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ये लक्षण हैं तो आप भी हैं भावनात्मक और मानसिक रूप से बीमार, तुरंत मिलें डॉक्टर से वरना बढ़ेगी समस्या

सार

भावनात्मक स्वास्थ्य तय करता है कि आपकी शख्सियत कैसी है
भावनात्मक स्वास्थ्य के मापदंड
जानिए भावनात्मक स्वास्थ्य के बारे में सबकुछ
भावनात्मक स्वास्थ्य के लक्षण, जटिलताएं और बचाव
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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
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हम सब बचपन से सुनते आए हैं कि जिंदगी एक बार मिलती है, लिहाजा इसे बेहतर तरीके से जीना चाहिए। मगर क्या सच में हम इसका अनुसरण कर रहे हैं? शारीरिक स्वास्थ के साथ बहुत जरूरी है भावनात्मक स्वास्थ्य। अगर छोटी-छोटी बातों से आप परेशान हो जाते हैं और खुद को नकारात्मक विचारों के बीच पाते हैं तो आपके लिए जरूरी हो जाता है कि आप भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health) बारे में जानें।

दरअसल, भारत में जिस तरह से वित्तीय शिक्षा की कमी है वैसे ही भावनात्मक और मानसिक रोगों के प्रति एक तरह की जानकारी का अभाव है। केवल जानकारी का अभाव ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से अस्वस्थता को अक्सर पागल हो जाने की स्थिति में डाल दिया जाता है, जबकि मनोविज्ञान कहता है कि कोई भी व्यक्ति संपूर्ण रूप से मानसिक और भावनात्मक रूप से वैसा ही फिट है जैसा शारीरिक रूप से होता है। यानी की छोटी-मोटी चीजों की स्थिति अक्सर ऊपर-नीचे होती रहती है।

बहरहाल, ऐसे में हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य क्या है और कब कोई व्यक्ति यह समझे कि वह भावनात्मक और मानसिक रूप से फिट नहीं है। 
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क्या होता है भावनात्मक स्वास्थ्य ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला - क्या होता है भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health) ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- आम भाषा में अगर बात कही जाए, इमोशनल हेल्थ एक तरह की भावनाएं होती है। अच्छा लगना, बुरा लगना , प्यार, नफरत क्रोध आना, चिड़चिड़ेपन होना यह सब हमारी भावनाएं होती हैं और हमारा भावनात्मक स्वास्थ्य इन सब पर निर्भर करता है।  
  • आप इन सब एहसासों पर कितना नियंत्रण कर पाते हैं और इनके साथ कितना संतुलित रह पाते हैं। यह आपके भावनात्मक स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है।
  • अगर आप संतुलन बना पाते हैं तो आपका भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा है।
  • ठीक इसके विपरीत अगर आप इसमें असंतुलित हो जाते है तो आपका भावनात्मक स्वास्थ्य चिंताजनक है।
1947 में डब्लूएचओ के अनुसार भावनात्मक स्वास्थ्य को पारिभाषित किया गया, जिसके अनुसार, " सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास की बेहतरीन स्थिति"
 
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भावनात्मक स्वास्थ्य के लक्षण

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भावनात्मक स्वास्थ्य के लक्षण - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-ऐसे कौन से लक्षण हैं जिनसे पता चलता है आपका भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional ilness) खराब है ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- जब सामान्य सी बात पर अधिक प्रतिक्रिया हो या फिर 'नार्मल एक्शन' पर 'ओवर रिएक्शन' हो तब इस बात पर जरूर सोचना चाहिए और डॉ की सलाह लेनी चाहिए।
अब तक एनएचएस ने शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता दी है, लेकिन 'ग्रीन- पेपर' हमारा स्वस्थ राष्ट्र संकेत देता है कि इसे बदलने और इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

क्या रोना भावनात्मक स्वास्थ्य हानिकारक है ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-क्या रोना भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health) के लिए हानिकारक है या फिर सही है ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- रोना एक सामान्य सी प्रक्रिया हैं। मगर यह उस वक्त गंभीर हो जाता है जब अति या ज्यादा हो। जब एक व्यक्ति इस पर नियंत्रण ना कर पाए तब यह विषय गंभीर हो जाता है।
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जब भी कोई व्यक्ति ऐसे दौर से गुजरे तो उसको सबसे पहले क्या करना चाहिए?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-जब भी कोई व्यक्ति ऐसे दौर से गुजरे तो उसको सबसे पहले क्या करना चाहिए?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- अगर आपको ऐसा लगे की आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं तब निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए,
  • एकाग्र होकर विचार करना चाहिए,
  • ऐसी कौन सी वजह है जो नियंत्रण से बाहर है और आपको परेशान करती है।
  • खुद पर नियंत्रण के उपायों पर काम करना चाहिए।  
  • सोचना चाहिए मूल कारण क्या हैं जिसकी वजह से आपके ऊपर प्रभाव पड़ता है।
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इस समस्या को लेकर महिलाओं में सबसे ज्यादा किस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-इस समस्या को लेकर महिलाओं में सबसे ज्यादा किस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- डॉ ऐसे मामलें में दो तरह से सोचता है,
  • पुरानी केस स्टडी देखता है।
  • और वर्तमान में क्या कारण है जो प्रभाव डाल रहे हैं।
  • दोनों स्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन करना जरूरी होता है।
  • महिलाओं से जुड़े सबसे ज्यादा दो तरह के मामलें सामने आते है,
  • पहला पारिवारिक परिस्थितियां और दूसरा कार्यस्थल का प्रभाव।
  • बहुत सारे मामलें में महिलाएं इन जगहों पर अपनी बात नहीं रख पाती है और बोल नहीं पाती हैं जिसका प्रभाव उनके मानसिक और भावनात्मक स्वस्थ पर पड़ता है।
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भावनात्मक स्वास्थ्य सही रखने के लिए कैसा हो खान-पान ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health)  सही रखने के लिए कैसा हो खान-पान ( food Habit) ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- खान-पान अपने स्वास्थ के हिसाब से लेना चाहिए, यह प्रत्येक व्यक्ति पर अलग अलग निर्भर करता है। मगर अपने वजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए, इसका सीधा संबंध आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत से होता हैं ।
खाद्य पदार्थों का बहुत महत्व होता है,
  • कॉफ़ी, शराब और मीठा( चीनी) इनके अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए।
  • पानी अधिक पीना चाहिए।
  • मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट से युक्त प्रदार्थों का सेवन करना चाहिए।

भावनात्मक स्वास्थ्य की जटिलताएं ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health)  की जटिलताएं ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- भावनात्मक विकार जटिलताएं निम्नलिखित है,
  • नींद आने में परेशानी महसूस करना।
  • मादक प्रदार्थों का सेवन करने की इच्छा पैदा होना।
  • बहुत ज्यादा एंग्जाइटी महसूस करना।
  • असहज महसूस करना।
  • अकेला रहना।
  • सामाजिक अलगाव होना।
  • अपने आपको किसी लायक ना समझना।
 
-शराब या ड्रग्स का प्रयोग।
-अच्छे रिश्तों का न होना।
-कोई पुरानी गंभीर मानसिक बीमारी।
-बचपन का कोई दुर्व्यवहार।
-मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन का हो जाना।
-अनुवांशिक समस्याएं।
-हिंसा और बलात्कार आदि का प्रभाव।
-लंबे समय तक चिंताग्रस्त रहना और किसी तनाव से गुजरना।
-किसी प्रियजन की मौत और उसका सदमा, कोई अप्रिय दुर्घटना, अपमान आदि के कारण तनाव में पड़ जाना और निरंतर उसके बारे में सोचते रहना।
-मस्तिष्क में चोट, संक्रमण की वजह से।

भावनात्मक स्वास्थ्य के बारे में मनोचिकित्सक की सलाह कितनी जरुरी है ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health)  के बारे में मनोचिकित्सक की सलाह कितनी जरुरी है ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- अगर कोई मेडिकल कारण सामने निकलकर नहीं आता है तो मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लीजिए और अगर जरूरत पड़े तो समय-समय पर काउंसलिंग जरूर करवाएं। डॉक्टर सबसे पहले यह जानने की कोशिश करता है कि आपकी केस हिस्ट्री क्या है, और आपको किस स्तर के ट्रीटमेंट की जरूरत है उसके बाद वो निर्णय करता है कि आपको क्या इलाज दिया जाना चाहिए। मनोचिकित्सक सबसे पहले आपके विकार का इलाज करते समय यह तीन बातें देखने का प्रयास करता है,
  • लक्षणों की तीव्रता।
  • लक्षणों की अवधि।
  • लक्षणों का सामान्य गतिविधियों में प्रभाव।
  • मनोचिकित्सा एक प्रकार की काउंसलिंग होती है जो आपकी मानसिक अवस्था और उसके स्तर को समझने की कोशिश करता है आपकी भावनात्मक प्रतिक्रिया को समझने का प्रयास करता है।
  • वार्तालाप के जरिए आपको समझाने और निपटने का प्रयास करता है।

संयुक्त परिवार का ना होना भी क्या इस पर असर डालता है ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-संयुक्त परिवार का ना होना भी क्या इस पर असर डालता है ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- इसके दोनों पक्ष हैं। सकारात्मक और नकारात्मक भी, सयुंक्त परिवार में आपका स्ट्रेस मैनेजमेंट अच्छा होता हैं कोई भी बात परिवार के साथ मिलकर, उनकी सलाह से दूर की जा सकती है। खासकर आज की युवा पीढ़ी में जहा करियर बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, बच्चों के विकास में भी सयुंक्त परिवाह की अहम भूमिका है। अकेलापन भी बहुत हद तक आपके भावनात्मक स्वास्थ्य पर असर डालता हैं। परिवार की भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं ।

भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतरीन रखने के टिप्स ?

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भावनात्मक स्वास्थ्य टिप्स - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला-भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health)  बेहतरीन रखने के टिप्स ?

डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- भावनात्मक विकार से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं,
  • तनाव का प्रबंधन करना सीखिए और अपने दिमाग को आराम देने का तरीका सोचिए।
  • व्यायाम के लिए वक्त दीजिए, व्यायाम करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता हैं।
  • अपने नियमित काम से ब्रेक लीजिए और खुद के लिए प्लान कीजिए।
  • स्वस्थ आहार खाने- पीने की आदत डालिए।
  • 'बैलेंस डाइट' का अनुसरण कीजिए।
  • आपको किन बातों से तनाव या परेशानी होती है उन बातों का बहुत ख्याल रखिए।
  • जिन परिस्थियों से आपको भावनात्मक तौर पर परेशानी होती है उनसे बचकर चले।
  • अस्वस्थ पदार्थों के सेवन से बचें।
  • नशीलें पदार्थों को नजअंदाज करें ।

Bibliography and References-
Expert- Dr. Rohit Sharma Psychiatrist.
*(Questionnaire Based).  
*(Interview).

*Available from: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1114432/
*Emotional wellbeing and its relation to health
*Available from: Physical disease may well result from emotional distress. 

*World Health Organisation. The constitution of the World Health Organisation. WHO Chronicle 1947. 
'In 1947 the World Health Organisation defined health as “a state of complete physical, mental and social wellbeing.”
*Available from: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20267861

*Available from: Secretary of State for Health. Our healthier nation. London: Department of Health; 1998
'the NHS has given precedence to promoting physical wellbeing, but the green paper Our Healthier Nation signals that this may need to change'
*Available from: https://www.ncbi.nlm.nihgov/pmc/articles/PMC1114432/

नोटः यह लेख आपकी जागरूकता और समझ बढ़ाने के  लिए साझा किया है। यदि आप संबंधित किसी बीमारी अथवा लक्षण से खुद को ग्रसित पाते हैं तो उचित होगा कि अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 



 
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