजाला की साझेदारी में कार्यशाला आयोजित की। इसमें देशभर के 25 से अधिक मीडिया पेशेवरों ने शिरकत की।
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बच्चों के टीकाकरण में पत्रकारों की भागीदारी; इन तरीकों पर हुई चर्चा

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जयपुर में आयोजित कार्यशाला में शामिल होने वाले प्रतिभागी - फोटो : amar ujala
कार्यशाला में समाचार पत्रों में संपादकीय और ओपिनियन लिखने जैसे तरीकों को अपनाने की सलाह दी गई। जमीनी स्तर की कहानियां बताकर बच्चों को टीका लगवाने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।  सोशल मीडिया प्लेटफार्म के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। यूनिसेफ राजस्थान के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा, बड़ी संख्या में अभी भी बच्चों को टीका लगाया जाना बाकी है। आंशिक टीके या बिना टीकाकरण वाले बच्चों के दोबारा बीमार होने का अधिक खतरा होता है। बीमारियों के कारण असमय मौत का खतरा भी बना रहता है। खास तौर पर दुर्गम इलाकों में रहने वाले ऐसे बच्चों की पहचान और उनका टीकाकरण बहुत जरूरी है।
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बच्चों के टीकाकरण पर माता-पिता को सही सूचना दे मीडिया

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अमर उजाला और UNICEF की संयुक्त पहल में स्वास्थ्य पत्रकारिता पर विस्तार से हुई बातें - फोटो : amar ujala
कार्यशाला में यूनिसेफ इंडिया के संचार प्रमुख जाफरीन चौधरी ने कहा, गलत सूचना अक्सर टीकाकरण के प्रति झिझक पैदा करती है। मीडिया माता-पिता और देखभाल करने वालों को सही जानकारी और सबूत के साथ वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्कशॉप में अमर उजाला, देहरादून के पूर्व संपादक संजय अभिज्ञान भी शामिल हुए। उन्होंने नियमित टीकाकरण, एंटीबायोटिक्स, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल जैसे विषयों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बच्चों को प्रभावित करने वाले मुद्दों से जुड़ी साक्ष्य-आधारित पत्रकारिता के अनुभव भी साझा किए।

कार्यशाला से पूर्वाग्रह दूर करने में मदद
उन्होंने कहा, शोरगुल से बचना और स्वास्थ्य मुद्दों पर सटीक रिपोर्टिंग, पत्रकारों के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। सीएएस जैसी कार्यशाला जटिल स्वास्थ्य विषयों पर रिपोर्टिंग को आसान बनाती है। इससे पूर्वाग्रहों को दूर करने और न्यूज रूम की दुविधाओं को दूर करने में भी मदद मिलती है।

यूनिसेफ की स्वास्थ्य अधिकारी बोलीं, कोरोना महामारी के बाद भारत का प्रयास सराहनीय

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यूनिसेफ पदाधिकारियों ने देशभर के पत्रकारों को स्वास्थ्य पत्रकारिता की बारीकी बताई, जवाबदेही पर जोर - फोटो : amar ujala
क्रिटिकल अप्रेजल स्किल (सीएएस) वर्कशॉप जैसे आयोजन गलत सूचनाओं का मुकाबला करने में पत्रकारिता पेशेवरों के लिए मददगार साबित होगा। इसकी मदद से देशभर में हर लड़की और लड़के का टीकाकरण हो, ऐसा सुनिश्चित किया जा सकेगा। यूनिसेफ इंडिया की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ यशिका नेगी ने कोरोना महामारी के बाद टीकाकरण के क्षेत्र में भारत के प्रयासों की सराहना की। यूनिसेफ की संचार अधिकारी सोनिया सरकार और सीएएस विशेषज्ञ विक्रम मजूमदार ने भी पत्रकारों का मार्गदर्शन किया। बता दें कि सीएएस कार्यक्रम 2014 में विकसित किया गया था।
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सरकार ने टीकाकरण पर सराहनीय पहल की

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यूनिसेफ के अधिकारियों से पत्रकारों ने बेबाकी से की स्वास्थ्य पत्रकारिता पर चर्चा - फोटो : amar ujala
स्वास्थ्य अधिकारी डॉ यशिका नेगी ने कहा, सघन मिशन इंद्रधनुष 3 और 4 जैसे मजबूत सरकारी प्रयासों के कारण बच्चों को बड़ी संख्या में टीके लगाए गए। शून्य खुराक वाले बच्चों की संख्या 2021 में 2.7 मिलियन थी। अगले साल यानी 2022 में संख्या आधी होकर 1.1 मिलियन रह गई। इसमें मीडिया की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। कामकाजी स्वास्थ्य पत्रकारों के साथ-साथ पत्रकारिता और जनसंचार के छात्रों के लिए यूनिसेफ समर्थित क्रिटिकल अप्रेजल स्किल्स (सीएएस) वर्कशॉप शुरू किया गया है। इसमें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, थॉमसन रॉयटर्स और आईआईएमसी का भी सहयोग है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से आए अमर उजाला के पत्रकारों ने इसमें भाग लिया।
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